दूध के फायदे और इससे जुड़े मिथक की सच्चाई

 

कैल्शियम, प्रोटीन, आयोडीन, पोटैशियम, फॉसफॉरस, विटमिन बी12 जैसे कई पोषक तत्वों से भरपूर दूध सेहत के लिए फायदेमंद है इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन दूध से जुड़े कई मिथक भी हैं, जिन्हें खत्म किया जाना चाहिए। साथ ही, हमें यह भी पता होना चाहिए कि किस उम्र में कितना दूध पीना हमारे लिए जरूरी है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक दूध एक कंप्लीट फूड है। नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक आमतौर पर अडल्ट रोजाना 1000 से 1200 एमजी कैल्शियम लेते हैं। एक गिलास दूध में 285 एमजी कैल्शियम होता है। शरीर इस कैल्शियम का इस्तेमाल हड्डियों और दांतों को मजबूत करने के लिए करता है। रेग्युलर रूप से भरपूर मात्रा में दूध पीने से उम्र बढऩे के साथ हड्डियों को होने वाले नुकसान से काफी हद तक बचा जा सकता है। दूध में मौजूद फॉस्फॉरस कैल्शियम को सोखने और हड्डियों को बचाए रखने में मदद करता है।
1 से 2 साल के बच्चे-इन बच्चों को ब्रेन के बेहतर विकास के लिए ज्यादा फैट वाली डाइट की जरूरत होती है, इसलिए फुल क्रीम मिल्क देना चाहिए। इनके लिए दिन में 3-4 कप दूध (करीब 800-900 मिली) जरूरी है।
2 से 8 साल-2 से 3 साल के बच्चों को रोजाना दो कप दूध या दूध से बनी चीजें देनी चाहिए। 4-8 साल के बच्चों को ढाई कप दूध/दूध से बनी चीजें जैसे कि पनीर, दही आदि रोजाना देना जरूरी है।
9 साल से ज्यादा-9 साल से बड़े बच्चों को रोजाना करीब तीन कप दूध/दूध से बनी चीजें देनी चाहिए। ऐक्टिव टीन एजर्स को रोजाना करीब 3000 कैलरी की जरूरत होती है। इन्हें 4 कप तक दूध/दूध से बनी चीजें दे सकते हैं। हड्डियों की मजबूती के लिए दूध जरूरी है इसलिए बच्चों ही नहीं, बड़ों को भी दूध जरूर पीना चाहिए।
अडल्ट्स-अडल्ट्स को फुल क्रीम की बजाय टोंड या स्किम्ड मिल्क पीना चाहिए क्योंकि इससे फालतू कैलरी खाने से बच जाते हैं। मानसी चौधरी, सीनियर डाइटीशियन, फोर्टिस हॉस्पिटल का कहना है कि जरूरत से ज्यादा दूध पीने से शरीर में आयरन की कमी हो सकती है। कैल्शियम आयरन सोखने के प्रॉसेस में रुकावट डालता है। बच्चे अगर दूध ज्यादा पीते हैं तो उनका वजन कम रह जाता है क्योंकि दूध से पेट भरने के बाद वे पूरा खाना नहीं खाते। प्रोटीन रिच होने के कारण भूख भी कम लगती है।दूध ही कैल्शियम का इकलौता और बेस्ट सोर्स नहीं है। असलियत यह है कि गाय के दूध में मौजूद कैल्शियम को हमारा शरीर बमुश्किल ही सोख पाता है। हरी सब्जियां जैसे कि पालक, ब्रोकली, साग, सोयाबीन आदि में काफी अच्छी मात्रा में कैल्शियम होता है। गाय और भैंस के दूध के मुकाबले पैकेट वाला दूध बेहतर है क्योंकि गाय/भैंस के दूध में मिलावट की गुंजाइश होती है। हां, अगर अपने सामने दूध निकलवा कर लेते हैं तो गाय/भैंस का दूध लेने में कोई खराबी नहीं है। भैंस के दूध में गाय के दूध के मुकाबले ज्यादा फैट होता है। गाय के 100 मिली दूध में करीब 65-70 कैलरी होती हैं और मां के दूध में भी करीब इतनी ही कैलरी होती हैं। लेकिन भैंस के 100 मिली दूध में 117 कैलरी होती हैं। गाय के दूध में फैट भी कम होता है लेकिन कलेस्ट्रॉल भैंस के दूध से ज्यादा होता है। जिन्हें मोटापे की समस्या है, उन्हें भैंस के दूध से परहेज करना चाहिए और कलेस्ट्रॉल के मरीजों को गाय के दूध से।टेट्रा पैक दूध की क्वॉलिटी बाकी दूध से बेहतर नहीं होती। बस, पैकिंग का फर्क है। यह सच है कि इस पैकिंग में दूध लंबे वक्त तक खराब नहीं होता, लेकिन यह गलत है कि ट्रेटा पैक दूध दूसरे दूध से बेहतर है।

 

 

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