श्रीकरणपुर मेें भाजपा का नया चेहरा-जितेन्द्र सिंह बुट्टर

सम्भावित उम्मीदवारों में हैं सशक्त दावेदार

श्रीगंगानगर, 2 नवम्बर (का.सं.)। श्रीगंगानगर जिले में सीमावर्ती श्रीकरणपुर एक ऐसा विधानसभा क्षेत्र है, जहां भाजपा की टिकट के दावेदारों की सबसे ज्यादा लम्बी सूची है। प्रदेश के खनन मंत्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी इसी क्षेत्र से विधायक हैं। सत्ताविरोधी लहर को थामते हुए दोबारा से प्रदेश की सत्ता में आने के लिए भाजपा की राज्य व केन्द्रीय हाईकमान द्वारा जो रणनीति बनाई जा रही है, उसमें कई विधायकों ही नहीं, बल्कि मंत्रियों की भी टिकटें कटती हुई दिख रही हैं। इस मरतबा श्रीकरणपुर क्षेत्र में टीटी का काफी विरोध है। दूसरा सत्ता विरोधी लहर भी है। इस कारण टीटी की हालत काफी कमजोर है। उन्होंने टिकट के लिए अपने पुत्र समनदीप का नाम आगे किया है, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह परिवारवाद के खासे खिलाफ हैं। लिहाजा पिता-पुत्र की पार नहीं पड़ पा रही। इसके अलावा श्रीकरणपुर में इस बार हंसराज पूनिया, राजन तनेजा, महेन्द्र रस्सेवट, काका हरेन्द्र सिंह, उनके पुत्र एवं पूर्व प्रधान तेजदीप सिंह, भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष सर्दूल सिंह कंग, पूर्व जिलाध्यक्ष महेन्द्र सिंह सोढ़ी तथा इकबाल सिंह कंग आदि कई और नेता टिकट पर दावा किये हुए हैं। इतने दावेदार श्रीगंगानगर जिले में किसी ओर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के नहीं है। बावजूद इसके भाजपा को यहां इस बार जिताऊ और टिकाऊ उम्मीदवार इनमें से कोई भी नहीं दिख रहा। टिकटों के लिए भाजपा द्वारा करवाये गये सर्वाे में इस सीट को सी कैटागिरी में रखा हुआ है। यानि कि हारने वाली श्रेणी में।लिहाजा केन्द्रीय व प्रदेश हाईकमान की रणनीति है कि यहां पर किसी नये चेहरे को उतारा जाये। विगत बुधवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने केन्द्रीय चुनाव समिति (संसदीय बोर्ड) की बैठक से पहले राजस्थान प्रदेश इकाई की ओर से 80 एकल नाम वाले पैनल पर अनौपचारिक चर्चा की थी, तब इसकी शुरूआत श्रीगंगानगर जिले से ही की। इसमेें प्रदेश हाईकमान द्वारा रखी गई सूची को उन्होंने केन्द्रीय हाईकमान द्वारा करवाये गये सर्वे से मिलान नहीं होने के कारण खारिज कर दिया। उन्होंने दोबारा सर्वे करने और तीन-तीन नाम के पैनल बनाने के निर्देश दे दिये। लिहाजा अब हो रहे सर्वे में नये नामों पर विचार हो रहा है। सूूत्रों के अनुसार श्रीकरणपुर सीट पर एक नया चेहरा काफी समय से बड़ी मजबूती से अंदर ही अंदर दावा ठोके हुए है। इस दावेदार का नाम शुक्रवार को एकाएक सामने आया। हासिल जानकारी के अनुसार स्थानीय खालसा कॉलेज में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे जितेन्द्र सिंह बुट्टर (लाला) की दावेदारी पर प्रदेश और केन्द्रीय हाईकमान गम्भीरता से विचार कर रही है। जितेन्द्र सिंह बुट्टर के बारे में आम लोग नहीं जानते, लेकिन भाजपा और इससे वैचारिक रूप से सम्बद्ध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी तक श्री बुट्टर से अ’छी तरह से वाकिफ हैं। इसी कारण उनकी दावेदारी को काफी मजबूत माना जा रहा है।
संघ और भाजपा से पुराना नाता
पदमपुर तहसील क्षेत्र के गांव बुट्टरसर के निवासी जितेन्द्र सिंह का भाजपा के वजूद में आने से भी तीन वर्ष पहले आरएसएस से नाता है। उन्होंने 8 अगस्त 1977 में नई दिगी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता ग्रहण की थी। फिर वर्ष 1980 में जब भाजपा का गठन हुआ, तब नई दिगी में ही विजय मल्होत्रा की मौजूदगी में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की। मतलब कि जितेन्द्र सिंह बुट्टर भाजपा से उसकी स्थापना के समय से जुड़े हुए हैं। वर्ष 2006 में भाजपा के वरिष्ठ नेता स्व. श्याम चुघ की अगुवाई में उन्होंने भाजपा की सक्रिय सदस्यता ग्रहण की। वर्ष 1975 से 1987 तक जितेन्द्र सिंह बुट्टर हिमाचल प्रदेश में शिमला विश्वविद्यालय में एबीवीपी कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया। उस दौरान वे इसी विश्वविद्यालय में मौजूदा केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी मिड्ढा के सान्निध्य में एबीवीपी के लिए काम कर रहे थे। जितेन्द्र सिंह बुट्टर फिलवक्त आरएसएस में सक्रिय हैं। पिछले छह वर्षांे से वे सायंकालीन प्रोढ़ शाखा में मुख्य शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। राष्ट्रीय सिख संगत के वे जिला संयोजक हैंं। उनका ननिहाल पक्ष भी संघ समर्पण वाला रहा है। 1948 में जब दिगी में महात्मा गांधी की हत्या हुई, तब जितेन्द्र सिंह बुट्टर के नाना रणजीत सिंह व मामा मेहर सिंह को राजगढ़ (चूरू) में गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें नोहर की जेल में रखा गया था।

 

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