अमेरिका-भारत के रणनीतिक हित जुड़े हुए, संरचनात्मक और गहरे- अधिकारी

वॉशिंगटन (एजेन्सी)। विदेश सचिव विजय गोखले का अमेरिकी दौरा सफलतापूर्वक संपन्न होने पर देश के एक अधिकारी ने कहा कि नयी दिल्ली और वॉशिंगटन के रणनीतिक हित ”व्यापक तौर पर जुड़े हुए, संरचनात्मक और गहरे हैं तथा ये उत्तरोत्तर आगे बढ़ते रहेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकर जॉन बोल्टन के बीच मुलाकात के साथ शुरू हुई गोखले की तीन दिवसीय यात्रा हमारे संबंधों में रणनीतिक परिवर्तन को दर्शाती है। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में पिछले तीन दशकों में हुए सबसे खतरनाक आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बीच गोखले अमेरिकी यात्रा पर आए थे। गौरतलब है कि पाकिस्तान में सक्रिय जैश-ए-मोहम्मद के एक आत्मघाती हमलावर ने 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के एक काफिले पर हमला कर दिया था, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। अमेरिका ने कहा कि वह हमले के बाद भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करता है। भारत ने इस हमले के ठीक 12 दिन बाद पाकिस्तान के बालाकोट में जैश के शिविर पर हवाई हमला किया था और इसके अगले ही दिन पाकिस्तान ने भारतीय वायु क्षेत्र में घुसने का असफल प्रयास किया था।गोखले के साथ बुधवार को बैठक में बोल्टन ने कहा था कि वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ ” कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने के अमेरिका के रुख को दोहराते हैं। अमेरिकी राजनयिक ने कहा, ” दौरे को लेकर मेरा दूरगामी निष्कर्ष यह है कि भारत और अमेरिका के रणनीतिक हित व्यापक तौर पर जुड़े हुए, संरचनात्मक और गहरे हैं। हमारा रिश्ता आगे भी बना रहेगा और इस रिश्ते के लिए यहां और नई दिल्ली दोनों में प्रतिबद्धताएं पार्टी लाइन से ऊपर है। अधिकारी ने कहा कि हिंद-प्रशांत मुद्दे, आतंकवाद का सामना करने की आवश्यकता पर जोर देना और बढ़ते अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों के आवश्यक महत्व पर दोनों देशों का एक ही रुख है। गोखले के दौरे के दौरान भारत और अमेरिका द्विपक्षीय असैन्य परमाणु ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत में छह अमेरिकी परमाणु संयंत्र बनाने पर सहमत हुए हैं। जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादियों की सूची में डालने का प्रयास हालांकि 10 वर्ष में चौथी बार नाकाम रहा। लेकिन मसूद को इस सूची में डालने के अंतिम दिन 13 मार्च से एक दिन पहले गोखले ने वॉशिंगटन में पोम्पिओ से मुलाकात की थी। नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने बैठक पर कहा था कि पोम्पिओ ने भारत की सीमा-पार आतंकवाद को लेकर चिंता को समझने की बात कही है।

 

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