शिक्षा संकुल में ई-स्टूडियो का होगा शुभारंभ

शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी के मुख्य आतिथ्य में होगा समारोह

जयपुर, 13 सितम्बर (का.सं.)। राज्य स्तरीय हिन्दी दिवस समारोह शुक्रवार को स्थानीय जवाहर कला केन्द्र के रंगायन सभागार में प्रात: 11 बजे राज्य के शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित किया जाएगा। भाषा एवं पुस्तकालय विभाग के निदेशक अशफाक हुसैन ने बताया कि समारोह की अध्यक्षता शिक्षा विभाग के प्रमुख शासन सचिव नरेशपाल गंगवार करेंगे जबकि समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरूक्षेत्र के कुलपति प्रो. कैलाश शर्मा और वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग, भारत सरकार के अध्यक्ष प्रो. अवनीश कुमार भाग लेंगे। इस अवसर पर पैसेफिक विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलपति प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा मुख्य वक्ता के बतौर संबोधित करेंगे। समारोह में भाषा एवं पुस्तकालय विभाग द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान दिए जाने के साथ ही विभाग की पत्रिका ‘भाषा परिचय के विशेषांक का लोकार्पण भी होगा।
शिक्षा संकुल में दोपहर 3 बजे ई-स्टूडियो का होगा शुभारंभ
शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी शिक्षा संकुल स्थित राजीव गांधी भवन में शुक्रवार को दोपहर 3 बजे ई-लर्निंग स्टूडियो का शुभारंभ करेंगे। देवनानी ने बताया कि मुख्यमंत्री मती वसुन्धरा राजे की बजट घोषणा की पालना में विभाग द्वारा शिक्षा संकुल में 1 करोड़ 44 लाख 24 हजार रूपये की लागत से ई-लर्निंग स्टूडियो की स्थापना की गयी है। इसके जरिए विभागीय स्तर पर सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के जरिए सीखने और सिखाने को बढ़ावा मिलेगा।
हिन्दी दिवस पर प्रदेशवासियों को शुभकामनांए
शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी ने हिन्दी दिवस पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं एवं बधाई दी हैं। उन्होंने आज यहां जारी अपने संदेश में कहा कि हिन्दी ही वह भाषा है जो हमें एकसूत्र में पिरोए हुए हमारी एकता का आधार बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दी भाषा नहीं बल्कि हिंदुस्तान की संस्कृति है। उन्होंने हिन्दी दिवस पर हिन्दी में विज्ञान, प्रबन्ध और तकनीकी विषयों पर अधिकाधिक लेखन किए जाने पर जोर देते हुए कहा कि हिन्दी का विकास ही हम सभी का लक्ष्य होना चाहिए।देवनानी ने कहा कि हिन्दी संस्कारों की भाषा है और विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा के रूप में अब यह स्थापित हो रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हिन्दी विश्व की संपर्क भाषा होगी, इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होनी चाहिए।

 

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