प्रदेश मेें हुआ बायोफ्यूल क्रान्ति का सूत्रपात: पायलट

जयपुर। उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा बायोफ्यूल के उपयोग को बढ़ावा देने की नई सोच के साथ, विश्व की बेहतरीन प्रेक्टिसेज से प्रेरित होकर राज्य बायोफ्यूल नियम-2019 जारी किए जाने के साथ ही प्रदेश मेें नई बायोफ्यूल क्रान्ति का सूत्रपात हो गया है।पायलट शुक्रवार को यहां शास्त्रीनगर स्थित साइंस पार्क के सभागार में विश्व जैव ईंधन दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में ”राज्य बायोफ्यूल नियम-2019 जारी करने के अवसर पर बायोफ्यूल के उत्पाद, विपणन व संवद्र्धन से जुड़े उद्यमियों और सम्बन्धित विभागों के अधिकारियोंं को सम्बोधित कर रहे थे। पायलट ने कहा कि समाज और देश की उन्नति एवं जनकल्याण के लिए जरूरी कदम उठाए जाने में देर नहीं की जानी चाहिए, इसी सोच के साथ 30 अप्रेल को भारत सरकार के नोटिफिकेशन के बाद तत्परता बरतते हुए देश में राजस्थान यह पॉलिसी लाने वाला पहला राज्य बना है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में 82 प्रतिशत जीवाश्म ईंधन बाहर से आता है। यह देश की अर्थव्यवस्था और करदाताओं पर बड़ा भार है। हम बायोफ्यूल का उपयोग कर जीवाश्म ईंधन का जितना कम उपयोग करेंगे, उतनी ही पर्यावरण की रक्षा होगी व विदेशी मुद्रा बचेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा व्यवहार में बदलाव लाकर ही ईंधन के उपभोग की आदतों में बदलाव संभव है। अभी प्रदेश में 1250 करोड़ लीटर जीवाश्म ईंधन काम लिया जा रहा है इसका मात्र 5 प्रतिशत ही जैव ईंधन काम लेना हो तो प्रदेश में 62 करोड़ लीटर जैव ईंधन का उत्पादन करना होगा। यह प्रदेशवासियों के हित में बहुत बढ़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि हमें अब नौजवानों को नए प्रयोग कर एक मंच देना होगा। यह पॉलिसी भी ऐसा ही मंच प्रदान करती है, जिससे हजारों लोगों को रोजगार का मौका मिलेगा। नए आउटलेट खुल सकेंगे। इनका पंजीकरण होगा, इनका सर्टिफिकेशन भी होगा लेकिन इसमें ज्यादा से ज्यादा कमजोर वर्ग के लोगों, महिलाओं, सैनिकों की विधवाओं और दिव्यांगों को प्राथमिकता से मौका मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अभी डीजल में 20 प्रतिशत बायोफ्यूल मिलाया जा सकता है। राजस्थान सर्वाधिक क्षेत्रफल वाला राज्य है जहां जैव ईधन का उत्पादन बड़ी मात्रा मे संभव है। इसका उत्पादन, व्यवसाय एवं उपभोग सभी फायदेमंद है। इस पॉलिसी का सोशल मीडिया, समाचार पत्रों, विद्यार्थियों को प्रेरित कर ज्यादा से ज्यादा प्रचार किया जाना चाहिए। परिवहन मंत्री श्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि राजस्थान बायोफ्यूल प्राधिकरण ने प्रदेश में 3 करोड़ पौधे लगाए हैं जिनसे 1 लाख लीटर बायोडीजल मिलने लगा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम बड़ी मात्रा में बसों में डीजल का उपभोग करता है। रोडवेज में अधिकतम बायोडीजल के उपयोग के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सही समय पर उठाया सही कदम ही काम आता है बायोडीजल नीति 2019 भी एक ऐसा ही कदम है जिससे प्रदेश में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। अतिरिक्त मुख्य सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज श्री राजेश्वर सिंह ने कहा कि राज्य बायोडीजल पॉलिसी 2019 के जारी होने से प्रदेश में बायोडीजल का उत्पादन, विपणन व व्यापार विधिवत रूप से संभव हो सकेगा। बायोडीजल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष श्री संदीप चतुर्वेदी ने कहा कि भारत दुनिया में एक तेजी से बढती अर्थव्यवस्था है लेकिन जीवाश्मीय ईंधन पर निर्भरता के कारण दूसरे देशों पर अत्यधिक निर्भरता बनी हुई है। इस अवसर पर पायलट एवं खाचरियावास ने साइंस पार्क परिसर में करंज के पौधे रोपे व बायोडीजल के प्रति जनचेतना बढ़ाने के लिए स्कूली विद्यार्थियों व बायोफ्यूल से संचालित 30 वाहनों की रैली को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर शासन सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मुग्धा सिन्हा, निदेशक, विज्ञान एवं प्रौधोगिकी, बायोफ्यूल प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरेन्द्र सिंह राठौड़, राजीविका की राज्य परियोजना प्रबंधक शमिला मल्होत्रा सहित ग्रामीण विकास विभाग, राजीविका, बायोफयूल प्राधिकरण के अधिकारी व स्वंयसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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