इंडिगो छोडऩे का यही था सही वक्त- आदित्य घोष

नई दिल्ली। पिछले हफ्ते अचानक इंडिगो का प्रेसिडेंट पद छोडऩे वाले आदित्य घोष ने अनिर्बाण चौधरी को बताया कि उनके लिए इस एयरलाइन को छोडऩे का यही सही समय था, जो लंबी रेंज के विमानों के उपयोग, छोटे विमानों के जरिए रीजनल ट्रांसपोर्ट में एंट्री और विदेशी मैनेजरों की भरमार के बीच बड़ी छलांग लगाने को तैयार दिख रही है। पद छोडऩे के बाद अपने पहले मीडिया इंटरव्यू में घोष ने इस कंपनी में हो रहे बदलावों को लेकर असंतोष से जुड़े सवालों को टाल दिया। भविष्य के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी दिलचस्पी कई क्षेत्रों में है और आदित्य घोष 2.0 के लिए वह खुले दिमाग से तैयारी कर रहे हैं।
पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश
इंडिगो विस्तार के अगले चरण की ओर बढ़ती दिख रही है। इंडिगो 2.0 के साथ आदित्य घोष क्यों नहीं हैं?
मैंने अपने सहयोगियों को लिखा था कि इस भूमिका में मैं पिछले 10 वर्षों से था। हालांकि यह मैराथॉन नहीं, बल्कि फर्राटा दौड़ थी। मुझे कुछ ऐसे काम करने में बड़ा मजा आया, जो इस देश ने पहले देखे नहीं थे। हालांकि कुछ वक्त से मैं बेचैनी महसूस कर रहा था। मैंने फाउंडर्स राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल से बात करता था, जिनके साथ मैंने करीब 16 साल काम किया। तो कुछ नया करने और बागडोर सौंपने के लिए खुद को तैयार करने में कुछ वक्त लगा। इंडस्ट्री में अगुवा प्रॉडक्ट और वर्ल्ड क्लास टीम बनाने के बाद मुझे लगा कि कुछ देर ठहरकर अगले कदम के बारे में सोचने के लिए यह सबसे सही वक्त है। तो आपके लहजे में कहूं तो मैं आदित्य घोष 2.0 के लिए तैयारी कर रहा हूं।
जानें, आदित्य घोष ने कैसे बनाया इंडिगो को इतना सफल – लेकिन पिछला साल अलग और मुश्किल भी था। पिछले साल खासतौर से पैसेंजर्स के साथ कुछ घटनाओं और संसद की एक कमेटी की एक रिपोर्ट के चलते काफी नेगेटिव पब्लिसिटी और पीआर का सामना करना पड़ा। क्या आप पिछले साल को इस एयरलाइन में अपना सबसे चुनौतीपूर्ण वर्ष कहेंगे?
नहीं। हर दिन और हर साल अलग चुनौतियां पेश करते हैं। कभी-कभी फ्यूल के दाम आसमान पर चले जाते हैं या इकॉनमी में सुस्ती आ जाती है, एयरपोर्ट चार्जेज बढ़ जाते हैं, ह्यूमन रिसोर्सेज की तंगी हो जाती है या इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी चुनौतियां सामने आती हैं। 2017 अलग तो था, लेकिन किसी भी संगठन के लिए हर साल में कुछ न कुछ होता ही है। एक कस्टमर से जुड़ी घटना के बारे में काफी कुछ कहा जा चुका है। लीडर के रूप में मेरा जॉब है कि ऐसी चुनौतियों से पार पाऊं, उनसे सीखूं और ज्यादा मजबूत होकर सामने आऊं। ऐसा हमने पिछले दशक में हर बार किया है।
क्या आपको सिंगल एयरक्राफ्ट स्ट्रैटेजी से इंडिगो के किनारा करने, रीजनल ऑपरेशंस में उतरने और एयर इंडिया को खरीदने में दिलचस्पी दिखाने जैसे निर्णयों को लेकर कुछ ऐतराज था?
मैं किसी खास कदम के बारे में बात नहीं करूंगा। हालांकि यह बात जान लें कि जब उचित विचार-विमर्श के बाद कोई निर्णय बोर्ड कर लेता है तो यह टीम का फैसला होता है और हम सभी उसके लिए अपना पूरा प्रयास करते हैं।
आने वाले समय में इंडिगो के लिए कौन सी प्रमुख चुनौतियां होंगी??
मेरा इस पर कॉमेंट करना ठीक नहीं होगा। आज इंडिगो भारत में सबसे बड़ी और सबसे प्रॉफिटेबल एयरलाइन है। अनुभवी फाउंडर्स और दमदार टीम के सपोर्ट के साथ इसका शानदार ट्रैक रिकॉर्ड है।

 

 

 

 

 

 

 

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