बांसवाडा इंजीनियरिंग कॉलेज में जनजातीय छात्रों के लिये खत्म होगी शुल्क की बाध्यता-डॉ. गर्ग

 

राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की 10वीं बैठक

जयपुर, 13 सितम्बर (का.सं.)। तकनीकी एवं संस्कृृत शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, सूचना एवं जनसम्पर्क राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने कहा है कि जनजातीय क्षेत्र के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज बांसवाडा में जनजातीय छात्रों को प्रवेश के समय शुल्क की बाध्यता नहीं होगी। जनजाति विभाग द्वारा प्रवेश के पश्चात शुल्क पुनर्भरण कराया जायेगा। उन्होंने बांसवाडा राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में जनजातीय छात्र-छात्राओं के लिये टैक्नो-फेस्ट एवं अन्य कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिये ताकि उनमें तकनीकी शिक्षा को लेकर रूझान बढ़े और उनका क्षमता संवद्र्धन हो सके। डॉ. गर्ग शुक्रवार को तकनीकी शिक्षा भवन में 11 राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की 10वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने निर्देश दिये कि इन सभी कॉलेजों में छात्र-छात्राओं के दाखिलों के आधार पर कार्यभार की समीक्षा की जाये। उन्होंने कहा कि जिन राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीसीटीवी सर्विलांस की व्यवस्था अब तक नहीं हो पाई है, वहां इसे तत्काल शुरू किया जाये और इस सर्विलांस सिस्टम को संयुक्त शासन सचिव तकनीकी शिक्षा के मोबाईल से जोडा जाये।तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि इन कॉलेजों में डिग्री कोर्सेज के साथ-साथ वैल्यू एडेड कोर्स और लेंग्वेज लैब भी शुरू किये जाये ताकि छात्र अकादमिक रूप से सक्षम होने के साथ-साथ एड-ऑन स्किल्स से भी लैस हो सकें। उन्होंने कहा कि सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों में कम से कम 7 घंटे पढाई होनी चाहिये और शिक्षण समय एक समान होना चाहिये। उन्होंने सभी राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों के अभिनव कार्यक्रम एवं उल्लेखनीय उपलब्धियों की जानकारी देने के लिये कॉमन वेब पोर्टल स्थापित करने के भी निर्देश दिये। डॉ. गर्ग ने कहा कि राजकीय क्षेत्र का कम से कम एक इंजीनियरिंग कॉलेज अकादमिक रूप से स्वायत्त हो सके इसके लिये प्रयास किये जायें। उन्होंने इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों के लिये एमआरआई, सीटी स्केन एवं मेडिकल क्षेत्र से जुडी मशीनों का अध्ययन करवाने के लिये भी कहा।राज्य मंत्री डॉ. गर्ग ने कहा कि सभी इंजीनियरिंग कॉलेज टेक्विप फण्ड का उपयोग करते हुए कम से कम एक या दो अंतर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर के सेमीनार और कॉनफ्रेंस करवाना सुनिश्चित करें। उन्होंने भरतपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र आलोक मीणा द्वारा तैयार किये गये माय लॉण्ड्री एप की सराहना करते हुए इसके लिये बीओजी के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करनेे के निर्देश दिये। बीओजी बैठक में शासन सचिव उच्च एवं तकनीकी शिक्षा वैभव गालरिया एवं इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज बैंगलुरू के प्रोफेसर डॉ. एन.सी. शिव प्रकाश सहित बीओजी के पदाधिकारी एवं सदस्यगण तथा तकनीकी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

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