क्रेडिट सुधार ने लांच किया पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन

मुंबई, 29 अक्टूबर (एजेन्सी)। भारत में क्रेडिट ऐडवाइजऱी की अग्रदूत तथा प्रत्येक यूजऱ के क्रेडिट प्रोफाइल के मुताबिक वित्तीय उत्पाद पेश करने वाली कंपनी क्रेडिट सुधार ने अब माय डिजिटल प्रोटेक्शन के सहयोग से पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन के लांच की घोषणा की है। यह एक पहल है डिजिटल वल्र्ड में ग्राहकों को सुरक्षित रहने के लिए इनोवेटिव और उपयोगी समाधान मुहैया कराने की। पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन को इसलिए डिजाइन किया गया है ताकि वित्तीय एवं निजी आंकड़ों को ऑनलाइन सुरक्षित रखा जा सके। क्रेडिट सुधार के निदेशक अरुण रामामूर्ति ने कहा, भारत में हर 10 मिनट में एक साइबर अपराध की सूचना दर्ज होती है जिनमें रैनसमवेयर से लेकर फिशिंग व स्कैनिंग रैकेट तक शामिल हैं। कहने की आवश्यकता नहीं की यह सूचना वास्तविक संख्या का एक छोटा सा हिस्सा हो। क्रेडिट सुधार में हम भारतीय उपभोक्ताओं को ऐसे समाधान देना चाहते हैं जो उन्हें डिजिटल दुनिया में सुरक्षा प्रदान करें क्योंकि डिजिटल इंडिया का विस्तार हो रहा है और इसके साथ ही लोगों की डिजिटल उपस्थिति में भी वृद्धि हो रही है। पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन की पेशकश के साथ क्रेडिट सुधार ने न सिर्फ उत्पादों व सेवाओं के अपने पोर्टफोलियो को मजबूत बनाया है बल्कि फाइनेंस टेक्नोलॉजी में बतौर लीडर अपनी स्थिति को भी पुख्ता किया है।पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन सॉल्यूशन उपभोक्ताओं व उद्यमों को पब्लिक वैब और डार्क वैब पर निगरानी रखने में सक्षम बनाता है ताकि डाटा बिंदुओं से संबंधित जोखिमों की खबर की जा सके। इस प्रोसैस में क्षमता है कि क्रेडिट व डेबिट कार्ड नंबरों, बैंक अकाउंट नंबरों और निजी पहचान दस्तावेजों के नंबर जैसे पासपोर्ट, आधार, पैन कार्ड व ड्राइविंग लाइसेंस को ट्रैक किया जा सके। उपभोक्ता को डाटा पॉइंट की उपस्थिति पर सूचित किया जाएगा, साथ में वैब पर कहीं और डाटा मैच की पहचान होने पर संबंधित जोखिम का मूल्यांकन किया जाएगा।माय डिजिटल प्रोटेक्शन के अमित संजीव ने कहा, भारत सरकार की सक्रियता के चलते देश बड़ी तेज़ी से डिजिटल यात्रा पर आगे बढ़ रहा है। नेटीजं़स अब ऐसी वर्चुअल लाइफ जीने लगे हैं जैसी पहले कभी नहीं जिया करते थे, आज वे सभी किस्म की वित्तीय एवं निजी जानकारी ऑनलाइन व ऑफलाइन साझा कर रहे हैं। किंतु ऑनलाइन फ्रॉड व इंटरनेट हैकिंग के चलते इस वृद्धि से निजी पहचान पर बहुत जोखिम उत्पन्न हो गया है।अरुण रामामूर्ति ने कहा, डाटा पर जोखिम के बारे में जागरुकता से निवारक कदम उठाने में मदद मिलेगी और वित्तीय नुकसान की रोकथाम होगी।साइबर अपराध नए युग का अपराध है जहां लोगों को बहुत लंबे वक्त तक मालूम नहीं चलता की उन्हें शिकार बनाया गया है। भले ही भारत आईटी का केन्द्र है किंतु आम जनता में इस संबंध में जागरुकता नहीं है इसलिए डिजिटलीकरण में तीव्र वृद्धि के साथ जोखिम भी तीव्रता से बढ़ता जाएगा। हाल ही में बड़े पैमाने पर ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जिनसे मालूम चलता है कि इस क्षेत्र में समाधानों की आवश्यकता बढ़ रही है।

 

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