सिनेमा में गलत धारणाओं को तोडऩे और लोगों की आंखें खोलने की क्षमता-दीपिका

 

मेघना गुलजार निर्देशित फिल्म ‘छपाक और कबीर खान निर्देशित फिल्म ’83 में नजर आने वाली अभिनेत्री दीपिका पादुकोण को लगता है कि सिनेमा में गलत धारणाओं को तोडऩे और कहानियों के जरिये लोगों की आंखें खोलने की क्षमता है। जब सामाजिक माध्यम लोगों को एक-दूसरे से अलग कर रहे हैं, वहीं सिनेमा कहानियों के माध्यम से पूर्व धारणाओं को तोड़कर उन्हें एक साथ लाने में मदद कर रहा है। यह कहना है अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का। मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में पहुंची दीपिका ने कहा कि मैं जो काम कर रही हूं, उसके लिए लोग मुझे मुख्यधारा में या किसी युवा की तरह देख सकते हैं, लेकिन मेरा उद्देश्य समाज के लोगों से सीखना और उन्हें कुछ देना है। दीपिका पादुकोण कहती हैं, ‘डिजिटल स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया का युग धीरे-धीरे, लेकिन निश्चित रूप से हमें अलग-थलग कर रहा है। ऐसे समय में सिनेमा ही है, जो हमें बिना किसी डर, सीमाओं और अवरोधों के एक-दूसरे से बांधे रखता है। इसके लिए हमें ऐसे कलाकारों की जरूरत है, जो सिनेमा की ताकत में विश्वास करते हों।दीपिका का मानना है कि सिनेमा मिथकों को तोडऩे का काम करता है। वह कहती हैं, ‘अब हमें पहले से कहीं ज्यादा एक-दूसरे के साथ बात करने की जरूरत है और ऐसा करने के लिए सिनेमा सबसे अच्छा माध्यम है। दीपिका ने मार्टिन स्कॉर्सेस और टॉम हैंक्स के हवाले से कहा कि सिनेमा एक ऐसा माध्यम है, जिसके जरिए आप अकेलेे रहकर भी अकेलापन महसूस नहीं करते।बकौल दीपिका, ‘सिनेमा में पूर्व धारणाओं को तोडऩे और कहानियों के जरिए हमारी आंखों को खोलने की क्षमता है। यह हमें कई चीजों का अनुभव करने की शक्ति देता है।दीपिका को मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की चेयरपर्सन बनाया गया था। इस दौरान उन्होंने कहा, ‘आप में से कई लोग सोच रहे होंगे कि एक चेयरपर्सन की भूमिका किसी बड़े और समझदार के लिए है, तो मैं यहां क्यों हूं? मैं इस फेस्टिवल का हिस्सा इसलिए बनी, क्योंकि मैं यहां से सीख कर उन लोगों को कुछ देना चाहती हूं, जिन्होंने मुझे इतना कुछ दिया है। मुझे मेरी पहचान दी है। और अगर इस दौरान मैं किसी भी तरह की गलती करती हूं, तो बता देना चाहती हूं कि मैं अभी भी सीख रही हूं।दीपिका पादुकोण की अगली फिल्में मेघना गुलजार की ‘छपाक और कबीर खान निर्देशित ’83 हैं। फिल्म ’83 में वह अपने पति और अभिनेता रणवीर सिंह के साथ नजर आएंगी। डिजिटल स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया का युग धीरे-धीरे, लेकिन निश्चित रूप से हमें अलग-थलग कर रहा है। ऐसे में सिनेमा ही है, जो हमें बिना किसी डर, सीमाओं और अवरोधों के एक-दूसरे से बांधे रखता है। इसके लिए हमें ऐसे कलाकारों की जरूरत है, जो सिनेमा की ताकत में विश्वास करते हों।

 

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