शिक्षा समाज आश्रित बने, भामाशाह समाज के प्रेरक-मेघवालराज्य स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह आयोजित

जयपुर, 28 जून (का.सं.)। विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने कहा है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में वैचारिक प्रवाह जरूरी है। उन्होंने शिक्षा को राज्याश्रित की बजाय समाज आश्रित किये जाने, शिक्षा को स्वतन्त्र चेतना के रूप में विकसित किये जाने तथा शिक्षित बेरोजगारी की मानसिकता पर गहरे से चिंतन किये जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा को सर्वव्यापी किये जाने, उसकी स्वतन्त्र चेतना के लिए भामाशाह बड़ा सहयोग कर सकते हैं। मेघवाल गुरूवार को यहां बिड़ला सभागार में राज्य स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में इस बात पर चिंतन होना चाहिए कि कैसे समग्र शिक्षा में सभी को रोजगार मिले। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप को भामाशाह ने तब अपना सर्वस्व अर्पण किया था जब मेवाड़ को उसकी सर्वाधिक आवश्यकता थी। उन्होंने राज्य में शिक्षा क्षेत्र में सहयोग करने वाले भामाशाहों और प्रेरकों का अभिनन्दन करते हुए कहा कि धन की महिमा पूण्य और कल्याणार्थ कार्यों में ही है। उन्होंने कहा कि कभी हमारे यहां आर्याव्रत नाम का भू-भाग था और उसमें शिक्षा, चिकित्सा समाज से जुड़े थे। उन्होंने शिक्षा के जरिये रोजगार की मानसिकता को बदले जाने का आह्वान किया।समारोह की अध्यक्षता करते हुए शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि भामाशाहों के सहयोग से राज्य में नालन्दा, तक्षशिला की तर्ज पर विद्यालय स्थापित किये जाने के प्रयास होंगे। उन्होंने कहा कि पिछले 23 सालों के मुकाबले इस बार भामाशाहों ने रिकॉर्ड शैक्षिक सहयोग किया है। समाज ऐसे सभी भामाशाहों के प्रति कृतज्ञ है। उन्होंने कहा कि कभी देश में 26 वें स्थान पर रहने वाला राजस्थान शैक्षिक विकासों से आज देशभर में दूसरे स्थान पर आ गया है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नेतृत्व में राजस्थान निरन्तर शिक्षा में विकास कर रहा है। देवनानी ने कहा कि गुणवत्ता, संस्कार हमारी शिक्षा का प्रमुख आधार हैं। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में हुए कार्यों की चर्चा करते कहा कि 9वीं की 11 लाख बालिकाओं को राज्य सरकार ने साइकिलें वितरित की हैं। कभी 44 हजार बालिकाओं को ही गार्गी पुरस्कार मिलता था, आज 1.5 लाख बालिकाओं को गार्गी पुरस्कार मिलने लगा है। शिक्षा में सुधारों से ही यह सब संभव हो सका है। उन्होंने कहा कि राज्य के विद्यालय निरन्तर उत्कृष्ट हो रहे हैं।आज प्रदेश में 25 हजार से अधिक विद्यालय फाइव स्टार श्रेणी के हैं। मुख्यमंत्री मती राजे की पहल पर रिकॉर्ड 7 हजार 500 विद्यालय क्रमोन्नत किये गए हैं। प्रत्येक विद्यालय में भारत दर्शन गलियारा बनाया जा रहा है। शिक्षा में सहयोग के अंतर्गत ज्ञान संकल्प पोर्टल में 31 करोड़ का सहयोग राज्य को मिला है। उन्होंने कहा कि निस्वार्थ भाव से शिक्षा में दान देने वाला इन्शान नही देवता कहलाता है। शिक्षा विभाग के प्रमुख शासन सचिव नरेश पाल गंवार ने बताया कि विभाग पिछले 23 सालों से राज्य स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह आयोजित करता आ रहा है। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र के विशिष्ट भामाशाहों की चर्चा करते कहा कि समाज उनके योगदान से ही निरन्तर आगे बढ़ रहा है। समारोह में निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा श्याम सिंह राजपुरोहित, निदेशक माद्यमिक नथमल डिडेल, सर्व शिक्षा अभियान आयुक्त डॉ. जोगाराम, माध्यमिक शिक्षा अभियान राज्य निदेशक शिवांगी स्वर्णकार, विशिष्ट सचिव अशफाक हुसेन सहित बड़ी संख्या में अधिकारी उपस्थित थे। इस मौके पर 117 भामाशाहों और 50 प्रेरकों को सम्मानित किया गया। समारोह में भामाशाह प्रशस्ति पुस्तिका का भी विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल और शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने लोकार्पण किया।

 

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