‘एयरलाइंस के पास लौटी प्राइसिंग की ताकत

नई दिल्ली। प्राइम सिक्यॉरिटीज के मैनेजिंग डायरेक्टर एन जयाकुमार ने ईटी नाउ को दिए इंटरव्यू में कहा कि एविएशन सेक्टर के पास प्राइसिंग की ताकत वापस आ गई है क्योंकि विमान यात्रा लोगों की आदत में शामिल होती जा रही है।
इंडिगो के आंकड़े हैरान करने वाले हैं। इनसे एविएशन सेक्टर की ग्रोथ का अनुमान मिल रहा है लेकिन क्रूड एक बड़ी रुकावट है…
एविएशन सेक्टर ने जो ग्रोथ रेट हासिल की है, वह इकॉनमी की ग्रोथ के तरीके से पूरी तरह अलग है। कुछ महीनों में इसकी ग्रोथ 20-25 पर्सेंट रही है। कैपेसिटी बढऩे के साथ एयरलाइंस ने प्राइसेज ऐसे रखे थे, जिनकी तुलना दो स्थानों के बीच बस के सफर से भी की जा सकती थी और निश्चित तौर पर ये रेल किराए को टक्कर देते थे। अगर आप हवाई सफर करें तो आप देखेंगे कि कोई भी एयरपोर्ट ऐसा नहीं है, जहां भीड़ न हो। उदाहरण के लिए, कानपुर एयरपोर्ट अपनी क्षमता से चार गुना अधिक जरूरत पूरी कर रहा है। क्रूड प्राइसेज के बढऩे के बावजूद एयरलाइंस ने किराए में अधिक वृद्धि नहीं की। एयरलाइंस के पास अब प्राइसिंग की ताकत आ गई है क्योंकि हवाई सफर एक आदत बन गया है। अभी बहुत से लोग हवाई सफर उपलब्ध होने पर किसी अन्य जरिए को नहीं चुनते। दिल्ली-मुंबई रूट पर 10 वर्ष पहले इकॉनमी क्लास का टिकट 8,000-9,000 रुपये का था। छह महीने पहले आप इस रूट पर 3,500-4,000 रुपये में यात्रा कर सकते थे। अब रेट वापस 8,000-9,000 रुपये पर आ गए हैं। प्राइसिंग की ताकत लौट आई है। अप्रैल, मई में आप रेवेन्यू और यील्ड में अच्छी बढ़ोतरी देखेंगे, जैसी अभी तक नहीं देखी गई। लोड फैक्टर को 98 पर्सेंट पर रहने की जरूरत नहीं है। एयरपोर्ट अधिक लोगों को नहीं संभाल सकते। एयरलाइंस का लोड फैक्टर 95 पर्सेंट तक है। अब प्राइसिंग की ताकत हासिल करने की बारी है।
मार्केट अभी इंडिगो के आंकड़ों के आधार पर राय बना रहा है…
अभी बिक्री चल रही है। यह अच्छे शेयर्स खरीदने के लिए बेहतर समय है। मैं कोई सलाह नहीं दे रहा। एविएशन सेक्टर में उतरने के लिए बड़े स्तर पर बिक्री का इंतजार करें। तब आपके लिए प्रवेश करना अच्छा रहेगा।
क्या आप अपने पोर्टफोलियो में एविएशन को 8-10 पर्सेंट स्थान देंगे? दो, तीन कंपनियों के शेयर्स के साथ?
शायद इससे भी अधिक। यह खपत और उपभोक्ता पर केंद्रित सेक्टर है। एयरपोर्ट्स की कैपेसिटी बढ़ाई जा रही है, इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ रहा है और हवाई सफर का अनुभव बहुत अच्छा है। मैं रेलवे स्टेशन के बजाय एक एयरपोर्ट पर इंतजार करना पसंद करूंगा। एक तिमाही के नतीजों की बात न करें। मैं यह बताना चाहता हूं कि मेरे पास इंडिगो के शेयर्स नहीं हैं, लेकिन मेरे पास इस सेक्टर में शेयर्स हैं। मैं विशेष कंपनी के शेयर्स के बारे में बात नहीं करना चाहता और मुझे यह सेक्टर पसंद है।
इंडियन एविएशन सेक्टर की पहुंच ग्लोबल लेवल पर भी है। जेट की दुनियाभर में मौजूदगी है। इंडिगो और स्पाइसजेट भी विदेश में कुछ मौजूदगी रखती हैं। इनवेस्टमेंट के लिहाज से क्या अच्छा रहेगा? एक डोमेस्टिक कंपनी पर फोकस करना या एक एविएशन कंपनी पर नजर रखना जो आपको दोनों का मिश्रण देती है?
लोग अब विदेश में हॉलिडे पर देश में हवाई सफर करने की तरह ही जाते हैं। भारत में और विदेश में ट्रैवल बहुत अधिक बढ़ा है। इस वजह से पोर्टफोलियो में इन तीनों एविएशन कंपनियों को शामिल किया जा सकता है। आप इनमें से अपनी पसंद भी चुन सकते हैं। इसके लिए कैपेसिटी के इस्तेमाल, कॉस्ट या बेहतर अनुभव को देखा जा सकता है।

 

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