सुस्त पड़ा रेडीमेड कपड़ों का निर्यात, तेजी से बढ़ा आयात

मुंबई। भारत से तैयार कपड़ों के निर्यात में खास बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन इनका आयात तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2017-18 में सिलेसिलाए कपड़ो का कुल आयात 54.7 करोड़ डॉलर का था, जो 2018-19 में 52 प्रतिशत बढ़कर 83.1 करोड़ डॉलर का हो गया। कच्चे माल पर जीएसटी लगने के बाद से लागत बढऩे के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादकों को बहुत परेशानी आ रही है। इसके उलट चीन अपने सस्ते कपड़े बांग्लादेश भेजकर वहां रेडिमेड कपड़े तैयार करवाकर दुनियाभर में, खासतौर पर एशियाई देशों को निर्यात बढ़ाने में सफल रहा है।बांग्लादेश इस मामले में चीन को पीछे छोड़ते हुए भारत में सिलसिलाए कपड़ों का निर्यात करने वाला सबसे बड़ा देश बन गया है। भारत ने वित्त वर्ष 2017-18 में बांग्लादेश से 12.4 करोड़ डॉलर के रेडिमेड कपड़ों का आयात किया था, जो 2018-19 में 114 प्रतिशत बढ़कर 26.6 करोड़ डॉलर हो गया।इसके अलावा एक साल के दौरान हांगकांग से रेडिमेड कपड़ों का आयात 130 लाख डॉलर से 171 प्रतिशत बढ़कर 360 लाख डॉलर हो गया। इस दौरान ब्रिटेन से भी आयात 40 लाख डॉलर से 150 प्रतिशत बढ़कर 100 लाख डॉलर हो गया। चीन से आयात मामूली बढ़ा-भारत में सिलेसिलाए कपड़ो का निर्यात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश चीन है। वित्त वर्ष 2017-18 से लेकर 2018-19 के बीच वहां से आयात 22.3 करोड़ डॉलर से 9 प्रतिशत बढ़कर 24.4 करोड़ डॉलर हो गया।वास्तव में चीन से कपड़ा बांग्लादेश जाता है और बांग्लादेश में इनकी सिलाई होती है। फिर यही रेडिमेड कपड़े भारत आते हैं। बांगलादेश कोटा शुल्क फ्री देश है। इसके मुकाबले श्रीलंका से 80 लाख नग आयात की शीर्ष सीमा है। श्रीलंका से आयात 133 प्रतिशत बढ़ा है। बांग्लादेश में लागत कम-दी क्लोदिंग मेन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) के प्रमुख एवं इंटरनेशनल एपैरल फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष राहुल मेहता के मुताबिक भारत से कम टैक्स और सस्ते लेबर के कारण बांग्लादेश में सिलेसिलाए कपड़ों की निर्माण लागत 15-20 प्रतिशत तक कम होने के कारण वहां से आयात बढ़ा है। श्रीलंका सस्ता नहीं है, लेकिन वहां के कुछ खास रेडिमेड कपड़ो की भारत में मांग होने से आयात बढ़ा है। पुराने कपड़ों का आयात भी-अमेरिका और यूरोप से इस्तेमाल किए गए कपड़ो का आयात भी भारत में होता है। ऐसे कपड़े आम तौर पर फ्रेश गारमेंट के नाम पर आयात किए जाते हैं। हालांकि इस तरह के आयात के आंकड़े उपलब्ध नहीं है फिर भी ये रेडिमेड कपड़ों की भारतीय कंपनियों के लिए चुनौती बनी हुई है। भारत से निर्यात घटा-सिलेसिलाए कपड़ों का आयात बढऩे के बीच बुरी खबर यह है कि वित्त वर्ष 2018-19 के पहले 6 महीनों के दौरान भारत से कपड़ा निर्यात बढऩे की जगह घटा है। कई कच्चे माल पर जीएसटी लगने के कारण भारत में सिलेसिलाए कपड़ो की लागत बढऩे के कारण इनका निर्यात प्रतिस्पर्धा से बाहर होता जा रह है।

 

 

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