जो शादी की तारीख बता रहे, वही खर्चा भी उठा लें वरुण धवन

हाल में ऐक्टर वरुण धवन की फिल्म ‘स्ट्रीट डांसर 3डी’ रिलीज हुई है। पिछले कुछ दिनों से वरुण की फिल्मों के अलावा उनकी शादी की भी चर्चा चल रही हैं। ऐसे में उन्होंने अपनी आने वाली फिल्मों और पर्सनल लाइफ के बारे में भी बात की। एक आर्टिस्ट को हमेशा नएपन की तलाश रहती है। ऐसे में, आप डांस फिल्म एबीसीडी 2 करने के बाद दूसरी डांस फिल्म स्ट्रीट डांसर के लिए क्यों राजी हुए?
इस फिल्म में एक लाइन है कि ‘चाहे तेरे लब पर वाहेगुरु का नाम आवे या न आवे, वह लम्हा भी इबादत दा होंदा है, जब तू किसी और के काम आवेÓ यही इसकी सेंट्रल थीम है। यह फिल्म स्ङ्ख्रञ्ज यानी सिख वेलफेयर ऐंड अवेयरनेस टीम पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री से प्रभावित है। ये लोग बाहर के देशों में उन लोगों की मदद करते हैं, जिनके पास खाना-पीना, घर आदि नहीं होता है। फिल्म आज के युवाओं के बारे में हैं, जहां, एक बंदा, जिसके पास कोई जिम्मेदारी नहीं है, वह वक्त के साथ सीखता है कि दुनिया क्या होती है, इंसानियत क्या होती है? आम तौर पर हम फिल्में सक्सेस के बारे में बनाते हैं कि एक आदमी सक्सेसफुल कैसे हुआ? इस फिल्म में एक आदमी सक्सेसफुल होने के बाद इंसानियत, टीमवर्क, यह सब सीखता है, तो मुझे यह ऐंगल बहुत अच्छा लगा। दरअसल, मेरी पर्सनल जर्नी भी कुछ ऐसी ही है कि एक टाइम पर मुझे सिर्फ सक्सेस चाहिए था कि जीतना है, जीतना है। यह सिर्फ एक डांस फिल्म नहीं है। मैं खुद इससे गुजरा हूं, इसलिए इस फिल्म ने मुझे अट्रैक्ट किया।
फिल्म में हिंदुस्तान और पाकिस्तान के रिश्तों के दोनों पक्षों को भी शायद दिखाया गया है कि हमारे बीच तकरार है, पर सांस्कृतिक तौर पर हम एक ही हैं। इन दोनों मुल्कों के रिश्ते पर आपकी क्या राय है?
नहीं, फिल्म में हम ऐसा नहीं दिखा रहे हैं। हम ये दिखा रहे हैं कि हिंदुस्तानी सभ्यता यह सिखाती है कि अगर कोई तकलीफ में है, तो हम उनकी मदद करेंगे, चाहे वह हमारा दुश्मन ही क्यों न हो! हमें यही सिखाया जाता है कि अगर कोई इंसान नीचे गिरा है, तो हम हमेशा उसे उठाने के लिए हाथ देंगे। हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच जो कॉम्पिटिशन होता है, चाहे क्रिकेट में या डांस में, वह भी दिखाया गया है, लेकिन हमने पाकिस्तान को कहीं से नीचे नहीं दिखाया है। यह फिल्म इस सबके बारे में नहीं है। यह युवाओं के बारे में है।
स्ट्रीट डांसर हिंदुस्तान-पाकिस्तान के डांसर्स पर है, जो अपनी कला की वजह से मिलते हैं। कला को सरहदों में नहीं बांटा जा सकता है, लेकिन कई बार ऐसा हो जाता है। आपकी इस पर क्या राय है?
यह आपके राजनीतिक माहौल पर निर्भर करता है। इस पर निर्भर करता है कि दोनों देशों के बीच क्या हो रहा है। मैं यह मानता हूं कि अगर बॉर्डर पर हमारे जवान देश को सुरक्षित रखने के लिए लड़ रहे हैं, तब हम जाकर ये नहीं बोल सकते हैं कि हमें कला को नहीं बांटना है या ये करना है, लेकिन जब रिश्ते अच्छे हैं, तो कला या खेल अमन और शांति भी फैला सकती है, जो बहुत अच्छी बात है। लेकिन ये फैसले हमारे हाथ में नहीं होते और मुझे लगता है कि हमें इन मामलों में अपने जवानों का भी सम्मान करना चाहिए।
फिल्म में पहले आपके ऑपोजिट कटरीना कैफ थीं, बाद में श्रद्धा कपूर आईं। कटरीना के फिल्म से अलग होने पर आपकी क्या प्रतिक्रिया थी?
श्रद्धा मेरी बहुत अच्छी दोस्तों में से हैं और मेरे मन में उनके लिए बहुत प्यार है। मुझे लगता है कि कहीं न कहीं यह फिल्म उनके बिना नहीं बन सकती थी। मुझे लगता है कि गणपति बप्पा भी यही चाहते थे कि श्रद्धा ही फिल्म में हो। हम सब भी यही चाहते थे, तो यह उनके लिए घर वापस आने जैसा है। मैं बहुत खुश हूं कि यह फिल्म मेरे और श्रद्धा के साथ ही बनी।
हाल ही में आपकी नई फिल्म मिस्टर लेले अनाउंस हुई है, जिसके पोस्टर में आप केवल शॉर्ट्स में हैं। इस फिल्म में ऐसा क्या है?
यह फिल्म सात्विक लेले की जिंदगी पर है। इसमें शशांक खेतान तीसरी बार मुझे डायरेक्टर कर रहे हैं और बहुत लाजवाब स्क्रिप्ट है। मुझे लगता है कि ज्यादा जानकारी उन्हें ही अनाउंस करने देना चाहिए। अभी हम लोग ज्यादा कुछ दिखाना नहीं चाहते थे। दो पोस्टर्स ही मेरा काफी कुछ दिखा रहे हैं। यह फिल्म बहुत कॉमिक स्पेस में है कि इस इंसान की जिदंगी में क्या होता है और मुझे इस किरदार को करने में बहुत खुशी है।
आपके पापा डेविड धवन भी आपको तीसरी बार डायरेक्ट कर रहे हैं। मैं तेरा हीरो के मुकाबले कुली नंबर वन में डायरेक्टर के तौर पर उनमें कुछ बदलाव आया है?
उनमें अजीब बदलाव आया है। वे इस फिल्म के सेट पर मेरे साथ ज्यादा स्ट्रिक्ट थे, क्योंकि बहुत मुश्किल रोल है। जब ‘कुली नंबर वन’ की बात होती है, तो मुझे लगता नहीं है कि लोगों को पूरी फिल्म याद है। उस फिल्म में कॉमिडी को लेकर बहुत कुछ होता है। स्क्रीनप्ले भी काफी आड़ा-टेढ़ा है। गोविंदा और कादर खान उस फिल्म में कमाल हैं। इसलिए, पापा मेरे साथ बहुत स्ट्रिक्ट थे। परफॉर्मेंस के लिए उन्होंने मुझे बहुत पुश किया और बहुत सारी चीजें करवाई हैं, जो आपने मैं तेरा हीरो या जुड़वा में नहीं देखी है।
आप श्रीराम राघवन के साथ परमवीर चक्र विजेता अरुण खेत्रपाल की बायॉपिक भी कर रहे हैं। पहली बार रियल किरदार निभा रहे हैं, क्या तैयारी है?
श्रीराम ने मुझसे एक पेपर साइन करवाया है कि मैं फिल्म के बारे में ज्यादा बात नहीं कर सकता हूं और कुछ बता नहीं सकता हूं। ये सच बात है। मैंने श्रीराम को बोला भी था कि ये ट्वीट करा दें। उन्होंने अपने ऑफिस को आर्मी बेस बना दिया है, जहां वे फिल्म पर नॉन-स्टॉप काम कर रहे हैं। लेकिन हाल ही में मैं उत्तरलाई एअरफोर्स बेस गया था। वहां मैंने जवानों के साथ दो दिन बिताए थे, फाइटर जेट देखे। वह एक पैशन प्रॉजेक्ट है।

इन दिनों आपकी शादी की चर्चा भी जोर-शोर से चल रही है कि इस साल आप घोड़ी चढ़ जाएंगे?
उसमें अभी वक्त है। मैं खुद हैरान रह जाता हूं कि मीडिया में रोज एक डेट अनाउंस कर दी जाती है, जगह अनाउंस कर दी जाती है। मैं सोचता हूं कि यार, हमें तो पता ही नहीं है कि क्या हो रहा है, सबकुछ तो इन्हीं लोगों ने कर दिया है, तो शादी का खर्चा भी आप ही लोग उठा लो। मैं इसे कोई सीक्रेट नहीं रख रहा हूं, क्योंकि आप भी जानती हैं कि ये बात सीक्रेट तो रह नहीं पाएगी। सबको पता चल ही जाएगा, तो वह बात नहीं है, लेकिन जब तक सौ फीसदी कुछ न हो, तो मैं क्या बोलूं। अब तक कुछ ठाना नहीं है कि ये होने वाला है। जब हो जाता है, तो मैं बता दूंगा।

 

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