मानसिक रोग, दस मिनट व्हाट्सएप नहीं खोलो तो बढऩे लगती है बेचैनी

 

डिजिटल मीडिया ने दिमाग पर इस कदर असर डाल दिया है कि यदि दस मिनट तक मोबाइल पर व्?हाट्सएप या फेसबुक को चेक नहीं करो तो लोगों में बेचैनी बढऩे लगती है। यह मानसिक रोग है। लोग इस कदर पीडि़त हो चुके हैं कि इलाज कराने अस्पताल पहुंच रहे हैं। यह बात मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में आयोजित कार्यशाला में मुंबई से आए मनोचिकित्सक डॉ.अविनाश डिसूजा ने कही।मेडिकल कॉलेज में डिजिटल मीडिया एंड मेंटल हेल्थ पर आयोजित कार्यशाला में डॉ. अविनाश डिसूजा ने कहा कि डिजिटल मीडिया ने लोगों के दिमाग पर कब्जा कर लिया है। लोग इसके एडिक्ट हो चुके हैं।

दिमाग पर ऐसे हो रहा है असर

– वीडियोगेम खेलते हुए लेवल को पार करने की धुन में डिप्रेशन हो रहा है।
– सेल्फी लेने का ऐसा एडिक्शन है कि एक दिन में कम से कम आठ से दस बार सेल्फी लेकर उसे फेसबुक, व्?हाट्सएप , इंस्?टाग्राम आदि पर अपलोड किया जा रहा है। इसके बाद उसमें यह देखा जा रहा है कि कितने लोगों ने उसे लाइक किया। जो लाइक नहीं कर रहा है उससे उसके संबंध खराब हो रहे हैं।
– व्यक्ति अकेलेपन की ओर जा रहा है। एक ही परिवार में कई सदस्य साथ रहते हुए भी एक दूसरे से बात नहीं कर रहे, बल्कि वे सोशल मीडिया में बात कर रहे हैं।
ये हो रहा नुकसान
– दिमाग के काम करने की क्षमता कम हो रही है।
– डिप्रेशन बढ़ रहा है।
– काल्पनिक दुनिया में व्यक्ति जीवन व्यतीत कर रहा है।
– डिप्रेशन से व्यक्ति का काम प्रभावित हो रहा है।

इलाज की पड़ रही आवश्यकता

डॉ. अविनाश डिसूजा ने बताया कि अस्पताल के मनोरोग विभाग में इस तरह के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। पहले यह मरीज नहीं थे, लेकिन डिजिटल मीडिया जैसे-जैसे फैला है ये बढऩे लगे। लोग अकेलेपन से घबराहट, डिप्रेशन की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। वे दिमाग में थकावट भी महसूस करते हैं। इनके इलाज के लिए काउंसलिंग के साथ ही धीरे-धीरे इन्हें सोशल मीडिया से दूर रखा जाता है। इसके अलावा दवाएं भी दी जाती हैं।

लिमिट में करें उपयोग

डॉ. अविनाश डिसूजा ने कहा कि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप डिजिटल मीडिया का उपयोग बंद कर दें। इसका उपयोग करें क्योंकि यह आज की आवश्यकता है, लेकिन लिमिट में करें ताकि यह आप पर हाबी न हो सके।
ये थे उपस्थित- कार्यक्रम में डीन डॉ. नवनीत सक्सेना, अधीक्षक डॉ. राजेश तिवारी, मनोरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. पीके जोयल, सहप्राध्यापक डॉ. ओपी रायचंदानी, डॉ. वायआर यादव, डॉ. कविता सचदेव, डॉ. बीके गुहा, डॉ. रत्नेश कुरारिया, डॉ. मोनिका कपूर व अन्य डॉक्टर्स उपस्थित थे।

 

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