आरएसीपी के बेहतर परिणामों के बाद दूसरा चरण शुरू करने की तैयारी-कृषि मंत्री

राजस्थान कृषि प्रतिस्पर्धात्मक परियोजना (आरएसीपी) के तहत एग्री बिजनेस पॉलिसी सेमीनार आयोजित

जयपुर, 4 फरवरी (का.सं.)। किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने और आर्थिक रूप से सुदृढ बनाने के लिए राज्य सरकार राजस्थान कृषि प्रतिस्पर्धात्मक परियोजना (आरएसीपी) के बेहतर परिणामों के पश्चात् अब दूसरा चरण शुरू करने की तैयारी कर रही है। कृषि, उद्यानिकी एवं पशुपालन मंत्री लालचन्द कटारिया ने सोमवार को जयपुर में होटल रेडिशन बल्यू में आयोजित एग्री बिजनेस पॉलिसी सेमीनार को संबोधित करते हुए अधिकारियों को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। कृषि मंत्री कटारिया ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत किसान को केन्द्र बिन्दु मानकर उसकी भलाई के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। राज्य सरकार अपने नीति दस्तावेज के अनुसार किसानों को उनकी फसल के बेहतर मूल्य प्रदान करने के लिए कृषि विपणन प्रणाली को सशक्त करने के लिए कृतसंकल्प है। इसके साथ ही खाद्य प्रसंस्करण की सुविधा एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उत्पादों की भण्डारण क्षमता बढाने के लिये भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। सेमिनार में कटारिया ने कहा कि किसान जागरूक हो रहा है और वह नई-नई तकनीक अपना कर एवं अपनी मेहनत के दम पर उत्पादकता बढा रहा है, लेकिन उसे अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। पैदावार की उचित कीमत दिलवाना सबसे बडी चुनौती है। इसके लिए बाजार में बिचौलियों की भूमिका को कम करना होगा और किसानों को खुद आगे आकर समूह बनाकर बाजार विकसित करना होगा। इसके लिए आरएसीपी के तहत किसान उत्पादक कम्पनियों (एफपीसी) का गठन किसानों की आय वृद्धि में एक सफल प्रयास है। इस प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका नगण्य हो जाती है और किसान उत्पादक कम्पनी मूल्य संवर्धन कडी से सीधी जुडकर लाभ कमाती है जिससे शेयर धारक किसानों की आय में भी वृद्धि होती है।
उन्होंने कहा कि आरएसीपी किसानों को आर्थिक रूप से सुदृड करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके उत्साहजनक परिणामों को देखते हुए परियोजना का दूसरा चरण शुरू करने की कार्यवाही आरंभ की जाएगी। इसके लिए विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है जिसे राज्य सरकार की मंजूरी के पश्चात् विश्व बैंक को भेजा जाएगा। इस चरण में परियोजना को पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। कटारिया ने कहा कि एग्री बिजनेस पॉलिसी सेमीनार का आयोजन एक अच्छा प्रयास है, जिससे एफपीसी को सशक्त बनाने तथा सफल रूप से किसानों के हित में व्यापार करने की रणनीति बनाने पर विचार किया जाना है। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पवन कुमार गोयल ने कहा कि प्रदेश में कृषि क्षेत्रफल एवं उत्पादकता बढाने के साथ जिस दिन किसान अपनी शर्तों पर उपज बेचने लगेगा तभी हम अपनी योजना में कामयाब होंगे और किसान आर्थिक रूप से सुदृढ बनेगा। इसके लिए जरूरी है कि स्टोरेज क्षमता बढें और काश्तकार स्वयं अपने स्तर पर मूल्य संवर्धन करें। कृषि तथा उद्यानिकी के साथ-साथ बकरी के दूध तथा दुग्ध उत्पादों जैसे चीज, दूध से साबुन बनाने तथा बेचने के लिए भी महिला बकरी पालकों की कम्पनी का गठन किया गया है। यह गरीब पशुपालकों की आय बढाने में बहुत ही प्रभावकारी साबित होगी।
आरएसीपी के परियोजना निदेशक ओमप्रकाश ने परियोजना पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य में लगभग तीन सौ किसान उत्पादक कम्पनियों (एफपीसी) का गठन विभिन्न संस्थाओं जैसे नाबार्ड, आरकेवीवाई के अन्तर्गत किया गया है। आरएसीपी द्वारा भी 32 किसान उत्पादक कम्पनियों के गठन का कार्य किया जा रहा है। इन कम्पनियों द्वारा किसानों को सही मूल्य पर खाद, बीज तथा दवाई इत्यादि उपलब्ध करवाने के लिए 14 दुकानों का संचालन किया जा रहा है। पिछले 6 माह में इन दुकानों द्वारा एक करोड 30 लाख रूपए का व्यापार किया गया है। उन्होंने बताया कि आरएसीपी के अन्तर्गत इन कम्पनियों के यहां फसलों के वेल्यू एडीशन के लिए ”किसान व्यापार केन्द्रोंÓÓ की स्थापना भी की जा रही है, जिसमें सफाई, छंटाई, ग्रेडिंग और पैंकिग इत्यादि कार्य किए जाएंगे तथा तैयार उत्पाद को सीधे बाजार और इच्छुक कम्पनियों को बेचने का कार्य किया जाएगा। ऐसी सुविधा लगाने के लिए आरएसीपी द्वारा प्रति यूनिट 30 लाख रूपए में 75 प्रतिशत अर्थात 22.50 लाख एफपीसी को उपलब्ध करवायी जा रही है। इसके अतिरिक्त एफपीसी के प्रारम्भिक खर्चों जैसे दुकान किराया, मैन पावर का वेतन, बिजली-पानी के खर्चों के लिए भी दो साल के लिए लगभग 10 लाख 38 हजार रूपए का प्रावधान आरएसीपी के द्वारा रखा गया है।
सफल एफपीसी के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए सेमिनार में सफल कृषक उत्पादक कम्पनियों (एफपीसी) के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए। मोखमपुरा कृषक उत्पादक कम्पनी, जयपुर के अध्यक्ष खेमचंद नेहरा ने कम्पनी गठन एवं उससे हुए फायदे साझा किए। मैत्री महिला डेयरी प्रोड्यूसर कम्पनी दूनी, टोंक की मीरा देवी ने बकरी के दूध से साबुन बनाकर आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर होने की कहानी बयां की। कृषि मंत्री लालचन्द कटारिया ने इनके अनुभव सुनकर उनके प्रयासों की सराहना की। सेमीनार में विभिन्न विषय विशेषज्ञों तथा प्राइवेट कम्पनियों ने भी भाग लिया। सभी ने कृषि को लाभकारी बनाने एवं किसानों को आर्थिक रूप से सुदृढ बनाने के लिए प्रभावकारी डॉक्यूमेंट तैयार करने पर विचार-विमर्श किया। इस दौरान स्टेट मोटर गैराज एवं आयोजना राज्य मंत्री राजेन्द्र सिंह यादव, आरएसीपी के संयुक्त निदेशक वीपी सिंह, एबीपीएफ के प्रभारी अधिकारी पीएस कालरा सहित अन्य अधिकारी एवं किसान उपस्थित थे।

 

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