फेस्टिवल से आता है सिनेमा देखने का सलीका अदिति राव हैदरी

फिल्म फेस्टिवल के छठे दिन फिल्म अभिनेत्री अदिति राव हैदरी और फिल्म बाहुबली में स्पेशल इफेक्ट देने वाले पीट डेविस ने खास तौर पर अपनी मौजूदगी दर्ज की। वे आयोजन से बड़े खुश और संतुष्ट थे। इस बात पर कि फिल्म फेस्टिवल सिने प्रेमियों को सतत उम्दा सिनेमा देखने का सलीका दे रहा है।उन्होंने कहा, मैंने आठ साल की उम्र से फिल्में देखने शुरू की थी। 12 की हुई तो दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में भांति-भांति के सिने फेस्टिवलों से जुड़ गई। फिर उम्र के उस पड़ाव से ही अकीरा कुरोसावा, फेलिनी की फिल्में देखने का चस्का लग गया। रिश्तों की जटिल बुनावट के ताने-बाने के बारे में समझ आया। न्यूटन जैसी फिल्में बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में सराही गई। अब वह ऑस्कर में गई है। मसान को फेस्टिवल में तारीफें मिलीं और बाकी दुनिया में चर्चित हुईं। इन फिल्मों को दूरदराज के गांवों में पहुंचा रहा है। लोग स्वस्थ सिनेमा देखने के आदी हो रहे हैं। अपने सिस्टम के असल चेहरे से वाकिफ हो रहे हैं। साथ ही जो संसाधनविहीन फिल्मकार हैं, उनके लिए ऐसे मंच फायदेमंद साबित हुए हैं। वरना कमर्शियल फिल्मों का प्रमोशन खर्च ही छोटी फिल्मों की मेकिंग से बहुत ज्यादा होता है।बाहुबली का एक पार्ट बनना थाबाहुबली के पीट डेविस ने आयोजन में घंटे भर से ज्यादा की प्रस्तुति सिनेप्रेमियों के समक्ष दी। उन्होंने फिल्म के दोनों पार्ट के 70 फीसद से ज्यादा के स्पेशल इफेक्ट का काम किया है। उन्हें ज्यादा खुशी इस बात की हुई कि इसके लिए मंच प्राउड प्लेटफॉर्म बना। वे इससे पहले मगाधीरा, मक्खी, गजनी से भी जुड़े रहे हैं।उन्होंने कहा, फिल्म को दो हिस्सों में बनाने की योजना बाद में बनी। पहले एक ही पार्ट में फिल्म बननी थी। ईरान से आर्ट डायरेक्टर आए थे। ऐसी फिल्में बनानी हों तो स्पेशल इफेक्ट्स बड़े काम आते हैं। देवसेना के महल पर जब हमला होता है तो डेढ़ सौ से दो सौ किलोमीटर की रफ्तार से उड़ते बाणों को आम कैमरे से कैप्चर कर दिखाना मुश्किल भरा होता। वहां स्पेशल इफेक्ट का यूज हुआ।

ज्यूरी में कैलाश सुरेंद्र नाथ: मिले सुर मेरा तुम्हारा विज्ञापन कैंपेन बनाने वाले कैलाश सुरेंद्र नाथ फेस्टिवल की ज्यूरी से भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने उसकी मेकिंग साझा की। वह यह कि अच्छे कॉज के चलते तब अमिताभ बच्चन, लता मंगेशकर, मिथुन आदि किसी नामी-गिरामी नाम ने फीस नहीं ली। आज सोशल साइट के मंच ने विज्ञापन फिल्मों को बड़ा मंच दे दिया है। यह विज्ञापन में रुचि रखने वालों के लिए अच्छा दौर है। खासकर जिनमें आजादी, हिम्मत व बड़े सपने देखने वाले संदेश छिपे हों। उन जैसों को मंच प्रदान करने के लिए मुकम्मल अच्छा जरिया है।

 

 

 

 

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