सरकारी डॉक्टर की कारास्तानी से वृद्धा की मौत

झगड़े में टूटे हाथ का नहीं किया इलाज, दो और डॉक्टरों पर भी लापरवाही का आरोप
श्रीगंगानगर, 3 अक्टूबर (नि.स.)। सूरतगढ़ के सरकारी अस्पताल में ऑर्थाे डॉक्टर विजय भादू तथा दो अन्य निजी चिकित्सकों पर एक वृद्धा का इलाज करने में पद का दुरुपयोग करते हुए लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है। इस कथित लापरवाही के चलते इस वृद्धा की पिछले दिनों मौत हो गई। यह वृद्धा एक झगड़े में घायल हो गई थी, जिसके एक हाथ में फ्रेक्चर हो गया था। आरोप है कि झगड़े के आरोपितों को फायदा पहुंचाने के लिए डॉ. भादू ने इस हाथ का इलाज नहीं किया, जिससे वृद्धा के शरीर में इंफेक्शन फैल गया। दूसरे डॉक्टर अपने ही हिसाब से इस वृद्धा का इलाज करने में लगे रहे। मृतका के पति द्वारा दायर किये गये इस्तगासा के आधार पर इन सबके विरुद्ध मंगलवार को मामला दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार सूरतगढ़ में केन्द्रीय-रा’य कृषि फार्म से सेवानिवृत्त और वार्ड नं. 33 में एयरफोर्स रोड पर किरयाना की दुकान करने वाले रामआसरे पुत्र गंगाप्रसाद केवट ने इस्तगासा से यह मुकदमा डॉ. विजय भादू, कोर्ट रोड पर स्थित डेज नर्सिंग होम के डॉ. जेएम डे और एपेक्स मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल के हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. राजेन्द्र छाबड़ा पर यह मामला दर्ज किया गया है। रामआसरे के मुताबिक 4 फरवरी 2016 को पड़ोसियों के साथ झगड़ा हो गया था, जिस दौरान अरविन्द, सोमवती व अन्यों द्वारा की गई मारपीट से उसकी पत्नी गुजराती देवी घायल हो गई थी। उसे सरकारी अस्पताल मेें भर्ती करवाया गया। पत्नी के शरीर पर काफी चोटें लगी थीं। उसने अस्पताल में ऑर्थाे डॉ. विजय भादू को अपने लगी हुई चोटों तथा शरीर पर जहां-जहां दर्द था, बताया। बावजूद इसके डॉ. भादू ने झगड़े के आरोपितों को फायदा पहुंचाने के लिए जान-बूझकर दाएं हाथ का एक्सरे नहीं करवाया, जिसमें उसकी पत्नी ने सबसे ज्यादा दर्द होना बताया था।डॉ. भादू बार-बार यही कहते रहे कि ज्यादा उम्र होने के कारण दर्द धीरे-धीरे ठीक होगा। जब डॉ. भादू के ट्रीटमेंट से आराम नहीं मिला, तो उसने जुलाई 2016 में पत्नी का डॉ. जेएम डे से इलाज करवाना शुरू कर दिया। डॉ. डे ने कईं महंगे टेस्ट करवाये। उसने खांसी की तकलीफ बताकर इलाज करना शुरू कर दिया। यहां भी लम्बे समय तक इलाज के बावूजद आराम नहीं मिला, तो वह पत्नी को डॉ. छाबड़ा के अपेक्स मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल में अप्रेल 2017 में ले गया। डॉ. छाबड़ा ने भी कईं महंगे टेस्ट करवाये। डॉ. छाबड़ा गले में कफ होना बताकर इलाज करते रहे, जबकि उसकी पत्नी बार-बार दाएं हाथ में दर्द होना बताती रही। रामआसरे के मुताबिक इसके एक माह बाद वह दोबारा पत्नी को सरकारी अस्पताल में ले गया, तब डॉ. भादू ने दाएं हाथ का एक्सरे करवाया। एक्सरे में हड्डी में फ्रेक्चर होना दिखा। तब डॉ. भादू ने कहा कि यह चोट काफी पुरानी है। इस चोट के कारण शरीर पर इंफेक्शन हो गया है। रामआसरे के अनुसार इसके बाद वह पत्नी को डॉ. परमिन्द्र स्वामी के यहां ले गया। उसने भी यहीं बात बताई और हाथ पर प्लास्टर चढ़ा दिया। फिर वह इलाज के लिए पत्नी को डॉ. व्यास के यहां ले गया। डॉ. व्यास ने हालत गम्भीर देखते हुए बीकानेर में ले जाने की सलाह दी। बीकानेर ले जाने पर वहां भी डॉक्टरों ने यहीं बताया कि इस पुरानी चोट का उसी समय इलाज नहीं किया गया, जिसकी वजह से पूरे शरीर में इंफेक्शन फैला हुआ है। गुजरातीदेवी की 13 जून की रात को बीकानेर में मृत्यु हो गई। रामआसरे ने इसके लिए डॉ. भादू, डॉ. डे और डॉ. छाबड़ा को दोषी करार दिया है। इन पर पद का दुरुपयोग करने और चिकित्सकीय लापरवाही बरतने के आरोप लगाये गये हैं।

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