पैराशूट कमांडो ने दुश्मन के इलाके में बोला धावा

महाजन फील्ड रेंज में तपते रेतीले धोरों में युद्धाभ्यास -विजय प्रहार

श्रीगंगानगर, 4 मई (का.सं.)। महाजन फील्ड रेंज में तपते रेतीले धोरों के बीच चल रहे युद्धाभ्यास -विजय प्रहार- में शुक्रवार को सेना की सप्त शक्ति कमान ने अपने जौहर दिखाते हुए पैराशूट के जरिये दुश्मन के इलाके में उतरकर धावा बोलते हुए उनके मुख्यालय को नष्ट कर दिया। दुनिया की सर्वश्रेष्ठ विशेष बलों में शुमार सप्त शक्ति कमान के सौ से अधिक सुप्रशिक्षित पैराशूट कमांडो को दुश्मन के इलाके में करीब चार किलोमीटर की ऊंचाई से उतार दिया गया। करीब साढ़े तीन किलोमीटर पत्थर की तरह गिरने के बाद उन्हें पैराशूट खोलने के निर्देश थे, जिससे वे लक्षित स्थान पर ही उतर सकें। घुप अंधेर में वे भूत की तरह दुश्मन के इलाके में उतर गये और अचानक हमला करके उन्हें इतना स्तब्ध कर दिया कि वे जवाब भी नहीं दे पाये। हालांकि वे संख्या में अधिक थे लेकिन जाम्बाज जवान दुश्मन सैनिकों का मुख्यालय सहित सफाया करके जिस गति से आये थे, उसी गति से अंधेर में गायब हो गये। लौटते समय उनके पास हवाई साधन नहीं थे। उन्हें खुद का बचाव करते हुए दुश्मन की निगाह में आये बिना लौटना था। देख लिये जाने का पूरा जोखिम था। गलती की कोई गुंजाइश नहीं। एक मामूली गलती जिंदगी का अंत करने के लिये पर्याप्त थी। रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि विशेष बलों के लड़ाकू अभियान त्रूटिहीन और बेहद जोखिम भरे होते हैं, इसमें गलती की कोई गुंजाइश नहीं होती। एक मामूली गलती की कीमत जीवन देकर चुकाना पड़ती है। ये विशेष कमांडो है जिन्होंने डरना नहीं सीखा। आज के अभ्यास में इन कमांडो ने अपनी धार को और पैना किया।दुश्मन के ठिकाने पर जबरदस्त हमला लगभग 45 डिग्री सेल्सियस तापमान में चल रहे युद्धाभ्यास में वायुसेना के अत्याधुनिक हथियारों से युक्त हेलीकोप्टरों और थलसेना के टैंकों के समन्वित हमले से दुश्मन के ठिकाने को नेस्तनाबूद करने का अभ्यास किया गया। सेना के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि युद्धाभ्यास में पहली बार सप्तशक्ति कमान के एयर कैवेलरी को शामिल किया गया। इसके तहत थल सेना के जवान, बख्तरबंद टुकड़ी, टैंकों के साथ अत्याधुनिक हथियारों से युक्त हेलीकोप्टरों ने बेहतर तालमेल के साथ दुश्मन के ठिकाने पर हमला बोलकर आक्रामक अभियानों का अभ्यास किया। रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि मौजूदा युद्धों में दुश्मन की हर गतिविधियों पर नजर रखते हुए रणनीतियां बनाई जाती हैं। परिष्कृत हथियार प्रणाली से युक्त लड़ाकू हेलीकॉप्टरों ने रणक्षेत्र में युद्ध के आयाम बदल दिये हैं। इस तरह के हेलीर्कोप्टरों को धीरे धीरे सेना में शामिल किया जा रहा है। अल्ट्रा मॉर्डन सेंसर्स और उ’च क्षमता के हथियारों से युक्त हेलीकॉप्टर रण भूमि में कमांडर को निर्णायक, साहसिक और आक्रामक निर्णय करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। प्रवक्ता ने बताया कि तकनीक के मौजूदा दौर में लड़ाकू हेलीकॉप्टरों और बख्तरबंद, हमलावर टुकडयि़ों के समन्वित प्रयास से ही जीत हासिल होगी। हालांकि इसके लिये उच्च दर्जे का समन्वय और सतत उन्नयन की जरूरत होगी। युद्धाभ्यास में उच्च स्तरीय रणनीति का अभ्यास किया गया, इससे सैनिकों ने आत्मविश्वास अर्जित किया है। सैनिकों का वाक्य सूत्र है- हथियारों के साथ हवा में चौकस आंखें, दुश्मन पर सतत निगाहें , दुश्मन के लिये अब छुपने के लिये जगह नहीं है। वे जितना चाहें दौड़ सकते हैं, लेकिन हम उन्हें तबाह कर देंगे। युद्धाभ्यास में 20 हजार से अधिक सैनिक भाग ले रहे हैं। इस युद्धाभ्यास में अत्याधुनिक बहुद्देशीय हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

 

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