बचपन को सुरक्षित करने का लिया संकल्प

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने किया रैली का नेतृत्व

जयपुर, 14 नवम्बर (कासं.)। राज्य में पहली बार राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के निर्देशानुसार बाल सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। बाल दिवस पर मंगलवार को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी के नेतृत्व में जयपुर के अमर जवान ज्योति सेे एसएमएस स्टेडियम में स्थापित अर्जुन स्टेच्यु तक पदयात्रा निकाली गई। रैली को सम्बोधित करते हुए राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि राज्य में बाल दिवस के अवसर पर शिक्षा विभाग द्वारा 14 से 20 नवम्बर तक प्रतिदिन अलग-अलग गतिविधियां का आयोजन किया जायेगा। सामाजिक न्याय एवं बाल अधिकारिता विभाग द्वारा भी बाल सप्ताह मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के हर बच्चे को बाल सप्ताह से जो?ते हुए बच्चों को अधिकार दिलाने और सहजता से बच्चों की बात सुनने के लिए संवेदनशीलता रखने की अपील भी आम आदमी से की जा रही है। अमर जवान ज्योति पर बच्चों के साथ बाल अधिकारों पर चर्चा की गयी साथ ही बच्चों को अपने अधिकार से अवगत कराया गया। राजस्थान को एक मिसाल के रूप में पेश किये जाने के लिए एक कदम बचपन की और को एक अभियान के रूप में लिया जा रहा है।

रैली के दौरान सेव द चिल्ड्रन संस्था के माध्यम से आयोग द्वारा बालिका गौरव यात्रा ट्रक को राजस्थान के सभी जिलों के लिए रवाना किया गया। यात्रा को हरी झण्डी दिखाने के लिए कच्ची बस्ती के बच्चे और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य सचिव वी सरवन कुमार, बाल अधिकार आयोग के समस्त अधिकारीगण, एम्बेसी से आये प्रतिनिधि पोलोक, यूनिसेफ से संजय निराला बाल संरक्षण विशेषज्ञ, प्लान इंडिया संस्था के प्रतिनिधि, सेव द चिल्ड्रेन संस्था के राज्य प्रतिनिधि सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों ने भागीदारी निभाई। मनन चतुर्वेदी ने सभी बच्चों के आगे-आगे चलकर रैली का नेतृत्व किया और बच्चों का उत्साह बढाया। उन्होंने बताया कि एक कदम बचपन की और को अभियान का रूप दिया जाकर आगामी सभी कार्यक्रम इसी टेगलाइन के साथ आयोजित किये जायेंगे। रैली के शुभारम्भ से पूर्व चतुर्वेदी ने बच्चों को अपने अधिकारों के लिए सदैव अपनी आवाज उठाने और अधिकारों की जानकारी अधिक से अधिक बच्चों तक आपस में फैलाने का आह्वान किया जिससे बच्चों के साथ होने वाली घटनाओं से पूर्व ही उनको सुरक्षित किया जा सके और बच्चों को अपना अधिकार दिलाने में सफल हो सके ।

 

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