तीसरी तिमाही में सात फीसदी पहुंचेगी आर्थिक विकास दर, आज आंकड़े जारी करेगी सरकार

नई दिल्ली। वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही में आर्थिक विकास दर सात प्रतिशत पहुंच सकती है। वित्तीय संस्था मार्गन स्टैनली और 35 शीर्ष अर्थशास्त्रियों ने सोमवार को यह अनुमान जारी किया है। इससे सरकार उत्साहित दिखी और बाजार में उछाल आया। सरकार मंगलवार को आर्थिक प्रदर्शन के आंकड़े जारी करेगी। अगर अनुमान सही साबित होते हैं तो यह वर्ष 2017 में सबसे अच्छा आर्थिक प्रदर्शन होगा और इससे अर्थव्यवस्था के नोटबंदी और जीएसटी के प्रभावों से उबरते हुए दोबारा पटरी पर लौटने के संकेत दिए हैं। चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत तथा पहली तिमाही में 5.7 प्रतिशत रही थी। मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि हमारा अनुमान है कि आर्थिक सुधार को बढ़ावा मिला है और दिसंबर तिमाही में सालाना आधार पर जीडीपी वृद्धि दर सात प्रतिशत रहेगी। उसने कहा कि सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) के संदर्भ में वृद्धि दर सालाना आधार पर दूसरी तिमाही के 6.1 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर तीसरी तिमाही में 6.7 प्रतिशत रह सकती है। वहीं 35 शीर्ष अर्थशास्त्रियों के सर्वे के आधार पर बनी राय में विकास दर 6.9 फीसदी रहने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों की आय में भी दिसंबर तिमाही के दौरान सुधार हुआ है। वाहन एवं दोपहिया वाहनों की बिक्री भी इस दौरान तेजी से बढ़ी है। वस्तुओं के निर्यात की वृद्धि में भी दहाई अंकों में वृद्धि दर्ज की गयी है। गौरतलब है कि लगातार पांच तिमाही गिरावट के बाद जुलाई-सितंबर में पहली बार विकास दर ने बढ़ोतरी का रुख का रुख किया था और यह 6.3 फीसदी पर पहुंची थी। जबकि अप्रैल-जून की तिमाही में विकास दर तीन साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थी। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अर्थशास्त्री अभिषेक उपाध्याय ने कहा कि सरकारी खर्च बढऩे के साथ निजी उपभोग में तेज उछाल आया है। साथ ही ऑटो सेक्टर में भी बूम का असर दिख रहा है। सीमेंट और निर्माण क्षेत्र की अन्य धातुओं की खरीद में तेजी भी निर्माण, रीयल इस्टेट जैसे क्षेत्रों के नोटबंदी से उबरने का संकेत दे रही है।

सकारात्मक संकेत
– उपभोक्ता, कारोबार और सरकारी खर्च बढ़ा
– उद्योग एवं सेवा क्षेत्र में वृद्धि दर तेज
– कंपनियों की आय के बेहतर नतीजे
– वाहन-दोपहिया वाहनों की बिक्री बढ़ी
– निर्यात में भी 10 फीसदी से ज्यादा तेजी
कुछ थे पिछले आंकड़ें
– अक्तूबर-दिसंबर 16 – 7.1%
– जनवरी-मार्च 17 – 6.1 %
– अप्रैल-जून 17 – 5.7 %
– जुलाई-सितंबर 17 -6.3 %
– अक्तूबर-दिसंबर 17 – 6.9-7 %

बैंकिंग सेक्टर को लेकर चिंता
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकारी बैंकों का एनपीए तेजी से बढ़ रहा है और इसे समय रहते नहीं संभाला गया तो आर्थिक गतिविधि पर असर दिखेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकों की बैलेंस शीट सुधरने में समय लगेगा। रॉयटर्स के सर्वे में जीवीए 6.1 से बढ़कर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
रिजर्व बैंक को भी राहत मिलेगी- अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ब्याज दर स्थिर रहने के बाद भी विकास दर में बढ़ोतरी से रिजर्व बैंक को राहत मिलेगी, क्योंकि उस पर महंगाई को काबू में रखने के साथ जीडीपी बढ़ाने का दोहरा दबाव है। खुदरा महंगाई के जनवरी में 17 माह के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के कारण केंद्रीय बैंक के पास फिलहाल ब्याज दरों में कमी का कोई रास्ता नहीं है। अगस्त से ब्याज दर नहीं बदली हैं।

 

 

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