आठ वर्ष बाद हो रहे हैं राजस्थान बार कौंसिल के चुनाव – 159 उम्मीदवार, 53 हजार वोटर, 252 बूथ

श्रीगंगानगर, 13 मार्च (नि.स.)। राजस्थान बार कौंसिल के आठ वर्ष बाद चुनाव हो रहे हैं। प्रथम वरियता के 25 सदस्यों को चुनने के इस चुनाव के लिए कुल 159 उम्मीदवार मैदान में हैं और 53 हजार से अधिक वोटर हैं। आगामी 28 मार्च को मतदान प्रदेश के सभी बार संघ कार्यालयों में बनाये गये बूथों पर होगा। प्रदेश में 252 बार संघ हैं। श्रीगंगानगर में भी इस दिन प्रात: 9 से सायं 5 बजे तक मतदान होगा। मतदान के पश्चात् मतपेटियों को जोधपुर ले जाया जायेगा, जहां 12 अप्रेल से मतगणना शुरू होगी। यह मतगणना लगभग सवा महीना चलने की सम्भावना है। निर्वाचित हुए 25 सदस्यों में से ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष व बार कौंसिल ऑफ इण्डिया के लिए एक सदस्य का चुनाव करेंगे। इस चुनाव को लेकर श्रीगंगागनर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के वकीलों में पिछले काफी समय से गहमागहमी चल रही है। श्रीगंगानगर जिला न्यायालय परिसर में हर दूसरे-तीसरे दिन कोई ना कोई उम्मीदवार वकीलों से जनसम्पर्क करने के लिए आ रहा है। वकीलों के साथ यह उम्मीदवार बैठकें भी कर रहे हैं। ऐसा ही माहौल जिले के दूसरे बार संघ कार्यालयों में है। वकीलों में इन चुनावों को लेकर काफी चर्चाएं हो रही हैं। पांच साल का होता है कार्यकाल बार कौंसिल ऑफ राजस्थान के अध्यक्ष पद का कार्यकाल पांच साल का होता है। पांच साल का कार्यकाल खत्म होते ही कौंसिल स्वत: ही भंग हो जाती है। नये चुनाव करवाने की प्रक्रिया इलेक्शन ट्रिब्यूनल ने शुरू करनी होती है, लेकिन इस बार यह प्रक्रिया तत्काल शुरू नहीं हो पाई। कौंसिल भंग होने के पश्चात् प्रदेश के एडवोकेट जनरल नरपतमल लोढ़ा को मनोनीत अध्यक्ष बना दिया गया। उनका भी यह कार्यकाल लगभग तीन वर्ष का होने को आया है। नये चुनाव की गहमागहमी पिछले वर्ष मार्च-अप्रेल में ही शुरू हो गई थी। कईं महीनों से लगे हैं जनसम्पर्क में सम्भावित प्रत्याशियों ने वकीलों से जनसम्पर्क कर उनके मानस को टटोलना शुरू कर दिया था। इस गहमागहमी में तब और तेजी आई, जब जनवरी में फाइनल वोटर लिस्ट जारी हुई और फिर 28 फरवरी को चुनाव लडऩे वाले 159 प्रत्याशियों की घोषणा भी कर दी गई। चुनाव लडऩे का पूरा मन बनाये हुए अधिवक्ता तो वोटर लिस्ट आने से पहले ही अपने प्रचार-प्रसार में जुट गये थे। चूंकि प्रदेश में 252 बार संघ है, लिहाजा मैदान में उतरे हुए सभी प्रत्याशी प्रत्येक बार संघ तक पहुंचने की जी-तोड़ कोशिश कर रहे हैं। इस कोशिश में उन्हें पूरे राजस्थान का ही भ्रमण करना पड़ रहा है। अनेक प्रत्याशी तो पिछले वर्ष मार्च-अप्रेल से ही चुनावी दौरे पर निकल पड़े थे। अब चूंकि मतदान में करीब 15 दिन ही बाकी बचे हैं। प्रत्याशियों ने अपनी भागदौड़ और भी तेज कर दी है। यह भी हैं चुनाव मैदान में राजस्थान बार कौंसिल के दो बार अध्यक्ष रह चुके, श्रीगंगानगर के वरिष्ठ अधिवक्ता नवरंग चौधरी तीसरी बार चुनाव मैदान में कूदे हैं। उनके अलावा श्रीगंगानगर से कोई वकील चुनाव नहीं लड़ रहा। हालांकि श्रीगंगानगर के मूल निवासी ज्ञानज्योति गुप्ता भी चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन वे जोधपुर हाईकोर्ट में ही वकालत करते हैं। साथ लगते हनुमानगढ़ जिले से जितेन्द्र सारस्वत इस बार चुनाव लड़ रहे हैं। हनुमानगढ़ जिले के ही मूल निवासी रमनदीप खरलियां और बलजिन्द्र सिंह संधू ही चुनाव लड़ रहे हैं। यह दोनों भी जोधपुर में ही वकालत करते हैं। श्री खरलियां जोधपुर हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता रहे हरदेव सिंह खरलियां के पुत्र हैं। हरदेव सिंह खरलियां दो बार राजस्थान बार कौंसिल में काउंसलर रहे थे। राष्ट्रपति जैसा चुनाव बार कौंसिल ऑफ राजस्थान का चुनाव देश के राष्ट्रपति को चुनने जैसा चुनाव है। यह चुनाव बिल्कुल राष्ट्रपति को चुनने वाले पैटर्न जैसा है। इसमें भी प्रथम वरियता के आधार पर वोटों की गिनती की जाती है। बार कौंसिल के चुनाव का मतपत्र काफी लम्बा-चौड़ा होता है। इस पर पूरे 159 प्रत्याशियों के नाम व चिह्न होंगे। प्रत्येक वोटर को अधिकतम 25 जनों केा अपनी पसंद की वरियता से इन पर मोहर लगानी होती है।लिहाजा एक वोट डालने में ही काफी वक्त लगता है। यही नहीं, मतदान होने के बाद मतपेटी को बड़ी सुरक्षा से जोधपुर इलेक्शन ट्रिब्युनल में पहुंचाया जाता है। वहां सभी बूथों से पेटियां पहुंचने के बाद मतगणना आरम्भ की जाती है। इस बार मतगणना 12 अप्रेल को शुरू होगी। बार कौंसिल ऑफ इण्डिया ने विशेष निर्देश दिये हैं कि इस बार मतों की गिनती प्रात: 10 से सायं 5 बजे के बीच ही होगी। पहले के चुनावों में रात को 10-10 बजे तक गिनती होती रही है। इस विशेष निर्देश के कारण इस बार मतों की गणना करने में ‘यादा दिन लगेंगे। अमूमन एक माह में गिनती पूरी हो जाती है, लेकिन इस बार दो महीने भी लग सकते हैं। दो मुख्य मुद्दे हैं छाये बार कौंसिल ऑफ राजस्थान के आठ वर्ष बाद होने जा रहे इस चुनाव में दो मुख्य मुद्दे छाये हुए हैं। पहले मुद्दे को लेकर तो युवा अधिवक्ता काफी गर्म हैं। यह मुद्दा है कि अभी तक बार कौंसिल ऑफ राजस्थान में अध्यक्ष रहे या काउंसलर चुने गये अधिवक्ताओं ने कभी भी अधिवक्ताओं के कल्याण सम्बंधी कोई ठोस नीति नहीं बनाई। अधिवक्ताओं के कल्याण का यह मुद्दा इस बार चुनाव का सबसे गर्म मुद्दा बन गया है। इस मुद्दे को हाल ही केरल में वकीलों के लिए सरकार द्वारा पांच हजारक ी मासिक पेंशन योजना लागू करने से ‘यादा हवा मिली है। इसी मामले को लेकर इस बार के चुनाव मेें दोबारा-तिबारा मैदान में कूदे हुए वरिष्ठ अधिवक्ताओं को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। दूसरा मुद्दा है- विधि महाविद्यालयों को मान्यता दिलाने का। मान्यता दिलाने में कथित रूप से भ्रष्टाचार के आरोप गर्माये हुए हैं। चुनाव लड़ रहे एक अधिवक्ता ने कहा कि यह बहुत ही संवेदनशील मामला है। इस पर कोई खुलकर नहीं बोलता, लेकिन अंदर की सगााई यह है कि विधि महाविद्यालयों को मान्यता दिलाने की ऐवज में बेशकीमती उपहार लिये जाते रहे हैं। न्यायिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार के सफाये के हामी ज्यादातर युवा विधायक हैं।

 

 

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