एसएमई परिषद की 40 वीं बैठक प्रदेश की चार लघु इकाइयों के लिए परिषद बनी वरदान

जयपुर, 25 अप्रैल (का.सं.)। राजस्थान सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद द्वारा नोटिस जारी होने मात्र से राज्य की चार इकाइयों को पूना, हैदराबाद, सोनीपत और बैंगलोर की कंपनियों से भुगतान प्राप्त होने से बड़ी राहत मिली है। उद्योग आयुक्त कुंजी लाल मीणा की अध्यक्षता में उद्योग भवन में आयोजित राजस्थान सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद की 40 वीं बैठक में राज्य की छोटी कंपनियों को बड़ी राहत मिल सकी है। गौरतलब है कि परिषद द्वारा प्राथमिकता से बैठकों का आयोजन कर परिषद को प्राप्त प्रकरणों में दोनो पक्षों को सुनने के साथ ही आपसी समझाइश से विवाद के निस्तारण का भी प्रयास किया जाता है। उद्योग आयुक्त कुंजी लाल मीणा ने बताया किकेन्द्र सरकार के एमएसएमईडी एक्ट 2006 के प्रावधानों के अनुसार सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों से सामान प्राप्त करने वाले उद्योगों या संस्था को राशि का भुगतान 45 दिन में नहीं होने की स्थिति में संबंधित पक्ष उद्योग आयुक्त की अध्यक्षता में गठित सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद में वाद प्रस्तुत कर राहत प्राप्त कर सकते हैं। एमएसएमईडी एक्ट 2006 के प्रावधानों के अनुसार 45 दिन में भुगतान नहीं करने वाले पक्ष को मूलधन एवं विलंबित अवधि की बैंक ब्याज दर की 3 गुणा दर से ब्याज का भुगतान करना होता है। उद्योग आयुक्त कुंजी लाल मीणा की अध्यक्षता में गठित परिषद् के उद्योग आयुक्त कुंजी लाल मीणा के अलावा संयोजक राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति एन.सी. उप्रेती, उद्योग संघों के प्रतिनिधि ताराचंद गोयल, राजेन्द्र राठी व योगेश गौतम सदस्य है।राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक एन.सी. उप्रेती, उद्योग संघों के प्रतिनिधि लघु उद्योग भारती के प्रदेशाध्यक्ष ताराचंद गोयल व अपोलो माईनकेन के योगेश गौतम ने 40 प्रकरणों पर सुनवाई की। इनमें से जयपुर की फेल्टस का बैंगलोर की बफिंग हाउस, जयपुर की ही मग्नी टेक स्पेसिएलिटी केबल्स का पूने की केप्स्न प्रोडक्ट्स, जयपुर की जलधारा वाटर हार्वेस्टिंग साल्यूशन का सोनीपत की नेचर बायो फूड्स और कोटा की जल इन्फ्राडव्लपर्स का हैदराबाद की मेघा इंजीनियरिंग एण्ड इन्फ्रास्टर्क्चर को सप्लाई किए गए माल के बकाया का भुगतान प्राप्त होने से बड़ी राहत मिल सकी है। परिषद की बैठक में उद्योग विभाग की और उपनिदेशक एसएल पालीवाल व केएल स्वामी द्वारा प्रकरणों की विस्तार से जानकारी दी गई।बैठक में 40 प्रकरण सुनवाई के लिए रखे गए थे, इनमें से चार में आपसी समझौते से भुगतान प्राप्त हो गया वहीं करीब 10 प्रकरणों में अवार्ड पारित किए गए।

 

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