मुझे हीरो-हिरोइन के बाप का रोल नहीं करना है ऋषि कपूर

बॉलिवुड के दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर इन दिनों अपनी रिलीज़ फिल्म ‘102 नॉट आउट’ की सफलता का जश्न मना रहे हैं। इसी दौरान हमसे बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें किसी भी फिल्म में हीरो-हिरोइन के बाप का रोल नहीं करना है। वह अच्छे किरदार करना चाहते हैं, भले वह किरदार छोटे ही क्यों न हों। इस बातचीत के दौरान ऋषि कपूर ने फिल्मों के कॉन्टेंट और आज के समय में होने वाले फिल्म प्रमोशन के तरीकों पर सवाल उठाया है। ऋषि कपूर का मानना है कि आपकी फिल्म अगर अच्छी है तो शहर-शहर घूम कर दर्शकों से फिल्म देखने की अपील बेकार है। वह कहते हैं कि अच्छी फिल्म बनाइए प्रमोशन अपने आप हो जाएगा। ऋषि कपूर कहते हैं, ‘मुझे फिल्मों में हीरो-हिरोइन के बाप के रोल नहीं करने हैं। मुझे कैरक्टर रोल करना है, अब वह किरदार छोटा हो या बड़ा हो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। मैं अलग-अलग किरदार करते समय इस बात का बहुत ध्यान रखता हूं कि हर फिल्म में मेरे किरदार का लुक एकदम अलग होना चाहिए। अब इसके लिए मुझे भले वाहवाही न मिले, लेकिन निजी तौर पर किसी फिल्म में अपने लुक पर मैं बहुत ज्यादा काम करता हूं। शायद यही वजह है कि दर्शक मुझे पसंद भी कर रहे हैं।
यह सिनेमा का बहुत ही खूबसूरत दौर है – 65 साल की उम्र पार कर चुके ऋषि कपूर आज के वक्त को फिल्म इंडस्ट्री का सबसे अच्छा समय मानते हैं। वह कहते हैं, ‘यह सिनेमा का बहुत ही खूबसूरत दौर है, जब हम जैसे कलाकारों को अच्छा काम मिल रहा है। पहले ऐसा नहीं होता था, उस समय ज्यादातर हीरो 45 पार करने के बाद रिटायर हो जाते थे।
आज दर्शक भी समझदार हो गया है – नए जमाने के साथ बदले फिल्मों के कॉन्टेंट पर ऋषि कपूर ने कहा, ‘समय के साथ फिल्मों का कॉन्टेंट भी बहुत अच्छा हो गया है। मैंने एक हीरो के तौर पर ज्यादातर ऐसी फिल्मों में काम किया है, जिसमें भाई-बहन, महबूबा और परिवार से मिलने बिछडऩे की कहानी होती थी या फिर अमीर-गरीब वाला ऐंगल होता था। उस समय दर्शकों के पास मनोरंजन का कोई दूसरा साधन नहीं था इसलिए दर्शक भी बार-बार उन्हीं एक जैसी कहानियों को देखती भी थी। आज इंटरनेट का जमाना है। देश-दुनिया की तमाम फिल्मों को देखा जा सकता है। दर्शक समझदार हो गया है।
आज जिस कलाकार के अभिनय में दम नहीं है वह आउट हो जाएगा – ऋषि आगे कहते हैं, ‘अब एक दर्शक जो 400-500 रुपए की टिकट खरीदता है तो वह अच्छी कहानी, अच्छी ऐक्टिंग और तकनीकी रूप से भी अच्छा सिनेमा देखना चाहता है। दर्शकों की इसी चाहत की वजह से फिल्म इंडस्ट्री में कॉन्टेंट वाली फिल्में भी बन रही हैं। आज के समय में जो बेहतरीन ऐक्टर है वही चलेगा, जिस कलाकार के अभिनय में दम नहीं है वह आउट हो जाएगा।
शर्ट निकलकर बदन दिखाने को मैं ऐक्टिंग नहीं मानता। – शर्ट उतारकर बदन दिखाने और ऐक्टिंग सीखने से ज्यादा जिम जाने वाले आज के ऐक्टर्स को फटकारते हुए ऋषि कहते हैं, ‘आजकल के बच्चे ऐक्टिंग स्कूल में अभिनय सीखने से पहले जिम जाते हैं, घुड़सवारी सीखते हैं। मुझे समझ नहीं आता कि अभिनय के काम में जिम का क्या उपयोग है। मेरा कहना है अपने शरीर के मसल्स बनाने से पहले चेहरे के मसल्स बनाओ। पहले ऐक्टर तो बनो। आज के ऐक्टर्स को सबसे पहले किसी भी सीन में शर्ट निकलने की जल्दी रहती है। शर्ट निकलकर बदन दिखाने को मैं ऐक्टिंग नहीं मानता। आप ही बताइए, क्या अमिताभ बच्चन जैसे इतने बड़े सुपरस्टार ने कभी भी किसी फिल्म में अपनी शर्ट उतारी है? कोई एक ऐक्टर ऐसा करता है और बाद में यह ट्रेंड बन जाता है।
फिल्म का कॉन्टेंट फिल्म को सफल बनाता है, धुआंधार प्रमोशन नहीं – रिलीज़ से पहले फिल्मों के धुआंधार प्रमोशन पर पैसे और वक्त की बर्बादी बताते हुए ऋषि कपूर कहते हैं, ‘आजकल फिल्मों के प्रमोशन के समय ही देख लीजिए, इन दिनों हर ऐक्टर शहर-शहर घूमता है और लोगों से अपनी फिल्म देखने की अपील करता है। ऐसा फिल्म प्रमोशन हमारे जमाने में नहीं होता था। मैं किसी ऐक्टर का नाम नहीं लूंगा, लेकिन यह प्रमोशन का तरीका भी किसी एक ऐक्टर के कारण ही ट्रेंड में आया है। एक फिल्म के लिए जब शहर-शहर घूमना होता है तो फिल्म का बजट बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे प्रमोशन करने वाले ऐक्टर्स को मैं कहूंगा कि क्या आप दर्शकों को मूर्ख समझते हैं, जो आपके बार-बार कहने से आपकी फिल्म देखने जाएंगे। आपकी फिल्म अच्छी होगी तो जरूर चलेगी। आपकी फिल्म का कॉन्टेंट फिल्म को सफल बनाता है, धुआंधार तरीके से किया गया प्रमोशन नहीं।
बॉम्बे वेलवेट का क्या हुआ था? पहला शो देखने भी नहीं आए थे लोग – बेटे रणबीर कपूर की फ्लॉप फिल्मों का उदाहरण देते हुए ऋषि कपूर ने कहा, ‘मैं आपको एक घटना बताता हूं, जिस दिन शशि कपूर साहब को दादा साहब फाल्के अवॉर्ड मिल रहा था… उस दिन अमिताभ बच्चन भी पृथ्वी थिअटर आए थे। उन्होंने मुझसे पूछा रणबीर कहां हैं। मैंने बताया अपनी किसी फिल्म के प्रमोशन में जुटा है। थोड़ी देर बाद जब रणबीर आया तो बच्चन साहब से बातचीत में उसने बताया कि वह आजकल अपनी रिलीज़ के लिए तैयार फिल्म बॉम्बे वेलवेट के प्रमोशन में जुटा है। रणबीर को बच्चन साहब ने भी बताया कि उनकी भी एक फिल्म पिंक रिलीज़ हो रही है, लेकिन निर्माता के पास फिल्म के प्रमोशन का बजट नहीं है। जब फिल्म रिलीज़ हुई तो दूसरे-तीसरे हफ्ते में पिंक ने सफलता के झंडे गाड़ दिए। अब यहां पर फिल्म अच्छी थी इसलिए सफल हो गई और आप सभी जानते हैं बॉम्बे वेलवेट का क्या हुआ था। फिल्म का पहला शो देखने भी लोग नहीं आए थे।प्रमोशन के चक्कर में फिल्म के बजट को बढ़ाना बिल्कुल गलत है – ऋषि आगे कहते हैं, ’10 से 12 करोड़ और उससे ज्यादा किसी फिल्म के प्रमोशन में खर्च हो जाते हैं और उसकी रिकवरी भी तो फिल्म की सफलता पर ही निर्भर होती है। मैंने रणबीर के साथ एक फिल्म की थी बेशरम, फिल्म ने पहले दिन 21 करोड़ कमाए और दूसरे दिन की कमाई 6 करोड़ हो गई थी। इस बात को कोई भी समझने के लिए तैयार नहीं है कि आपकी फिल्म अच्छी होगी तभी चलेगी। दुनिया भर के प्रमोशन के चक्कर में फिल्म के बजट को बढ़ाना बिल्कुल गलत बात है।

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