पंचकर्म सत्र के साथ डाबर ने रिकॉर्ड बुक्स में प्रवेश किया

 

जयपुर। भारत के विज्ञान-आधारित आयुर्वेद विशेषज्ञ डाबर इंडिया लि. ने आज भारत की सबसे पुरानी चिकित्सा विधि आयुर्वेद को गिनीज़ वल्र्ड रिकॉर्ड बुक में पहुंचा दिया। डाबर ने 1000 से अधिक प्रतिभागियों के साथ दुनिया के सबसे बड़े नास्य पंचकर्म उपचार सत्र आयोजित करने का आज नया रिकॉर्ड बनाया है। विश्व रिकार्ड के इस अभियान में डाबर इंडिया लि, नास्य संस्थान और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (एनआईए), जयपुर ने मिलकर प्रयास किया और यह शहर में आयोजित पहले राष्ट्रीय आयुर्वेद युवा महोत्सव के साथ आयोजित किया गया।नास्य पंचकर्म ईवेंट ‘आयुर्वेद की संरक्षकÓ डाबर इंडिया लि. द्वारा युवा पीढ़ी के बीच इस प्राचीन भारतीय चिकित्सा की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए योजनाबद्ध की गई कई गतिविधियों में से सबसे नई है। आयुर्वेद के नास्य उपचार नाक के माध्यम से हर्बल ऑईल और दवाईयां अंदर डाली जाती हैं। यह खासकर कान, नाक और गले की बीमारियों के इलाज में फायदेमंद होता है। नास्य आयुर्वेद की पांच पंचकर्म विधियों में से एक है, जो आपके शरीर के शुद्धिकरण के लिए की जाती हैं। नास्य पंचकर्म खासकर गले के निचले सिरे के ऊपर की बीमारियों को ठीक करने में उपयोगी है।

 

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