खोखली है देश की शिक्षा प्रणाली, मैं चीटिंग करके पास हुआ था इमरान

आमतौर पर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सितारे किसी भी मुद्दे पर कोई बयान देने से बचते नजर आते हैं, लेकिन जब किसी खास विषय पर उनकी कोई फिल्म रिलीज़ होती है, तब वह उस मुद्दे पर वह खुलकर बात करते हैं। इन दिनों अभिनेता इमरान हाशमी भी देश की शिक्षा प्रणाली पर तैयार अपनी फिल्म चीट इंडिया के प्रमोशन में जुटे हैं और देश की शिक्षा प्रणाली को खोखला बता रहे हैं।एक दशक तक बॉलिवुड में अपनी किसर बॉय इमेज के दम सफल रहे अभिनेता इमरान हाशमी पिछले काफी समय से एक हिट फिल्म के लिए तड़प रहे हैं। इमरान लगातार अपनी 10 फ्लॉप फिल्मों के बाद, फिर से हाजिर हैं नई फिल्म चीट इंडिया के साथ। चीट इंडिया का ट्रेलर सामने आ गया है, इस मौके पर इमरान ने हमसे बातचीत में देश की शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था बेहद खोखली है, इसे शुरू से बदलना होगा।
पढ़ाई के दौरान आपने कभी नकल की है?
मैंने सचमुच सिर्फ एक बार ही नकल की है। वैसे तो मैं फिल्मों में काम करता हूं, लेकिन एक बार जब मैं अर्थशास्त्र की परीक्षा देने वाला था… तब दुर्भाग्य से मैंने कोई तैयारी नहीं की थी और हमारे परीक्षा हॉल में जो निरीक्षक थे, उन्होंने हम सभी से कहा कि वह जानते हैं कि किसी भी छात्र की तैयारी नहीं हुई है तो सबके पास मात्र 40 मिनट हैं, उसके बाद दूसरे निरीक्षक आ जाएंगे, 40 मिनट में जितना कॉपी (नकल) करना है कर लो। मैंने उस दिन अर्थशास्त्र की परीक्षा नकल करके पास की, मुझे 75त्न मार्क्स मिले। मैं यह बताते हुए बिल्कुल भी गर्व महसूस नहीं कर रहा हूं। मैं जानता हूं कि कॉपी करना गलत बात है।
एक बार की बात है मेरे दोस्तों को परीक्षा के ठीक 2 दिन पहले एक मिडिल मैन मिला जिसने सबसे पैसे लेकर गणित का पेपर दे दिया, सभी छात्रों ने उसी पेपर की तैयारी की, जब परीक्षा देने गए तो पता चला वह पेपर था ही नहीं, सारे के सारे 20 लोग फेल हो गए। तो ऐसी भी चीजें होती हैं।
देश की शिक्षा प्रणाली पर क्या कहेंगे?
हमारे देश की जो शिक्षा व्यवस्था है, वह है ही ऐसी जिससे बच्चे नकल करने पर मजबूर होते हैं। शिक्षा प्रणाली बेहद खोखली है। बच्चों पर जो मार्क्स, ग्रेट और युनिवर्सिटी की सीट्स का प्रेशर आता है, इन प्रेशर की वजह से बच्चे चीट करते हैं। मैं यह नहीं कहता कि चीटिंग जस्टिफाइड है, लेकिन एक तरह से यह जस्टिफाइड भी है… क्योंकि बच्चों को प्रेशर का सामना करना पड़ता है। अगर यह प्रेशर नहीं होता, हम सिर्फ लर्निंग, चीजों को समझने और क्रिऐटिविटी के प्रॉसेस में ज्यादा ध्यान देते तो, इन सबका फायदा बच्चों को आगे की लाइफ में होगा, यह सारी चीजें इतनी बुरी नहीं होती।
शिक्षा प्रणाली में किस तरह के बदलाव की जरूरत होनी चाहिए?
शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बदलना होगा, इसे बदलने के लिए बहुत मेहनत करनी होगी, आसान नहीं है… जमी-जमाई शिक्षा व्यवस्था को बदलना। हमारे यहां रट्टा मरने का जो सिस्टम है, उसे पूरी तरह बदलना बहुत ही ज्यादा जरूरी है। पहले हम बच्चों पर रट्टा मारने का प्रेशर बनाते हैं, लेकिन नौकरी ढूंढ़ते समय यह रट्टा मारना काम नहीं आता है। यह बिना वजह का प्रेशर है, जिसकी वजह से हर घंटे बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं। होमवर्क एक बहुत बुरी चीज है, मेरी यह बात सुनकर बहुत लोग सोचेंगे कि मैं क्या बोल रहा हूं, लेकिन यह होमवर्क देने का प्रावधान भी बंद होना चाहिए। इस मामले में मैं फिनलैंड का उदाहरण दूंगा, वहां बच्चों को होमवर्क देने का प्रावधान बिल्कुल भी नहीं है और इस समय फिनलैंड की शिक्षा व्यवस्था को दुनिया में नंबर 1 शिक्षा प्रणाली का स्थान प्राप्त है। उन्होंने रिसर्च, केस स्टडी और प्रॉब्लम सॉल्व करने पर ज्यादा जोर दिया है। वह प्रैक्टिकल और क्रिएटिव नॉलेज पर अधिक ध्यान देते हैं। हमारे यहां के सिस्टम में यह सब बातें नहीं हैं। मेरे हिसाब से सरकार को डिफेन्स से ज्यादा खर्चा शिक्षा प्रणाली में करना चाहिए, मैं मानता हूं डिफेन्स बहुत जरूरी है, शिक्षा भी उतना ही जरूरी है, शिक्षा से एक नई पीढ़ी का विकास होता है।
आपकी अपनी पढ़ाई के दौरान और अब जब आपका बेटा पढ़ाई कर रहा है, निजी जिंदगी में शिक्षा व्यवस्था का अनुभव कैसा रहा?
मुझे भी अपने बेटे को लेकर यह डर और चिंता रही है कि बेटे को किस बोर्ड की शिक्षा में डालना है। अलग-अलग बोर्ड बनें हैं, हमने बड़ी मुश्किल होता है, यह सब चुनाव। मेरे माता-पिता के लिए भी यह चुनाव उतना ही मुश्किल था। मैं जब 10वीं में 69त्न के साथ पास हुआ तो मुझे साइंस में जाना था, लेकिन साइंस का कट ऑफ 80त्न था, इस दौरान मेरे घर में सभी को बहुत टेंशन थी। हालांकि बात में कम प्रतिशत होने के कारण मैं साइंस नहीं ले पाया, मैंने कामर्स की पढ़ाई की। इमरान हाशमी की फिल्म चीट इंडिया में देश की खोखली शिक्षा व्यवस्था की दशा को दिखाया गया है। फिल्म में इमरान निगेटिव भूमिका में हैं। सौमिक सेन के निर्देशन में तैयार इस फिल्म के निर्माता अतुल कस्बेकर और भूषण कुमार (टी सीरीज) हैं। यह फिल्म अगले महीने 25 जनवरी को देशभर के सिनेमाघरों में एक साथ रिलीज़ होगी।

 

 

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