एक्सर्साइज करने से आती है अच्छी और बेहतर नींद: स्टडी

अगर आप सोचते हैं कि एक्सर्साइज का संबंध सिर्फ आपके शारीरिक स्वास्थ्य से है तो आप गलत हैं। एक्सर्साइज और फिजिकल ऐक्टिविटी का संबंध आपकी नींद से भी है। अगर आप चाहते हैं कि रात में अच्छी नींद आए तो फिजिकल ऐक्टिविटी जरूरी है। यह बात तो आप जानते ही हैं कि एक्सर्साइज करना सेहत के लिए कितना जरूरी है। इससे हमारी शारीरिक और मानसिक सेहत बनी रहती है। लेकिन अब हम आपको बता दें कि एक्सर्साइज का संबंध सिर्फ आपके शारीरिक स्वास्थ्य से ही नहीं बल्कि नींद से भी है। जी हां, एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि वैसे किशोर (13-19 वर्ष) जो फिजिकल ऐक्टिविटी में शामिल होते हैं, वे एक्सर्साइज न करने वालों की तुलना में ज्यादा देर तक और बेहतर तरीके से नींद ले पाते हैं।
एक्सर्साइज करने पर रात में 10 मिनट ज्यादा सोते हैं
साइंटिफिक रिपोर्ट्स नाम के जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी में अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि वैसे किशोर जो हर घंटे कुछ ज्यादा कठोर शारीरिक गतिविधियां करते हैं वे रात के वक्त 18 मिनट जल्दी, 10 मिनट ज्यादा और 1 प्रतिशत बेहतर नींद ले पाते हैं। पेन स्टेट की डेटा साइंटिस्ट लिंडसे मास्टर कहती हैं, ‘अच्छी और बेहतर नींद के लिहाज से किशोरावस्था एक मुश्किल समय होता है क्योंकि इस दौरान teens  की नींद क्लासरूम परफॉर्मेंस, स्ट्रेस और इटिंग बिहेवियर की वजह से डिस्टर्ब रहती है। लिहाजा हमारी रिसर्च इसी बात पर जोर देती है कि अगर किशोरों को दिन के समय ज्यादा एक्सर्साइज करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए रात के वक्त उन्हें बेहतर नींद हासिल करने में मदद मिल सकती है।
दिन में निष्क्रिय रहने पर रात में आती है कम नींद
इस स्टडी के नतीजे इस बात की ओर भी इशारा करते हैं कि अगर दिन के वक्त किशोर गतिहीन और निष्क्रिय रहते तो रात के वक्त उन्हें सही तरीके से नींद नहीं आती। स्टडी में शामिल प्रतिभागी जब दिन के वक्त ज्यादा समय के लिए निष्क्रिय रहे तो वे रात के वक्त जल्दी तो सो गए और देर से उठे लेकिन ओवरऑल नींद उनकी कम समय के लिए रही। लिहाजा फिजिकल ऐक्टिविटी और नींद के बीच गहरा संबंध है।
15 साल की उम्र के 417 प्रतिभागियों को किया शामिल
इस स्टडी के लिए अनुसंधानकर्ताओं ने 417 प्रतिभागियों को शामिल किया था। जब ये प्रतिभागी 15 साल के थे उस वक्त उन्हें एक्सीलेरोमीटर्स दिए गए जो उनकी कलाई और हिप्स पर बांधे गए थे जो एक हफ्ते तक उनकी फिजिकल ऐक्टिविटी और नींद को नापने का काम कर रहे थे। इस स्टडी का उद्देश्य यही था कि प्रतिभागियों से उनके व्यवहार के बारे में पूछने की बजाए उनकी शारीरिक गतिविधि और नींद का सही और सटीक मेजरमेंट लिया जाए।

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