इंश्योरेंस क्लेम में देरी नहीं कर सकती कंपनियां, जानें क्या बदले नियम

 

नई दिल्ली। जीवन, स्वास्थ्य और साधारण बीमा योजनाओं में पारदर्शिता लाने के तहत बीमा नियामक इरडा ने क्लेम के निपटारे को लेकर महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं। उसने बीमा कंपनियों से कहा है कि वे किसी भी बीमा के क्लेम को समयबद्ध तरीके से निपटाएं और इसके स्टेटस के बारे में लगातार उपभोक्ता को जानकारी मुहैया कराई जाए। बीमा कंपनियों को एक जुलाई से पॉलिसीधारक के साथ उसके दावे के निपटारे की स्थिति के बारे में जानकारी साझा करनी होगी। पॉलिसीधारकों को बीमा लैप्स होने, परिपक्वता आदि की भी समय-समय पर जानकारी देनी होगी। बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने एक परिपत्र में कहा कि बीमा कंपनियों को पॉलिसीधारकों के हितों यह जरूरी है, ताकि उन्हें अपनी गाढ़ी कमाई पाने के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े। दावों के मामले में इरडा ने कहा कि पॉलिसीधारकों के लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे उन्हें यह पता चल जाए कि आवेदन की स्थिति क्या है। इससे कंपनियों को समय पर दावे को निपटाने का दबाव बढ़ेगा।इरडा ने कहा कि कंपनियां पढऩे में आसान और समझने योग्य भाषा का इस्तेमाल करें और सूचना क्षेत्रीय या स्थानीय भाषाओं में दी जानी चाहिए। ज्यादातर बीमा कंपनियां अंग्रेजी या हिन्दी भाषा में जटिल शब्दावली वाले संदेश ग्राहकों को भेजती है।, जिन्हें समझ पाना आसान नहीं होता है। ग्राहकों की अक्सर शिकायत रहती है कि उन्हें बीमा कंपनियों की ओर से तकनीकी भाषा में जो संदेश भेजे जाते हैं। बीमा नियामक ने जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा और साधारण बीमा करने वाली सभी कंपनियों से कहा है कि वह पॉलिसी जारी होने और बीमा प्रीमियम भुगतान के बारे में पत्र, ई-मेल, एसएमएस या अन्य मंजूरी प्राप्त डिजिटल तरीके से ग्राहकों को सूचना देगी। बीमा कंपनियों को सतर्कता संदेश के अलावा फर्जीवाड़े को लेकर अपने ग्राहकों को जागरूक करने को लेकर संदेश भी देना होगा।

 

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