डिप्रेशन को लेकर दीपिका बोलीं-मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करना है जरूरी

डिप्रेशन होने के बाद अब मैं खुद का ज्यादा ख्याल रखने लगी हूं, डिप्रेशन के बारे में भी मैंने इसलिए बताया ताकि लोग इसके बारे में बात करें। भारत में ही हर पांच में से एक भारतीय अपनी जिंदगी में एक बार डिप्रेशन से जूझता है। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना बेहद जरूरी है। राजधानी आईं अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने खास बातचीत में विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के मौके पर कहीं। उन्होंने कहा कि इस बारे में अगले साल कारपोरेट संस्थानों को भी मानसिक स्वास्थय के संबंध में जोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि 5 फरवरी 2014 को अचानक मैंने रोना शोर कर दिया था, मां घर पर उस दिन साथ में ही थी। मुझे कुछ भी पता नहीं लग पा रहा था, मेरे साथ क्या हो रहा था। एक अजीब सा अकेलापन महसूस किया था। इसके बाद पहली बार लगा कि मुझे किसी काउंसलर को दिखाना चाहिए, तब पहली बार मैंने एना चैंडी को दिखाया था। दीपिका ने इस बात पर जोर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य को समझना जरूरी है। अब उस दौर के बारे में डर नहीं लगता है, जब मुझे कुछ अजीब महसूस होता है कि मैं खाना नहीं खा रहीं हूं तो मैं डॉक्टर को दिखाती हूं। उनसे जब पूछा गया कि फिल्म इंडस्ट्रीज में लोग डिप्रेशन के बारे में बात करते हैं या मानते हैं? इस पर उन्होंने कहा कि मैं केवल फिल्म इंडस्ट्री को इसमें नहीं जोडूंगी, यह किसी को भी हो सकता है। ऐसे में जागरूकता जरूरी है। सबसे अहम चीज है कि लोग डिप्रेशन के बारे में बात करने से बचते हैं। अपने से जुड़े लोग बॉस, टीचर को बताया जाए तो वह डाटेंगे। ऐसे में इस धारण को तोडऩा जरूरी है। जब डायबिटीज या कोई और बीमारी होती है तो डॉक्टर के पास हम लोग जाते हैं, इस बारे में सभी को बताते हैं।
गांवो में मानसिक स्वास्थ्य पर काम करना जरूरी : दीपिका ने बताया कि गांवों में मानसिक स्वास्थ्य के बारे में काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लोगों को इस बारे में शिक्षित करना जरूरी है। इसके लिए अहम है बात की जाये। उनकी संस्था लिव लव लॉफ फाउंडेशन इस बारे में बेंगलुुरू में एपीडी नाम की संस्था के साथ काम कर रहा है। वहां हर मंगलवार को लोग जाते हैं। फिलहाल बेंगलुरु में फोकस है, धीरे-धीरे भारत के अन्य क्षेत्रों में काम किया जाएगा। वहीं शहरों में स्कूलों में डिप्रेशन के बारे बात की जा रही है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए वर्कप्लेस पर काम करना जरूरी : दीपिका ने सुझाव दिया कि वर्कप्लेस पर कई पॉलिसी बदलनी होंगी, कई बार किसी कर्मचारी को कोई मानसिक दिक्कत होती है तो उसे निकाल दिया जाता है। इस बारे में उनकी संस्था और भी आगे काम करेगी।

डिप्रेशन होने के बाद अब मैं खुद का ज्यादा ख्याल रखने लगी हूं, डिप्रेशन के बारे में भी मैंने इसलिए बताया ताकि लोग इसके बारे में बात करें। भारत में ही हर पांच में से एक भारतीय अपनी जिंदगी में एक बार डिप्रेशन से जूझता है। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना बेहद जरूरी है। राजधानी आईं अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने खास बातचीत में विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के मौके पर कहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *