कसाब को फांसी तक पहुंचाने वाली देविका बनना चाहती है पुलिस आफिसर

श्रीगंगानगर, 15 अप्रेल (कासं.)। मुंबई के 26/11 हमले के दुर्दांत आतंककारी मोहम्मद कसाब को फांसी के फंदे पर पहुंचाने में सबसे महत्वपूर्ण गवाही देने वाली देविका रोटावन को रंज है कि काश! उस दिन मेरे हाथ में बंदूक होती, मैं उस कसाब को वही भून डालती जिसने अपने 9 आंतकवादी साथियों के साथ मिलकर हमला किया और 166 निर्दोष व्यक्तियों को मार डाला व 300 से ज्यादा को घायल कर दिया। श्रीगंगानगर में अपने सम्मान में आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में पिता नटवरलाल व भाई जयेश के साथ उपस्थित देश की बहादुर बेटी देविका(19) ने बताया कि 26/11 के हमले के दिन वे तीनों पुणे जाने के लिए शाम को मुंबई के छत्रपति टर्मिनल रेलवे स्टेशन पर पहुंचे थे। तब वह 9 वर्ष 10 महीने की थी। स्टेशन पर आते ही उसका भाई बाथरूम करने चला गया।तभी एकाएक गोलियां चलने लगीं,लोग खून से लथपथ हो कर गिरने-चीखने लगे। एक गोली उसके पाँव में लगी। उसने आंतककारियों को गोलियां चलाते देखा। उसके पिता ने भी गोलियां चलाने वालों को देखा। देविका ने बडे जोश- रंज के साथ कहा- काश! उस दिन मेरे हाथ में बंदूक होती,मैं वहीं आंतककारियों को ढेर कर देती।देविका ने कहा अब वह पुलिस आफिसर बनना चाहती है। मुंबई के उपनगर बांद्रा की एक चाल में सिर्फ दस गुणा दस की खोली में पिता व भाई के साथ रहने वाली देविका परिवार मूल से राजस्थान के सुमरेपुर-पाली का रहने वाला है।देविका बताया कि 26/11के इस हमले-हादसे ने उनकी जिंदगी ही बदल दी। उसके पाँव में लगी के कारण उसके 6 आपरेशन हुए। पांव में स्टील की राड लगी हुई। इस हमले में मारे गए मुंबई पुलिस कर्मियों सहित अन्य लोगों को सरकार से बहुत कुछ मिला, लेकिन उस जैसे घायलों को कोई ज्यादा मदद नहीं मिली। उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया।देविका ने बताया -उसे टीबी हो गई उसकी पढाई छुट गई। उसके पाँव में गोली के घाव के इलाज और आपरेशनों के बाद पट्टी आदि के पैसा नहीं था।उसका भाई जयेश घर पर ही उसके पट्टियां करने लगा, जिससे वह खुद इंफेक्शन का शिकार हो गया।शरीर में इंफेक्शन इतना फैला कि उसका भी आपरेशन करवाना पड़।उसकी रीढ की हड्डी में हमेशा के लिए विकार हो गया।
देविका ने बताया -इतनी मात्र दुश्वारियां नहीं थीं। उससे स्कूल में एडमिशन लेने में बडी परेशानी आने लगी।मुंबई में रहने के लिए कोई खोली नहीं देना चाहता।अगर खोली मिलती थी तो उसका भाडा बहुत ज्यादा मांगा जाता।उसके पिता ड्राई फ्रूट बेचने का छोटा-मोटा काम करते थे, वह बंद हो गया।उसका बडा भाई भरत एक दिन अचानक गायब हो गया। बहुत बाद में पता चला वह पुणे में है।देविका ने बताया कि वे किसी रिश्तेदार के पास नहीं जा सकते।सुमेरपुर अपने गांव गई तो उसके परिवार वालों को गांव में ज्यादा दिन रूकने से मना कर दिया।वे कहीं बाहर जाते हैं तो होटल में रूकना पडता है, रिश्तेदार -जानकर इसलिए नहीं अपने पास ठहराते कि कहीं आतंकवादी उन्हें निशाना ने बना लें।इन सब कारणों से उसके परिवार पर बडा कर्जा चढ गया। अपनी बहादुरी और हौंसल की देविका जब यह सचाई बयां कर रही थी,मंचासीन अतिथियों व उपस्थिति लोगों की आंखें नम हो गईं। देविका ने बताया कि जब उसने पहली बार अदालत में तीन जनों के बीच खडे किए पाकिस्तानी आंतकी कसाब को पहचानते हुए गवाही दी, उसके परिवार को धमकियां मिलने लगीं।पापा के पास कभी हैदराबाद से तो कभी पाकिस्तान से धमकी भरे फोन आने लगे। पापा कभी डरे नहीं, बल्कि हिम्मत बढाते रहे। मुंबई आंतकी हमले की सुनवाई हाइकोर्ट, सर्वोच्च न्यायालय से होते हुए राष्ट्रपति के यहां दया याचिका तक पहुंची, पापा और मैं बिना किसी डर के अपनी गवाही पर कायम रहे।हमें से मुकर जाने के लिए 25 करोड़ तक लालच दिया। रिश्तेदारों ने हमे समझाया कि इतने रूपयों से उनकी जिंदगी बदल जाएगी, लेकिन वे देशहित और सचाई के साथ रहे। देविका ने बताया कि जब पिछले वर्ष 26/11 की बरसी पर एक समाचार पत्र ने उनके परिवार की दयनीय हालात का समाचार छापा,तब सरकार ने उनकी सुध ली। महाराष्ट्र सरकार ने दस लाख रुपए दिए। कुछ और लोगों व संस्थाओं ने मदद की।इससे उन्होंने कर्जा उतारा।अभी भी जिंदगी बडी मुश्किल से गुजर रही है। टीबी की वजह से उसकी पढाई छुट गई, इलाज होने के बाद पिछले वर्ष उसने दसवीं में एडमिशन लिया।अभी दसवीं के पेपर दिए हैं। बीमारी न होती तो वह आज सैकिंड इयर में होती। देविका ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान चला रहे हैं लेकिन उनके पास देश की इस बेटी से मिलने के लिए समय नहीं है। वह प्रधानमंत्री से मिलने के लिए लगातार प्रयासरत।ई-मेल व पत्र भेजे कोई जवाब नहीं आया। पीएम मोदी से वह क्या चाहती? के सवाल पर देविका ने कहा- यह एक सरप्राइज है,वह अभी नहीं बताना चाहती।अलबत्ता देविका ने कहा कि उसके परिवार के रहने की अच्छे से व्यवस्था हो जाए तो वह ठीक से पढाई पर पूरी कर पुलिस आफिसर बनने का सपना पूरा कर पाएगी। आगे की पढाई जयपुर या श्रीगंगानगर में रह कर पूरा करने की देविका ने इच्छा व्यक्त की।
ओबामा ने किया था वायदा समारोह में देविका पिता नटवरलाल ने 26/11 के हमले से लेकर कसाब को फांसी होने तक वृतांत सुनाते हुए बताया कि कसाब को फांसी होने के बाद न जाने कहां कहां से उनके पास दुनिया भर से फोन आए। वर्ल्ड मीडिया में देविका की गवाही से कसाब को फांसी होने की खबर छा गई। आंतकवाद के खिलाफ लड़ रहे देशों,खासकर अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा तक ने देविका से बात की।तब देविका ने ओबामा से खतरनाक आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को खत्मकरने की बात कही। नटवरलाल ने बताया कि इस पर ओबामा ने 6महीने में लादेन को खत्म करने का वायदा किया,अमेरिकी सेना ने उसे दो महीने में मार डाला। इसके बाद अफजल गुरु व मेमन फांसी चढाए गए। मुंबई के 26/11 हमले का मास्टर माइंड सईद हाफिज अभी जिंदा हैं। भारत, अमेरिका या फिर कोई और देश, उसका भी इलाज करें श्रीगंगानगर ने लिया दायित्व तपोवन ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस नागरिक अभिनंदन समारोह में देविका की आगे की पढाई, उसे आत्मनिर्भर बनाने और यहां तक की उसकी शादी करने तक दायित्व श्रीगंगानगर की संस्थाओं द्वारा लिए जाने की घोषणा की गई। इसके लिए शहर की लगभग दो दर्जन व्यापारिक, सामाजिक व धार्मिकसंस्थाओं ने सहयोग करने का निर्णय किया है। देविका राजस्थान में आगे की पढाई जहां भी करना चाहती, उसका सारा खर्च यह संस्थाएं वहन करेंगी। देविका ने कहा कि दसवीं का रिजल्ट आने के बाद वह फैसला करेगी कि जयपुर में पढना है या श्रीगंगानगर में। यह तय है वह अब राजस्थान में रहेगी।
सम्मान,सहयोग और उपहार बेटियों को मौका दीजिए मीडिया से बातचीत में देविका ने कहा कि समाज को बेटियों के प्रति सोच बदलनी चाहिए। बेटियों को मौका देकर देखिए किसी से कम नहीं। लडकियां क्या पहनती,क्या खाती,कहाँ जाती आती हैं, यह सब और भेदभाव को छोडकर समाज अपना नजरिया बदल कर देखे।सोच बदलेगी तो देश बदलेगा।अपना जिक्र करते देविका ने कहा कि उसने माँ को बारह वर्ष पहले खो दिया था।पापा ने मां की कमी महसूस नहीं होने दी, लेकिन वे माँ के प्यार की कमी को समझती हैं।उन्होंने कहा कि लडका लड़की के भेदभाव को खत्म कीजिए। यह दोनों एक दूसरे के पूरक है। लडकी है तो जीवन जिंदगी आगे बढाने का अधिकार है।
सम्मान, सहयोग और उपहार
समारोह में देविका और उसके परिवार का सामूहिक नागरिक अभिनंदन किया गया। साथ ही करीब डेढ़ दर्जन संस्थाओं एवं महानुभावों की ओर से अलग अलग सम्मानित किया गया। अनेक लोगों ने नगद आर्थिक सहयोग प्रदान किया। रोटावन परिवार की लोगों ने दिल् खोलकर सहायता की।समाजसेवी अशोक चांडक ने पांच वर्ष तक हर महीने 11 हजार देने की घोषणा की।डा.पीयूष राजवंशी ने देविका को लैपटॉप भेंट किया।कुम्हार समाज की महिलाओं ने आर्थिक सहायता के साथ चांदी की कृपाण भेंट की जिसे देविका ने तपोवन ट्रस्ट अध्यक्ष महेश पेड़ीवाल को यह कहते हुए सौंप दी कि वह जब आगे पढाई करके कुछ बन जाएंगी, तब इसे लेंगी। देविका ने कहा कि श्रीगंगानगर जितना मान सम्मान और स्नेह उन्हें कहीं नहीं। उसका परिवार मान सम्मान से अभिभूत हो गया। यह परिवार कल रात को वापिस जाएगा। दो दिन तक कई कार्यक्रमों में शिरकत करेगा।
समारोह में उपस्थिति इस समारोह में विधायक कामिनी जिंदल, पूर्व मंत्री गुरमीत सिंह कुन्नर, पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल, महेश पेड़ीवाल, जमींदारा पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष उदयपाल झाझडिया,आरएसएस की प्रांतीय कार्यकारिणी में विशेष आमंत्रित सदस्य कैलाश भसीन, जयपुर में सरकारी अधिवक्ता सुरेंद्र जलंधरा ने विचार व्यक्त किए। देविका, उनके पिता नटवरलाल व भाई जयेश की हिम्मत की तारीफ की। इस परिवार की हर संभव सहायता का वादा किया।सभापति अजय चांडक, यूआईटी चेयरमैन संजय महीपाल, पार्षद मनीराम स्वामी,पूर्व पार्षद लवीना वर्मा, भाजयुमो जिला अध्यक्ष गुरूवीरसिंह बराड़, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की संयोजक अंजू सैनी, मोहनलाल चितलांगिया, भाजपा अजा जजा मोर्चा के जिलाध्यक्ष ओमी नायक आदि गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। गायिका शिवानी कश्यप,गायक आकाश डोडा ने देश भक्ति के गीत सुनाए। मंच संचालन सामाजिक कार्यकर्ता निर्मल जैन किया।

 

 

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