27 किलो वजन दोबारा नहीं बढ़ाऊंगी भूमि पेडणेकर

 

दम लगा के हईशा और टॉइलट : एक प्रेम कथा जैसी लीक से अलग फिल्में चुनकर ऐक्ट्रेस भूमि पेडणेकर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग जगह बनाती जा रही हैं। उनकी नई फिल्म शुभ मंगल सावधान भी इसी सीरीज़ की नई कड़ी है। अपनी अदाकारी के अलावा भूमि फैट टु फिट लुक के अपने शानदार सफर के लिए भी खूब सराही जाती हैं। आप शुरू से ही अलग तरह के विषयों वाली फिल्मों का हिस्सा रही हैं।ये फिल्में खुद आपके हिस्से आ गिरती हैं या आप सिलेक्ट ही ऐसी फिल्में करतीं हैं?

दरअसल मैं काफी लकी हूं कि दम लगा के हईशा मुझे मिली। वह अपनी तरह की इकलौती फिल्म थी, जो कमर्शली भी बहुत चली। उससे क्या हुआ कि फिल्ममेकर्स ने देखा कि मैं ऐसे किरदार निभा सकती हूं, इसलिए मुझे ऐसी फिल्मों के ऑफर मिलने लगे। फिर मुझे भी एक खास तरह की फिल्में पसंद हैं। अलग तरह की फिल्में देखते हुए मैं बड़ी हुई हूं, तो इस तरह के सिनेमा की तरफ मेरा रुझान भी है।हमारे समाज में औरत अगर बांझ हो तो उसे बेचारी बना दिया जाता है, जबकि पुरुषों की नपुंसकता का मजाक उड़ाया जाता है।

आपकी फिल्म में इस विषय के लिए कॉमिडी जॉनर ही चुना गया। इसकी क्या वजह है?
यह बहुत गलत बात है कि हमारे देश में कि लड़कों को ऐसी प्रॉब्लम होती है, तो उसका मजाक उड़ाया जाता है, मगर हमारी फिल्म की खूबसूरती यह है कि किसी भी पॉइंट पर हम इस प्रॉब्लम का मजाक नहीं उड़ा रहे हैं। कहीं भी यह नहीं बोला जा रहा है कि तुम नपुंसक हो या ऐसा कुछ। हमने बहुत सेंसेटिव तरीके से ये मुद्दा उठाया है। अगर इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के अलावा किसी को कोई और बीमारी हो जाए, तो हम उसका मजाक तो नहीं उड़ाएंगे न! हमने उसी संवेदनशीलता के साथ ये मुद्दा उठाया है।
शुभ मंगल सावधान की कहानी सुनकर आपका पहला रिऐक्शन क्या था? कुछ हिचक हुई?
जब मैंने यङ कहानी सुनी, तो मैं हंस-हंसकर लोटपोट हो गई। मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यह फिल्म इस विषय पर होगी। मुझे लगा कि कोई रॉमकॉम होगी, जिसमें कुछ ट्विस्ट होगा। मगर जब मुझे पता चला, तो मैं हैरान हो गई और मैंने तुरंत हां कर दी, क्योंकि ये पाथ ब्रेकिंग फिल्म साबित होने वाली है। यह इंडिया की पहली फैमिली सेक्स कॉमिडी है, मतलब हम ऐसे विषय पर बात कर रहे हैं, जो हमारी सोसायटी में एक बहुत बड़ा टैबू है, लेकिन ये इतनी साफ-सुथरी फिल्म है कि आप अपने पूरे खानदान के साथ यह फिल्म देख सकते हैं।
आपकी और आयुष्मान की जोड़ी भी फिल्ममेकर्स की फेवरिट बनती जा रही है। आपको क्या वजह लगती है?
मुझे लगता है कि आयुष्मान और मैं जिस तरह की फिल्में करते हैं, उसमें बॉय नेक्स्ट डोर और गर्ल नेक्स्ट डोर वाली खूबी नजर आती है। हम दोनों में एक सादगी है, जो उन किरदारों में ढलने के काम आती है। इसके अलावा मुझे लगता है कि चूंकि हम एक फिल्म साथ में कर चुके हैं, तो हम दोनों में बहुत कम्फर्ट भी है और वह स्क्रीन पर भी दिखता है।
आगे किस तरह की फिल्में करने का इरादा है आपका?
एक अभिनेत्री होने के नाते मैं तो यही चाहती हूं कि मैं हर तरह के रोल कर पाऊं। मैं तो बारिश के नीचे पीली साड़ी पहनकर नाचना भी चाहती हूं। स्विट्जरलैंड की बर्फ में फिसलना भी चाहती हूं। मैं हर चीज करना चाहती हूं, क्योंकि बचपन में जब मैंने ऐक्ट्रेस बनने का सपना देखा था, तो मेरा सपना था कि मैं ये सब करूं। अभी शुरू हुआ है मेरा करियर, तो मैं हर चीज करना चाहती हूं।
पहली फिल्म से अब तक आपका वजन भी हमेशा चर्चा का विषय रहा है। आप इसे कैसे देखती हैं?
हां, लड़कियों के वजन को लेकर बहुत चर्चा होती है। भले ही वह मैं हूं या कोई और लड़की। हालांकि मुझे काफी तारीफें भी मिली लोगों से, जो बहुत मोटिवेटिंग थीं। ऑडियंस ने दोनों रूपों में मुझे स्वीकार किया। मेरे मामले में मुझे ये भी लगता है कि पहले लोगों के पास कुछ था नहीं बात करने के लिए, क्योंकि मैं एक ही फिल्म की थी और दूसरी काफी टाइम बाद आई। मुझे कोई दिक्कत नहीं है उससे, लेकिन अब वो बातें बंद हो जानी चाहिए।
आगे किसी किरदार के लिए दोबारा वजन बढ़ाना पड़ा तो?
27 किलो वजन तो बिल्कुल नहीं बढ़ाऊंगी (बीच में ही)। वह बहुत ज्यादा था और तीन साल लगे मेरी जिंदगी के उसे बढ़ाने-घटाने में। क्या है कि लड़कियों की बॉडी अलग तरह की होती है और लड़कों की अलग होती है। उनके लिए आसान होता होगा ऐसा बार-बार कर पाना, मगर मुझे ऐसा करने में प्रॉब्लम हुई थी। एक ऐक्टर के तौर पर मुझे यह लगता है कि हर किरदार का जैसे खाने का, कपड़े पहनने का, बोलने का तरीका होता है, उसी तरह हर किरदार का एक बॉडी टाइप भी होता है, उतना बदलाव मैं फिल्म के हिसाब से करने को तैयार हूं।

 

 

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