खून को जहर में बदल मलेरिया से निजात दिलाएगी दवा

 

मच्छर के काटने पर होने वाली बीमारियों का खतरा हम सभी पर इस कदर हावी रहता है कि इनसे दूर रहने के लिए हम न जाने कितने उपाय अपनाते हैं। मगर अब विशेषज्ञ एक ऐसी दवा बनाने के करीब हैं, जिससे आप मच्छर को खुद को काटने की चुनौती दे सकेंगे। केन्या स्थित लिवरपूल स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन में हुए अध्ययन के मुताबिक वैज्ञानिकों ने एक दवा तैयार की है आईवरमेक्टिन। इस दवा के इस्तेमाल से व्यक्ति का रक्त मच्छरों और अन्य उपजीवी या पैरासाइट के लिए जहरीला हो जाता है। इनसान को काटने पर मच्छर खुद ही मर जाएगा। विशेषज्ञों का दावा है कि इस दवा के इस्तेमाल से मच्छरों के कारण होने वाली मलेरिया जैसी बीमारियों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। यह दवा कोई नई खोज नहीं है, इसका इस्तेमाल 1980 से जूं और फाइलेरियासिस समेत कई बीमारियों के इलाज के लिए हो रहा है। यह अध्ययन द लांसेट इनफेक्शियस डिजीजेज में गुरुवार को प्रकाशित हुआ है। प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर मेनो स्मिट ने कहा कि तीन दिन तक आईवरमेक्टिन गोली के हाई डोज लेने से व्यक्ति का रक्त 28 दिनों के लिए जहरीला हो जाता है। इस दौरान मच्छर अगर उसे काटता है तो मच्छर मर जाता है। हालांकि इसके कुछ दुष्प्रभाव हैं, जिन पर विशेषज्ञ काम कर रहे हैं।डॉ. स्मिट का कहना है कि खास बात यह है कि आईवरमेक्टिन की खुराक लेने के तकरीबन एक माह बाद तक उसका असर बना रहता है। इस दवा के इस्तेमाल से व्यक्ति का खून ही मच्छरों के अंत का कारण बन जाता है। इस अध्ययन के लिए 47 प्रतिभागियों के पहले रक्त के नमूने लिए और फिर उन्हें आईवरमेक्टिन की खुराक दी गई। इसके बाद दोबारा उनके रक्त का नमूना लेकर कृत्रिम मेंब्रेन में रखा गया, ताकि मच्छर उससे रक्त चूस सकें। विशेषज्ञों ने देखा कि इस रक्त को चूसने वाले तकरीबन 97 फीसदी मच्छरों की दो हफ्तों में मौत हो गई थी। इस अध्ययन को केन्या मेडिकल रिसर्च मेडिकल इंस्टीट्यूट और यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन अपना समर्थन प्रदान किया है।

मलेरिया है जानलेवा
– विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया की आधी आबादी पर मलेरिया का खतरा मंडरा रहा है
– 2015 में मलेरिया से हुई थी 4.29 लाख लोगों की मौत, सर्वाधिक आंकड़ा सब सहारा अफ्रीका का था
– 2015 में यहां 90 फीसदी मलेरिया के मामले सामने आए थे और इनमें 92 फीसदी की मौत हो गई थी
बच्चों पर खतरा अधिक
– पांच साल तक के बच्चों पर होता है मलेरिया का सर्वाधिक खतरा, 70 फीसदी मौतें इसी उम्र में होती हैं
– 2015 में अफ्रीका में पांच साल से कम उम्र के तकरीबन तीन लाख बच्चों की मौत हो गई थी
– मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा आर्टेमिसिनिन के प्रति कंबोडिया, लाओस, म्यांमार, थाईलैंड और वियतनाम के मच्छरों में प्रतिरोधक क्षमता देखने को मिली
– 2010 के बाद से मलेरिया के कारण होने वाली मौतों के मामलों में 29 फीसदी की कमी देखने में आई है

 

 

 

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