किसान संगठनों ने दिल्ली घेराव के लिए झोंकी पूरी ताकत

श्रीगंगानगर, 6 जनवरी (नि.स.)। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने के दावे करते हुए केन्द्र में सत्तारूढ़ हुई भाजपा की नरेन्द्र मोदी सरकार के विरुद्ध देशभर के किसान संगठनों के महासंघ ने आखिरी जंग लडऩे के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकनी शुरू कर दी है। इस महासंघ में देश के सभी क्षेत्रों में पिछले काफी समय से आंदोलन कर रहे 60 से अधिक किसान संगठन शामिल हैं। इन किसान संगठनों ने हाल ही नई दिगी में बैठक कर आगामी 23 फरवरी को दिल्ली में सरकार का अनिश्चितकाल के लिए घेराव करने का ऐलान किया है। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने के साथ किसानों को पूर्णत: कर्जमुक्त करने की दो मुख्य मांंगों को लेकर यह महासंघ सरकार को घेरने की अपनी रणनीति बनाये हुए है। महासंघ में शामिल गंगानगर किसान समिति के संयोजक रणजीतसिंह राजू, वरिष्ठ सदस्य गुरबचन सिंह कंग, चक 7 डब्ल्यू, प्रवक्ता संतवीर सिंह मोहनपुरा, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष पृथीपाल सिंह संधू, श्रीगंगानगर देहात ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष ललित बहल लक्की, किसान समिति के मुकलावा ब्लॉक अध्यक्ष रामस्वरूप पूनिया, हरविन्द्र सिंह गिल, शिविन्द्र सिंह बुट्टर, हरजिन्द्र सिंह मान ढिंगावाली, बॉबी बराड़ मोहनपुरा आदि किसान नेताओं ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी। इन नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार को साढ़े तीन वर्ष हो गये हैं, लेकिन अपने चुनावी वायदे-दावे केअनुरूप स्वामीनाथन आयोग की रिपेार्ट लागू कर किसानों को उनकी फसल की लागत का डेढ़ गुणा मूल्य दिलाये जाने की व्यवस्था शुरू नहीं की गई है। अब इस सरकार का करीब डेढ़ वर्ष बाकी रह गया है। उन्होंने कहा कि फरवरी में इसीलिए ही यह बड़ा आंदोलन किया जा रहा है, क्योंकि इसके बाद केन्द्र सरकार आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों में लग जायेगी। मौजूदा मोदी सरकार के लिए स्वामीनाथन आयोग रिपोर्ट लागू करने की घोषणा महज एक धारणा या जुमला बनकर नहीं रहना चाहिए। इसीलिए ही महासंघ ने 23 फरवरी से इस सरकार के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई शुरू करने की घोषणा की है।

गंगासिंह स्टेडियम में जुटेंगे हजारों किसान

संयोजक रणजीतसिंह राजू ने बताया कि आगामी 23 फरवरी को दिगी घेराव के लिए श्रीगंगानगर जिले से अधिक से अधिक किसानों को ले जाने की रणनीति बनाई गई है। उन्होंने बताया कि किसान समिति की ब्लॉकवाइज टीमें बनाई जा रही हैं, जो प्रत्येक गांव में पहुंचेंगी। आह्वान किया जा रहा है कि दिगी का घेराव करने जाने के लिए प्रत्येक गांवों से दो-दो ट्रेक्टर-ट्रॉलियां और प्रत्येक एक घर से एक सदस्य शामिल हो। इस तरह जिले से सैकड़ों ट्रेक्टर-ट्रॉलियां और हजारों की संख्या में किसानों को 21 या 22 फरवरी को श्रीगंगानगर में महाराजा गंगासिंह स्टेडियम में पहुंचने का आह़्वान किया जा रहा है।
यहां से सभी विशाल रैली के रूप में दिगी के लिए प्रस्थान करेंगे। हनुमानगढ़ होते हुए यह रैली दिगी के लिए बढ़ेगी। हनुमानगढ़ जिले के किसान भी इसी तरह रैली में शामिल होंगे। प्रवक्ता संतवीर सिंह ने बताया कि 23 फरवरी को दिगी पहुंचने से पहले रास्ते में एक जगह रात्रिकालीन पड़ाव डाला जायेगा। वहीं पर भोजन आदि की व्यवस्था रहेगी। भोजन के लिए राशन पानी भी किसान अपने स्तर पर ही एकत्रित कर साथ ही लेकर चलेंगे। उन्होंने बताया कि दिगी में यह पड़ाव अनिश्चितकाल के लिए होगा। जब तक मोदी सरकार इन दो मुख्य मांगों पर कोई ठोस व सकारात्मक घोषणा नहीं करेगी, तब तक पड़ाव जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि 23 फरवरी को ही दिगी में देशभर से किसान नेताओं की अगुवाई में हजारों किसानों की टोलियां पहुंचेंगी। पूरी दिगी को ठप कर दिया जायेगा। प्रेस वार्ता में इन किसान प्रतिनिधियों ने बताया कि श्रीगंगानगर जिले से किसानों को संगठित कर रैली में शामिल होने के लिए टीमों द्वारा गांव-गांव मेें प्रचार करने के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी सम्पर्क किया जा रहा है। गंगानगर किसान समिति ने फेसबुक प्रोफाइल और वाट्सअप पर अनेक ग्रुप बना रखे हैं। इन ग्रुपों में हजारों किसान सदस्य हैं। इन सदस्य किसानों के जरिये आगे के आगे प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गांव-गांव में जाकर बैठकें-सभाएं की जायेंगी।

झंडा-बैनर छोड़कर आना होगा

यह पूरा आंदोलन पूर्णत: गैरराजनीतिक है। इसमें और भी कईं संगठन निरंतर शामिल हो रहे हैं। सरकार के विरुद्ध इस आखिरी जंग मेें शामिल होने के लिए महासंघ में शामिल किसान संगठनों ने राजनीतिक दलों के साथ-साथ अन्य सभी संगठनों को भी शामिल होने का आह्वान ही नहीं किया, बल्कि उनको निमंत्रित भी किया जा रहा है, लेकिन शर्त यह है कि उन्हें अपने राजनीतिक दलों का झंडा-बैनर छोड़कर आना होगा। प्रवक्ता ने बताया कि कांग्रेस के अलावा आप पार्टी, माकपा से सम्बद्ध अखिल भारतीय किसान सभा, टिब्बा क्षेत्र संघर्ष समिति, ऐटा-सिंगरासर नहर संघर्ष समिति सहित जिले में किसान हित में लगातार आंदोलन कर रहे संगठनों से सम्पर्क साधना शुरू कर दिया गया है। इनको आंदोलन मेें शामिल होने का आग्रह किया जा रहा है। आंदोलन का बैनर राष्ट्रीय किसान महासंघ ही होगा। गंगानगर किसान समिति, पूर्णत: गैरराजनीतिक है। इलाके के सभी किसान नेताओं से अपने राजनीतिक स्वार्थ छोड़कर सिर्फ किसान हित मेें इस आंदोलन से जुडने का इन किसान नेताओं ने आह्वान किया है।

फिरेाजपुर फीडर के जीर्णाेद्धार की योजना बने

गंगानगर किसान समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि बेशक 23 फरवरी को दो मुख्य मांगों को लेकर दिगी में सरकार का घेराव किया जा रहा है, लेकिन इसके साथ श्रीगंगानगर जिले के किसानों के लिए एक बेहद जरूरी मांग को भी साथ में रखा गया है। यह मांग है- गंगकैनाल को पंजाब से पानी मुहैया करवाने वाली और फिरोजपुर हैडवक्र्स से निकलने वाली फिरोजपुर फीडर नहर के जीर्णाेद्धार की। प्रवक्ता संतवीर सिंह मोहनपुरा ने कहा कि प्रदेश की वसुंधरा राजे सरकार को इस नहर के जीर्णाेद्धार के लिए अभी से कार्यवाही शुरू करनी चाहिए। अगले माह विधानसभा में बजट प्रस्तुत होने वाला है। इससे पहले जीर्णाेद्धार कार्य की डीपीआर तैयार करवाकर इस पर होने वाले खर्च का बजट घोषित करना चाहिए। अगर सरकार ने बजट में फिरोजपुर फीडर के जीर्णाेद्धार के लिए बजट घोषित नहीं किया तो इस इलाके के किसानों को साथ लेकर भी आंदोलन किया जायेगा।

लिंक चैनल से लिया जाये पानी

गंगानगर किसान समिति ने कहा है कि इस वर्ष अप्रेल माह मेें नहरों के रखरखाव एवं मरम्मत कार्य के लिए पंजाब से पानी की बंदी लिये जाने के समय जल संसाधन विभाग के अधिकारी अभी से ही एक विकल्प तैयार रखें। नहर बंदी के दौरान इस बार इलाके के किसानों और आम जनता को हमेशा की तरह पहले से डिग्गियों, टंकियों व नहरों में ही स्टोरेज किये हुए गंदे पानी को पीने नहीं दिया जायेगा। विकल्प के रूप में लिंक चैनल नहर की विभाग को साफ-सफाई एवं मरम्मत अभी से ही करवा लेनी चाहिए। इस नहर से पानी लेकर गंगकैनाल की नहरों को पानी निरंतर मिलता रहेगा। हमेशा यह परिपाटी नहीं चलने दी जायेगी कि गंगकैनाल, भाखड़ा और इन्दिरा गांधी नहर की मरम्मत-रखरखाव के लिए फिरोजपुर हैडवक्र्स से 40-40 दिन तक पानी को बंद रखा जाये। वैकल्पिक रूप से बनी हुई लिंक चैनल नहर की हालत इतनी खराब नहीं है कि उसमें पानी नहीं चलाया जा सके। थोड़ी-बहुत साफ-सफाई व मरम्मत करवाकर इस नहर से पानी लेकर नहरबंदी के दौरान उत्पन्न होने वाली पेयजल तथा सिंचाई पानी की कमी की मुसीबत को टाला जा सकता है।

 

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