रिचा के जिंदगी में आने से हैपीनेस बढ़ गई अली फजल

 

मां-बाप से लड़-झगड़कर ऐक्टर बने अली फजल ने आठ साल के लंबे सफर के बाद अब बॉलिवुड के साथ-साथ हॉलिवुड में भी पैर जमा लिया है। इधर, उनकी फिल्म फुकरे रिटंर्स ने बॉक्स-ऑफिस पर धूम मचाई, वहीं उनकी हॉलिवुड फिल्म विक्टोरिया ऐंड अब्दुल भी बेहद कामयाब रही। आने वाले दिनों में अली हैपी फिर भाग जाएगी, मिलन टॉकीज और प्रस्थानम जैसी बड़ी फिल्मों में नजर आएंगे। पेश है उनसे यह खास बातचीत
आजकल होमटाउन लखनऊ आपको काफी बुला रहा है। आने वाली दोनों फिल्मों मिलन टॉकीज और प्रस्थानम की शूटिंग लखनऊ में हुई है। कैसा अनुभव रहा?
हां, मैं इन दिनों लखनऊ-मुंबई के काफी चक्कर लगा रहा हूं। मिलन टॉकीज वहां पर शूट हुई, फिर प्रस्थानम शूट हो रही है। अनुभव अच्छा भी रहा और अजीब भी, क्योंकि मेरे घर में काफी इमरजेंसी हो गई थी। मेरी मां बीमार थीं। मेरी आंटी बीमार थीं। दोनों की सर्जरी हुईं, तो एक बार तो मुझे लगने लगा था कि ऐसा मेरी वजह से हो रहा है। मुझे लखनऊ में शूट नहीं करना चाहिए। लेकिन, मैं खुश हूं कि ऐसे मौके पर मैं वहां था और अब सब ठीक है।

हैपी फिर भाग जाएगी में दोबारा कॉमिडी करना कितना चैलेंजिंग रहा क्योंकि आप आमतौर पर काफी सीरियस इंसान हैं?
घंटा सीरियस हूं यार। यह मेरी इमेज बन गई है और उसका फालूदा बन गया है और कुछ नहीं। लोग समझते हैं कि मैं बहुत सोच-विचार करने वाला, इंटेंस इंसान हूं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। मेरी आने वाली फिल्में मेरे बारे में बने ऐसे सारे परसेप्शन (राय) तोड़ देंगी। हैपी फिर भाग जाएगी में मैंने फुल कॉमिडी की है, जो मैंने लाइफ में कम की है, जबकि मुझे कॉमिडी पसंद है। इसके अलावा, जैसा रोल मैंने मिलन टॉकीज या वेब-सीरीज मिर्जापुर में किया है, वैसा पहले कभी नहीं किया। मैं अभी खुद को एक्सप्लोर कर रहा हूं। मुझे लगता है कि लोगों में अभी मुझे या मेरा काम ज्यादा देखा ही नहीं है। बेशक, फुकरे कमाल की फिल्म है, लेकिन वह मुझे ज्यादा नहीं दिखाती। उसमें मैने एक छोटा सा किरदार किया है, जो कोई भी ठीकठाक ऐक्टर कर सकता है।
आपको इस इंडस्ट्री में करीब आठ साल हो गए। अब तक के करियर को कैसे देखते हैं?
मैं कहूंगा कि यह मेरे लिए कमाल का लर्निंग एक्सपीरियंस रहा है। मैं घर पर बहुत लड़-झगड़कर ऐक्टर बना था। मेरे ऐक्टर बनने को लेकर घर पर काफी बतंगड़ बन गया था। ऐसे में, जब आपमें कॉन्फिडेंस नहीं होता है, आपके पास किसी का सपॉर्ट नहीं होता। इंडस्ट्री में गॉडफादर की बात छोड़ दीजिए, जब आपका अपना परिवार आपके साथ नहीं होता, तो लगता है कि आप अकेले हैं। मैं अपने पैरंट्स का अकेला बच्चा हूं, तो सबका कहना था कि बेटा कोई सिक्योर जॉब ले लो। तुम क्या कर रहे हो, इंजिनियरिंग कर लो, ये कर लो, वो कर लो, तो वह दौर थोड़ा अकेलेपन वाला था। जब थ्री इडियट्स मिली, तब मैं कॉलेज के सेकंड ईयर में था। उसके बाद मैंने मास्टर्स किया, क्योंकि मैं तब भी कंफ्यूज था कि पढ़ाई नहीं छोडऩी है। इस सबमें मेरा काफी टाइम गया।
आपको लगता है कि करियर की शुरुआत में जो दो हीरो, तीन हीरो वाली फिल्में कीं, वह नहीं करनी चाहिए थीं?
देखिए, तब क्या था कि मैंने जोश में आकर डैड को बोल दिया था कि मुझे आपके पैसे नहीं चाहिए। मैं अपना खर्चा खुद उठा लूंगा। मैंने अपने कॉलेज का सब इंतजाम खुद देखा। पोस्ट ग्रैजुएशन का खर्च खुद उठाया, लेकिन उस चक्कर में पहली तीन-चार फिल्में सिर्फ पैसे के लिए कर ली थीं कि चलो, घुस जाओ। लीड रोल है, लेकिन क्या रोल है, कुछ देखा नहीं, कर लिया। बाद में जब ऐक्टर के तौर पर मैंने सोचा, तो अहसास हुआ कि यार, मैं क्या कर रहा हूं। इसीलिए, जब मुझे फुकरे का ऑफर मिला था, तो मैंने मना कर दिया था। मुझे लगा था कि कोई भी ऐक्टर वह रोल कर सकता है, लेकिन वे चाहते थे कि मैं वह रोल करूं। मैं खुश हूं कि मैंने वह फिल्म की। वह मेरी जिंदगी का सबसे अच्छा फैसला रहा। प्रॉडक्शन के लिहाज से, मार्केटिंग के लिहाज से और मुझे ऐसे लोग मिले, जो जिंदगी भर के लिए मेरे साथ हैं। वे अभी भी मेरे दोस्त हैं, तो यह मेरे लिए यह सफर एक-एक स्टेप आगे बढऩे वाला रहा है। अब मैंने अपना एक पैर यहां डाल रखा है और एक हॉलिवुड में। मैं उम्मीद करता हूं कि मैं दोनों के साथ न्याय कर सकूं।
हॉलिवुड में टैलंट की कद्र ज्यादा है? आपने हॉलिवुड और बॉलिवुड में क्या अंतर महसूस किया?
मेरे मामले में तो सीधा प्रमाण है यार कि पहली फिल्म फास्ट ऐंड फ्यूरियस 7 में मैंने एक छोटा रोल किया और दूसरी फिल्म ‘विक्टोरिया ऐंड अब्दुल’ में लीड रोल किया। मुझे वहां मौके तेजी से मिले। यहां क्या होता है कि आपको इंडस्ट्री के अंदर अपना दायरा बढ़ाना होता है। बहुत से दूसरे फैक्टर्स भी होते हैं, तो ठीक है, यहां मैंने अपना समय लिया। अभी बहुत से इंडियन ऐक्टर, जो हॉलिवुड जाते हैं, वहीं के हो जाते हैं। मेरा फंडा वह नहीं है। मुझे दोनों जगह काम करना है और मैं कर रहा हूं। ‘मिलन टॉकीज’ बहुत ही प्यारी लव स्टोरी है। वहीं, ‘प्रस्थानम’ एक हैवी फिल्म है, पर वह भी पिता-पुत्र की ह्यूमन स्टोरी है। संजय दत्त मेरे पिता के रोल में हैं। मनीषा जी मेरी मां का रोल कर रही हैं। इन लोगों के साथ मैंने पहली बार काम किया, जो बहुत ही कमाल का अनुभव रहा। हॉलिवुड और बॉलिवुड में अंतर की बात करूं, तो टेक्नॉलजी के हिसाब से हम उनसे बीस साल पीछे हैं, क्योंकि हमने फिल्में बनाना शुरू ही लेट किया। इसके अलावा, मुझे लगता है कि वहां ज्यादा लोकतांत्रिक माहौल है। हम धीरे-धीरे वहां तक पहुंच रहे हैं।
लेडी लक रिचा चड्ढ़ा का इसमें कितना रोल मानते हैं? उनके जिंदगी मे आने से कितनी हैपीनेस बढ़ी है?
लेडी लक का तो कुछ पता नहीं, लेकिन उनके आने से जिंदगी में हैपीनेस बहुत बढ़ी है। मैं बहुत खुश हूं। हालांकि, हैपीनेस की डीटेल्स मैं अपने तक ही रखना चाहूंगा।

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *