घर का किराया देने के पैसे भी नहीं थे मेरे पास

बॉलिवुड अभिनेत्री ईशा गुप्ता को आम तौर पर दर्शकों ने ग्लैमरस, हॉट और बोल्ड अवतार में ही देखा है। लेकिन टीवी रिऐलिटी शो ‘हाई फीवर: डांस का नया तेवर’ की जज के रूप में लोगों को उनकी इमोशनल साइड भी देखने को मिली। इस खास बातचीत में ईशा ने शो से जुड़े अनुभव, इंडस्ट्री में अपने संघर्ष, नेपोटिजम, आने वाली फिल्मों और क्रिकेटर हार्दिक पंड्या से रिश्तों पर बेबाकी से बात की:
आपको दर्शकों ने हमेशा बोल्ड और बिंदास रूप में ही देखा है। लेकिन हाई फीवर में आपका एक इमोशनल अवतार भी देखने को मिला। शो में आपका कैसा अनुभव रहा?
अनुभव बहुत अच्छा था। हां, मेरे लिए यह बहुत इमोशनल जर्नी रही है। रिऐलिटी शो में काम करते हुए सबसे एक परिवार जैसा रिश्ता बन जाता है। जब मैं कॉन्टेस्टेंट्स की जर्नी, उनके संघर्ष के बारे में सुनती थी, तो मुझे अपना स्ट्रगल याद आ जाता था। मैंने वे दिन देखे हैं, जब मेरे पास घर का किराया देने के पैसे नहीं होते थे। मुझे अपने दोस्त से उधार लेना पड़ता था। इसीलिए, मैं कॉन्टेस्टेंट्स से हमेशा बोलती थी कि भगवान ने आपकी तकदीर में जो लिखकर भेजा है, जो आपकी किस्मत में है, वह आपको मिलेगा ही। गॉडफादर की हर किसी को जरूरत नहीं होती। हालांकि, इसी वजह से मैं रिऐलिटी शोज को बहुत जरूरी मानती हूं। हमारे देश में इतना टैलंट है और ये शोज उस टैलंट को दिखाने का माध्यम बनते हैं, वरना आप यह टैलंट और कैसे दिखाएंगे?
वैसे, आपकी इमेज इतनी स्ट्रॉन्ग और बिंदास लड़की की है कि लगता ही नहीं कि आपने इतना स्ट्रगल भी झेला है?
मेरा मानना है कि अगर आप लोगों को अपने आंसू दिखाएंगे, तो वे खुश ही होंगे। इससे अच्छा है कि आप उन्हें अपनी खुशी दिखाओ और उन्हें खुश होने का मौका ही मत दो। इसीलिए, मैं अपने स्ट्रगल के बारे में ज्यादा बात नहीं करती, लेकिन मैं जानती हूं कि मैंने कितना कुछ झेला है। मेरी मॉम को कैंसर था, मैं अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर आई थी। मेरी जिंदगी के डेढ़ साल उसमें गए हैं। फिर मेरे फादर की तबीयत बीच में बहुत खराब थी। मैं यहां पर आई, लेकिन आज कम से कम मेरे मां-बाप खुश हैं कि उन्हें मेरे नाम से जाना जाता है। कोई यह नहीं बोल सकता कि अरे, ये इसकी बेटी है, इसलिए आगे बढ़ गई। मैं जहां पहुंची हूं, अपनी मेहनत से पहुंची हूं। बिंदास मैं हमेशा से रही हूं। उतार-चढ़ाव सबकी जिंदगी में होते हैं। मैं कई बार फ्रस्ट्रेट भी होती हूं, लेकिन मेरा मानना है कि रोने से होगा क्या/ नेगेटिविटी ही बढ़ेगी। मेरी मां कहती हैं कि लोग अपने दुखों से ज्यादा दूसरों की खुशी देखकर दुखी रहते हैं। मैं नहीं चाहती हूं कि कोई मेरा दुख देखकर खुश हो पाए। जो लोग चिढ़ते हैं, मुझे उन्हें चिढ़ाने में मजा आता है।
आपने कहा कि हर किसी को गॉडफादर की जरूरत नहीं होती, जबकि अपने पिछले इंटरव्यू में आपने मुझसे कहा था कोई गॉडफादर नहीं होने के कारण आपको बीच में कम फिल्में मिलीं?
मैं अब भी यकीन करती हूं कि अगर मेरे फादर इंडस्ट्री से होते थे, तो मैं रिक्शा में नहीं चलती। मैं भी बीएमडब्ल्यू में सफर कर रही होती। लोगों को लगता है कि नेपोटिजम नहीं है, लेकिन वह है। लोग भले कहें कि गॉडफादर की जरूरत नहीं है, लेकिन वह है। बहुत सी लड़कियों और लड़कों को इस वजह से काफी संघर्ष करना पड़ता है।
अपनी फिल्मों में आप ज्यादातर बोल्ड और ग्लैमरस किरदार में ही दिखी हैं। इस छवि से इतर कुछ अलग तरह के किरदार करना चाहेंगी?
मैं इंडस्ट्री में ज्यादा पुरानी नहीं हूं। मुझे सिर्फ 6 साल हुए हैं, लेकिन इंडस्ट्री में जो बड़े फिल्ममेकर्स हैं, उनके या तो अपने फेवरिट्स हैं या फिर वे आपको ज्यादा अलग रोल में नहीं देखना चाहते। फिर भी मैं कोशिश कर रही हूं। मैं एक इरानियन फिल्म कर रही हूं, डेविल्स डॉटर। यह फारसी और इंग्लिश में बन रही है। इसमें मेरा रोल एकदम अलग है। कपड़े ऐसे हैं कि आपका सिर तक ढका हुआ है। फिर, टोटल धमाल में भी काफी अलग रोल है। मेरे लिए यह फिल्म बहुत एक्साइटिंग है, क्योंकि एक तो इंदर (निर्देशक इंदर कुमार) सर के साथ काम करने का मौका मिला। इसके अलावा इसमें अनिल कपूर, अजय देवगन, माधुरी दीक्षित, बोमन इरानी, महेश मांजरेकर, जावेद जाफरी, अरशद वारसी जैसे कमाल के ऐक्टर्स हैं। मेरे लिए सबसे खास बात यह रही कि माधुरी मैम, जो डांसिंग क्वीन हैं, उनके साथ मैंने डांस किया। जब मैंने उनके साथ डांस किया, तो कहा कि मैम अब मैं तसल्ली से मर सकती हूं। मुझे नहीं लगता कि हमारे हिंदुस्तान में कोई दूसरी माधुरी दीक्षित कभी हो सकती है।
आप जेपी दत्ता की ‘पलटन’ भी कर रही हैं। उसमें क्या खास है?
‘पलटन’ में मेरा बहुत छोटा रोल है। वह फिल्म मैंने इसलिए की क्योंकि मुझे जेपी दत्ता सर के साथ काम करना था। उन्होंने ‘बॉर्डर’ बनाई थी, फिर ‘एलओसी कारगिल’ और अब यह फिल्म। यह फिल्म इंडो-चाइना युद्ध पर है। मेरे फादर एअरफोर्स में थे, तो वह इंडो-चाइना वॉर में हिस्सा रहे हैं। मुझे हिंदुस्तानी जज्बे को दिखाने वाली फिल्में बहुत अच्छी लगती हैं। इसीलिए, मैं अक्षय कुमार की भी बहुत कद्र करती हूं कि वह हिंदुस्तान के असली हीरोज पर फिल्में बना रहे हैं।
इन दिनों आपके और क्रिकेटर हार्दिक पंड्या के रिलेशनशिप के भी काफी चर्चे हैं। इन खबरों में कितनी सचाई है?
उतनी ही सचाई है जितना आपने पढ़ा। कहने के लिए लोग कुछ भी कहेंगे। कुछ भी लिखेंगे, लेकिन वह मेरी असलियत है, जो मुझे पता है। जिनके बारे में लिखा गया है, उन्हें पता है। लेकिन हम इस बारे में ना हां कर रहे हैं, न हम ना कर रहे हैं, क्योंकि मीडिया को जो लिखना है, वह लिखेगा ही।

 

 

 

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