कला शिक्षकों ने कलात्मक और अनूठे अंदाज में किया विरोध प्रदर्शन

जयपुर, 24 दिसम्बर (कासं.)। प्रदेश के बेरोजगार कला शिक्षक अभ्यर्थियों (चित्रकला, संगीत, मूर्तिकला, नृत्यकार) ने अब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इन सैकड़ों कला शिक्षक और अभ्यर्थियों ने आज ज्योति नगर टीपोईट पर धरना देते हुए सरकार के खिलाफ अपना रोष व्यक्त किया। खास बात ये है कि इन कला शिक्षकों ने यह विरोध प्रदर्शन अपनी कलाओं के माध्यम से कलात्मक तरीके से किया। कला शिक्षकों ने संगीत, मूर्तिकला और नृत्यकला के माध्यम से यह विरोध प्रदर्शन किया। अपनी मांगे के विभिन्न पोस्टर, नृत्य और गीत-संगाीत के बीच कला शिक्षकों ने अपना रोष जताया। शिक्षकों ने विरोध-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए अपनी विभिन्न मांगो को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया। कला शिक्षकों की मांग है कि शिक्षा विभाग जयपुर सचिवालय द्वारा मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, मानव संसाधन विकास मंत्रालय विभाग को गलत झूठी रिपोर्ट भेजने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही राजस्थान के कक्षा 1 से 10 तक अनिवार्य कला शिक्षा विषय के फर्जी मूल्यांकन पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही, कला शिक्षकों के द्वितीय, तृतीय श्रेणी के पद सृजित कर भर्ती की जाए। कक्षा 9, 10 की अनिवार्य कला शिक्षा विषय की कला कुन्ज पुस्तकों का राजकीय विद्यालय के बच्चों को वितरण किया जाए। कला शिक्षकों का कहना है कि अगर बेरोजगार कला शिक्षकों की मांगो पर राजस्थान सरकार ने ध्यान नही दिया तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि पिछले 18 वर्षो से बेरोजगार कला शिक्षक अपनी मागों को लेकर शान्तिपूर्ण धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन सरकार ने अभी तक उनकी मांगे नहीं मानी। आज कला शिक्षकों ने कलात्मक तरीके से विरोध प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को ज्ञापन दिया। दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 व 1992 की संशोधन शिक्षा नीति के तहत् माध्यमिक स्तर तक चित्रकला और संगीत विषय कला शिक्षा के रूप में सम्मलित कर अनिवार्य विषय के रूप में भारत के विद्यालयों में अध्ययन करवाया जाता है। लेकिन पिछले 25 वर्षो से कक्षा 1 से 10 तक विद्यालयों में नामांकित विधार्थियों को न कला शिक्षा (चित्रकला, संगीत ) विषय का अध्ययन करवाया गया और न ही कोई परीक्षा होती है। न ही बच्चों के पास पाठ्यपुस्तकें हैं। साथ् ही विद्यालयों में कला शिक्षकों के पद भी पद सृजित नही हैं।
यही नहीं, बिना पढाई, बिना पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकों और बिना परीक्षा फर्जी लिस्ट तैयार करके फर्जी नम्बर, ग्रेड देकर व्यापक स्तर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। सन 1992 से माध्यमिक स्तर पर अनिवार्य कला शिक्षा विषय के अध्ययन करवाने के लिए एक भी विद्यालय में कला शिक्षकों के पद सृजित नही हैं और न ही आज तक कोई भर्ती की गई।

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