अठारह जनों को उम्रकैद, दस जनों को पांच-पांच वर्ष कैद

श्रीकरणपुर थाना क्षेत्र में सात वर्ष पहले चली थी गोलियां

श्रीगंगानगर, 6 जुलाई (का.सं.)। श्रीगंगानगर जिले मेें सीमावर्ती श्रीकरणपुर थाना क्षेत्र में लगभग सात वर्ष पहले दो पक्षों में जमकर हुए फसाद-घमासान में एक व्यक्ति के मारे जाने तथा कईं जनों के घायल हो जाने के बहुचर्चित मामले में अदालत ने दोनों पक्षों को ही दंडित किया है। एक पक्ष के सभी 18 जनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। दूसरे पक्ष के 10 व्यक्तियों को पांच-पांच वर्ष की सजा दी गई है। इस मामले में सिर्फ एक व्यक्ति ही अदालत से बरी हुआ है। शुक्रवार को श्रीकरणपुर में अतिरिक्त जिला सैशन जज की कोर्ट द्वारा इस मामले का फैसला सुनाये जाने के समय भारी गहमागहमी रही। दोनों पक्षों में फिर से कहीं टकराव न हो जाये, इसके मद्देनजर काफी संख्या में पुलिसकमी्र तैनात किये गये। सुबह से ही इस मामले में अदालत के आने वाले फैसले को लेकर कोर्ट कैम्पस में अटकलें लगती रहीं। शाम को जब निर्णय सुनाया गया, तब दोनों पक्षों के सभी आरोपित कोर्ट में हाजिर थे। इनके साथ इनके परिवार वालों सहित काफी लोगों की भीड़ भी कोर्ट के अंदर और बाहर मौजूद रही। अदालत का फैसला आते ही इन सबको पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया। अदालत में इस केस के विचाराधीन रहने के दौरान सिर्फ एक मुल्जिम को छोड़कर बाकी सभी 28 जने जमानत पर रिहा थे। इनमें से एक रामकिशन नामक व्यक्ति ही अदालत से बरी हुआ है। बाकी 27 जनों के जमानत मुचलके निरस्त करते हुए सजा भुगतने के लिए जेल भेज दिया गया। यह घटना श्रीकरणपुर थाना क्षेत्र में 26 जून 2011 की शाम को चक 53 जीजी में हुई थी। दो मौसेरे भाइयों निर्मलचंद कम्बोज तथा ओमप्रकाश के पक्ष के लोग आमने-सामने हो गये थे। दोनों पक्षों की ओर से जमकर हमला किया गया। एक पक्ष की ओर से अंधाधुंध फायरिंग की गई, जिसमें निर्मलचंद कम्बोज की मौके पर ही मौत हो गई थी। जलंधर सिंह, राजेन्द्र, बलदेवाराम, सतपाल गोलियों के छर्रे लगने से घायल हो गये थे। इसके अलावा भी अनेक जनों के चोटें आईं। उसी दिन देर रात को दोनों पक्षों की ओर से परस्पर मुकदमे दर्ज किये गये। मृतक निर्मलचंद के पक्ष की ओर से रामलाल ने मुकदमा दर्ज करवाया, जिसमें 18 जनों पर हत्या और हत्या का प्रयास करने का आरोप लगाया गया। दूसरी ओर ओमप्रकाश ने रामलाल सहित 11 जनों पर गैर इरादतन हत्या का प्रयास करने का आरोप लगाते मुकदमा दर्ज करवाया। पुलिस ने दोनों मामलों की जांच करते हुए दोनों पक्षों को ही एक-दूसरे पर हमला करने का दोषी माना। रामलाल द्वारा दर्ज करवाये गये मुकदमे की तफ्तीश में पुलिस ने पहले 14 जनों के खिलाफ और बाद में चार जनों के विरुद्ध हत्या और हत्या के प्रयास के आरेाप में चालान पेश किये। दूसरी ओर ओमप्रकाश द्वारा दर्ज करवाये गये मुकदमे में भी 11 जनों के विरुद्ध धारा 308 के तहत चालान पेश किया गया। अदालत में इस केस की सुनवाई लगभग सात वर्ष तक चली। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से अनेक साक्ष्य प्रस्तुत किये गये। सिर्फ ओमप्रकाश को छोड़कर दोनों मुकदमों में बाकी सभी 28 जनों की जमानत हो गई थी। ओमप्रकाश गिरफ्तारी के बाद से जेल में ही है।
सिर्फ एक पेड़ का था विवाद यह खूनी संघर्ष सिर्फ कीकर के एक पेड़ के लिए हुआ था। प्रकरण के तथ्यों के मुताबिक निर्मलचंद कम्बोज और उसके मौसेरे भाई ओमप्रकाश में जमीन का बंटवारा हुआ था। चक 53 जीजी के मुरब्बा नम्बर 42 के किला नं. 5 की एक चौथाई जमीन इनमें से एक जने को मिली थी और तीन चौथाई जमीन दूसरे भाई के हिस्से में आई। इसी किला नं. में एक खाले के पास कीकर का पेड़ था। इस पेड़ पर वे दोनों भाई अपना-अपना दावा जताने लगे। मामला गांव की पंचायत में गया। गांव की पंचायत इस पर कोई निर्णय नहीं कर पाई। फिर यह मामला श्रीकरणपुर में एसडीएम कोर्ट में पहुंचा। एक पक्ष ने एसडीएम कोर्ट में इस पेड़ पर अपना हक बताते हुए दावा किया। एसडीएम कोर्ट ने 25 जून 2011 को यह दावा खारिज कर दिया। इस पर निर्मलचंद कम्बोज पक्ष ने समझ लिया कि कोर्ट ने उनके हक में निर्णय दिया है। अगले दिन शाम लगभग 6 बजे निर्मलचंद अपने साथ कईं जनों को लेकर खेत में चला गया। बताया जाता है कि वहां पेड़ तब गिरा-कटा पड़ा था, जिसे वे उठाने के लिए गये थे। इस बीच दूसरे पक्ष के ओमप्रकाश को जब पता चला, तो वह अपने आदमियों को लेकर आ गया। इस पर दोनों पक्षों में खूनी संघर्ष हुआ। इन्हें दी गई है सजा निर्मलचंद की हत्या करने और उसके पक्ष के लोगों पर जानलेवा हमला करने के सभी 18 आरोपितों- कृष्णचंद पुत्र रामदित्ता कम्बोज चक 53 जीजी, राजकिरण उर्फ भुगा पुत्र ओमप्रकाश कम्बोज कगाी थेड़ी श्रीकरणपुर, जसकरण सिंह पुत्र सुरजीत सिंह जट सिख लक्कड़मंडी श्रीकरणपुर, कालूराम पुत्र आत्माराम नाई रड़ेवाला रोड, श्रीकरणपुर, आथर उर्फ कृष्ण पुत्र नेकराम धानक वार्ड नं. 11 श्रीकरणपुर, हरजीत सिंह पुत्र गुरजीत सिंह मजबी गांव सेखसरपाल, सूरजप्रकाश पुत्र किशनचंद कम्बोज चक 53 जीजी, बलवंत सिंह पुत्र दर्शनसिंह मजबी वार्ड 17 श्रीकरणपुर, ओमप्रकाश पुत्र किशनचंद कम्बोज वार्ड 9, श्रीकरणपुर, रामप्रकाश पुत्र किशनचंद कम्बोज चक 53 जीजी, सर्वजीत सिंह उर्फ सरब पुत्र सुखविन्द्र सिंह जट सिख चक 14 ओ, जयप्रकाश पुत्र किशनचंद कम्बोज चक 53 जीजी, हितेश कुमार पुत्र रामप्रकाश कम्बोज चक 53 जीजी, जसकरण सिंह उर्फ जस्सा पुत्र अमरचंद रामदासिया चक 49 एफ, बच्ची पुत्र चुन्नीलाल मजबी चक 19 ओ, अनिल पुत्र गोपीराम बिश्रोई चक 9 एफए माझीवाला, गीति उर्फ गुरीत सिंह पुत्र दरबारासिह जट सिख 53 जीजी और कर्मवीर सिंह मेघवाल को अदालत ने धारा 302/396 में उम्रकैद व एक-एक हजार जुर्माना, धारा 147 व 427 में एक-एक वर्ष कैद व धारा 148 में दो साल की सजा सुनाई है। आम्र्स एक्ट में भी इनको सजा व जुर्माने से दंडित किया गया है। यह सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। दूसरी तरफ ओमप्रकाश द्वारा दर्ज करवाये गये मुकदमे में मुल्जिम- रामलाल, नवनीत कुमार, राजेन्द्र कुमार उर्फ राजेन्द्रप्रसाद, रमेशचंद्र, अंग्रेज सिंह, सतपाल सिंह, राजगोपाल, पालासिंह उर्फ गुरपाल सिंह उर्फ सुखपाल सिंह, गुरमेल सिंह उर्फ सेठी तथा गंगाबिशन को धारा 147, 148, 308/149 में दोषी करार दिया गया। इन धाराओं में अलग-अलग सजा सुनाई गई है। धारा 308/149 मेें अधिकतम 5-5 वर्ष का कठोर कारावास दिया गया है। इन दोनों मामलों में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी लोक अभियोजक सुरेन्द्र कुमार ने की। उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले में सिर्फ एक अभियुक्त रामकिशन को अदालत ने आरोपमुक्त किया है। ओमप्रकाश की गिरफ्तारी के बाद से जमानत नहीं हुई थी। बाकी 27 जनों को आज जेल भेज दिया गया।

 

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