विमानन कंपनियों के किराया गणित की जांच-परख कर रहा है प्रतिस्पर्धा आयोग

नई दिल्ली। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (ष्टष्टढ्ढ) विमानन कंपनियों द्वारा यात्रा किराया तय करने के गणित (एल्गोरिदम) की जांच-परख कर रहा है। प्रतिस्पर्धा आयोग एयरलाइन कंपनियों द्वारा विमान किराये तय करने में कथित साठगांठ की जांच कर रहा है। सीसीआई के प्रमुख सुधीर मित्तल ने कहा कि इसी जांच के सिलसिले में किराया तय करने के गणित पर गौर किया जा रहा है। फिलहाल नियामक एक समान टिकट दर और एयरलाइंस द्वारा साथ-साथ किरायों में बढ़ोतरी की जांच कर रहा है। इनमें पिछले कुछ साल के मसलन हरियाणा में जाट आंदोलन और चेन्नै में बाढ़ के समय किरायों में बढ़ोतरी के मामले शामिल हैं। मित्तल ने कहा कि सीसीआई फिलहाल एयरलाइंस द्वारा कथित रूप से साठगांठ में किराया तय करने के कुछ मामलों की जांच कर रहा है। उन्होंने कहा कि हम एयरलाइंस द्वारा कीमत तय करने के तरीके को समझने का प्रयास कर रहे हैं। विमानन कंपनियां कहती रही हैं कि किरायों में समानता और किरायों में बढ़ोतरी उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सॉफ्टवेयर की वजह से है। सॉफ्टवेयर मांग आधारित कीमत निकालता है। मित्तल ने भाषा से इंटरव्यू में कहा कि जब तक हम इस मुद्दे की समीक्षा नहीं कर लेते हैं और इसका ब्योरा नहीं देख लेते हैं, हम इस पर अधिक कुछ नहीं कह पाएंगे। हाल के समय में त्योहारों और प्राकृतिक आपदा के दौरान किरायों में बढ़ोतरी के मामले सामने आए हैं। इस साल कुछ राज्यसभा सदस्यों ने एयरलाइंस में किराये की सीमा तय करने की वकालत की थी। वहीं सरकार कहती रही है कि विमान यात्रा किराया नियंत्रण मुक्त है। सीसीआई प्रमुख ने कहा कि जाट आंदोलन और चेन्नै में बाढ़ के दौरान विमानन कंपनियों के एक समान ऊंचे किरायों की जांच की जा रही है। जाट आंदोलन 2016 के शुरू में हुआ था जबकि चेन्नई में 2015 में बाढ़ आई थी।

 

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