पीएनबी धोखाधड़ी की निवेशकों पर मारपीएनबी धोखाधड़ी की निवेशकों पर मारसरकारी बैंकों में डूबे 56,000 करोड़ रुपये

नई दिल्ली। देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक में 12 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी का मामला आने के बाद सरकारी बैंकों के शेयरों में लगातार गिरावट आने से इनके बाजार पूंजीकरण में 56 हजार करोड़ रुपये से अधिक की गिरावट आई है। 14 फरवरी को मामला सामने आने के बाद से 11 सरकारी बैंकों के बाजार पूंजीकरण में 56,251 करोड़ रुपये की कमी आई है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को हुआ है। एक माह में 42 फीसदी घटी कमाई- नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी पर सरकारी बैंकों के इंडेक्स में पिछले एक माह में 18 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है। इसमें सबसे ज्यादा 42 फीसदी की गिरावट पीएनबी के शेयरों में आई है। एसबीआई  में 16 फीसदी, बैंक ऑफ बड़ौदा में 15 फीसदी, केनरा बैंक में 16 फीसदी, बैंक ऑफ इंडिया में 31 फीसदी, इलाहाबाद बैंक में 25 फीसदी, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में 25 फीसदी आंध्रा बैंक में 16 फीसदी,  इंडियन बैंक में 14 फीसदी, सिंडिकेट बैंक में 19 फीसदी और ओबीसी में 18 फीसदी की गिरावट आई है।  किस बैंक में निवेशकों के कितने डूबेएसबीआई     22490 करोड़ रुपयेपीएनबी     14553 करोड़ रुपयेबैंक ऑफ बड़ौदा    6924 करोड़ रुपये केनरा बैंक   2231 करोड़ रुपयेआंध्रा बैंक     309 करोड़ रुपयेबैंक ऑफ इंडिया     3770 करोड़ रुपयेइंडियन बैंक     1868 करोड़ रुपयेएलाहाबाद बैंक     760 करोड़ रुपयेसिंडिकेट बैंक     520 करोड़ रुपयेओबीसी     478 करोड़ रुपयेयूनियन बैंक ऑफ इंडिया    2049 करोड़ रुपयेसावधान रहें निवेशक- एचडीएफसी सिक्यूरिटीज के प्रमुख विनोद शर्मा का कहना है कि सरकारी बैंकों के निवेशकों के लिए बेहद मुश्किल समय है क्योंकि उनके शेयरों में भारी गिरावट आई है। उनका कहना है कि यदि इन शेयरों में ज्यादा नुकसान हुआ है तो उसे बेचकर किसी दूसरे बैंक का शेयर खरीदना समझदारी भरा फैसला हो सकता है। शर्मा का कहना है कि निजी बैंकों के शेयर बेहतर स्थिति में हैं वहीं कुछ सरकारी बैंक भी अच्छा कर रहे हैं। उनका आकलन करके फैसला कर सकते हैं। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि नए निवेशकों को अभी सरकारी बैंकों का शेयर खरीदने से परहेज करना चाहिए।खुदरा बैंकिंग कारोबार देखकर खरीदें शेयर- शर्मा का कहना है कि मौजूदा समय में सरकारी बैंकों के शेयर दबाव में होने से इसका मतलब यह नहीं कि इसमें सुधार नहीं होने वाला है। उनका कहना है कि अर्थव्यवस्था में सुधार आते ही बैंकिंग सेक्टर पर भी उसका असर पड़ेगा और धोखाधड़ी या घोटाले का असर लंबी अवधि में नहीं पड़ता है। शर्मा का कहना है कि बैंकिंग शेयरों में निवेश करते समय निवेशकों को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि उसका खुदरा कारोबार ज्यादा है या नहीं। यदि खुदरा कारोबार ज्यादा है तो वैसे बैंकों के शेयरों पर जोखिम कम होता है।

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