महंगाई पर सरकार की कड़ी निगाह, राज्यों को हिदायत

नई दिल्ली। महंगाई के सिर उठाने से पहले ही सरकार उसे नियंत्रण में लाने की तैयारी में जुट गई है। इसके लिए कारगर तंत्र गठित किया जा रहा है। मूल्य में उतार-चढ़ाव पर कड़ी नजर रखने के लिए देशभर में तंत्र होगा जो हर समय निगरानी रखेगा। इसके आधार पर जिंसों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। उपभोक्ता मंत्रालय ने इसके लिए मूल्य संबंधी आंकड़े जुटाने वाले केंद्रों की संख्या को बढ़ाकर कई गुना कर दिया है।उपभोक्ता व खाद्य मंत्रियों के सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने सभी राज्यों से महंगाई पर काबू पाने के लिए हाथ मिलाने की अपील की। मूल्यों में उतार-चढ़ाव की दैनिक जानकारी वास्तविक तौर पर दी जाए जिससे सरकार समय पर उचित कदम उठा सके। बाजार में रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं के मूल्य पर निगरानी करने वाले ढांचे को मजबूत करना आवश्यक है। इसी के मद्देनजर राज्यों की मदद से 102 केंद्रों से खुदरा मूल्यों के आंकड़े जुटाए जाते हैं। इसमें भी कम आय वर्ग, मध्य आय और उच्च आय समूहों के तीन विभिन्न बाजारों से खुदरा मूल्य के साथ थोक मूल्य के आंकड़ों का दैनिक संग्रह किया जाता है। उपभोक्ता मामले मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी केंद्र कीमतों की नियमित रिपोर्टिंग नहीं करते हैं। इस मुद्दे पर राज्यों के मंत्रियों के साथ गंभीर चर्चा हुई। रिपोर्टिंग तंत्र को मजबूत बनाने का फैसला किया गया। इन केंद्रों की सूचना के आधार पर ही केंद्र व राज्य सरकारें तत्काल कदम उठाकर महंगाई पर काबू पाने की कोशिश करती हैं।जमाखोरी व चोरबाजारी के विरुद्ध कार्रवाई के लिए राज्यों को दिशानिर्देश भी दिए जाते हैं।वर्ष 1998 में इसकी शुरुआत हुई तो 14 वस्तुओं के मूल्यों का दैनिक संग्रह केवल 18 केंद्रों से एकत्रित किया जाता था। अब 22 आवश्यक वस्तुओं के मूल्य 102 केंद्रों से एकत्रित किए जाते हैं। इन वस्तुओं में चावल, गेहूं, आटा, चना दाल, अरहर दाल, मूंग दाल, उड़द दाल, मसूर दाल, चाय, चीनी, नमक, वनस्पति, मूंगफली का तेल, सरसों का तेल, सोया तेल, पाम तेल, सूरजमुखी तेल, गुड़, आलू, प्याज और टमाटर के दैनिक खुदरा व थोक मूल्यों की निगरानी की जाती है।

 

 

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