प्रोपर्टी डीलर को ठगने वाला निकला अपराधी घाचीं

श्रीगंगानगर, 17 जनवरी (नि.स.)। श्रीगंगानगर के प्रोपर्टी डीलर प्रजापति मुकेश अम्बालाल से सभापति अजय चांडक का निजी सचिव बनकर छह लाख रुपये ठगने वाला शातिर अपराधी सुरेश घाची है, जिसने न जाने कितने लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाते हुए लाखों-करोड़ों रुपये ठग चुका है। सुरेश घाची दो-तीन दिन पहले ही निम्बाहेड़ा में वहां की पुलिस द्वारा पकड़ा गया है, जहां उसने विधायक बनकर विधायक के ही एक करीबी से 15 लाख रुपये ठग लिये थे। स्थानीय कोतवाली पुलिस सुरेश घाची को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आयेगी। मूल रूप से गुजरात निवासी प्रोपर्टी डीलर मुकेश अम्बालाल द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर कोतवाली पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति पर छह लाख की ठगी का मामला दर्ज किया है, जबकि इसकी जांच पुलिस तीन-चार दिन से कर रही थी। जांच के दौरान ही स्पष्ट हुआ कि यह ठगी करने वाला सुरेश घाची है, जो निम्बाहेड़ा पुलिस की गिरफ़्त में है। तब यह मामला दर्ज कर लिया गया। कोतवाल नरेन्द्र पूनिया ने बताया कि पाली जिले का निवासी सुरेश घाची इतना शातिर है कि वह जिस किसी के भी सम्पर्क में आता है, कुछ ही देर में उसी का करीबी बनकर या वही बनकर उसके किसी ना किसी जानकार से लाखों रुपये ठगकर पार हो जाता है। निम्बाहेड़ा पुलिस ने उसे विधायक बनकर 15 लाख की ठगी करने के जिस मामले में गिरफ्तार किया है, उसमें घाची ने विधायक के रसूख का ही लाभ उठाया। उसने विधायक बनकर विधायक के ही एक जानकार को फोन किया कि उसके एक रिश्तेदार को कैंसर है, जिसके इलाज के लिए उसे तत्काल 15 लाख की जरूरत है। जिस शख्स को फोन किया, उसे बिल्कुल भी शक नहीं हुआ कि फोन करने वाला विधायक है या कोई शातिर दिमाग ठग। उसने हां कर दी और कुछ देर बाद सुरेश घाची द्वारा भेजे गये शख्स ने विधायक के इस जानकार से 15 लाख रुपये ले लिये। बाद में इस ठगी का खुलासा हुआ। पूनिया के अनुसार इससे पूर्व सुरेश घाची बीकानेर जिले में श्रीकोलायत थाना क्षेत्र के एक सरपंच के नाम पर भी इसी तरह 2 लाख रुपये की ठगी कर गया था। उसे वहां बाद में गिरफ्तार कर लिया गया था। बीकानेर जेल में रहते हुए सुरेश घाची ने जेल से ही बीछवाल थानाप्रभारी धीरेन्द्र सिंह शेखावत के सुजानगढ़ (चूरू) में रहने वाले परिचित को फोन कर डेढ़ लाख रुपये ठग लिये थे। श्री पूनिया ने बताया कि मुकेश अम्बालाल ने जब अपने साथ छह लाख की ठगी होने के बारे में बताया, उन्हें तभी शक हो गया था कि इसमें सुरेश घाची का ही हाथ हो सकता है। इसकी पड़ताल की गई तो यह सही निकला।बता दें कि मुकेश अम्बलाल पुरानी धानमंडी में अशोक वधवा की दुकान के ऊपर बने मकान में रहता है, जहां उसने प्रोपर्टी डीलर का कारोबार कर रखा है। विगत दो जनवरी को अशोक वधवा के पास ही फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को अजय चांडक का पीए बताते हुए उनके यहां किराये पर रहने वाले मुकेश अम्बालाल से बात करवाने के लिए कहा। श्री वधवा ने मुकेश की बात करवाई तो उक्त कथित पीए ने जयपुर में सस्ती प्रोपर्टी दिलवाने का झांसा दिया। साथ ही कहा कि प्रोपर्टी बेचने वाले को तुरंत ही रुपयों की जरूरत है। वह जयपुर मेें छह लाख रुपये अभी दिलवा दे तो वह कल ही इस प्रोपर्टी की रजिस्टरी करवा देगा। मुकेश अम्बालाल के साथ घाची ने इतने शातिर अंदाज से बात की कि उसे कोई शक ही नहीं हुआ। कुछ ही देर बाद मुकेश ने जयपुर में अपने एक परिचित अल्पेश पटेल से फोन करने वाले घाची द्वारा भेजे गये रवि नामक व्यक्ति को यह छह लाख रुपये दिलवा दिये। इसके बाद घाची और रवि ने उससे बात करना ही बंद कर दिया। इसके बाद मुकेश अम्बालाल को शक हुआ कि उसके साथ ठगी हो गई है। उसने श्री चांडक से बात की तो उन्होंने भी अपने निजी सचिव द्वारा इस तरह का फोन किये जाने से इंकार कर दिया। श्री पूनिया ने बताया कि सुरेश घाची जस्ट डायल नाम की एक वैबसाइट से लोगों के मोबाइल नम्बर लेता रहता है। वह इन नम्बरों से ही पता लगा लेता है कि कौन कितना बड़ा पैसे वाला और प्रभाव वाला है। फिर उसी के नाम का इस्तेमाल कर दूसरों से ठगी करता है।

 

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