सरकार से आर-पार की लड़ाई का ऐलान उग्रता की ओर अग्रसर हुए किसान

श्रीगंगानगर, 18 सितम्बर (का.सं.)। किसान संगठनों ने मंगलवार को राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ आरपार की लडाई लडऩे का ऐेलान कर दिया। गुरुद्वारा सिंह सभा में गंगानगर किसान समिति, अखिल भारतीय किसान सभा, किसान संघर्ष समिति की आपात बैठक हुई, जिसमें पहले की तीन चार मुख्य मांगों के साथ-साथ गंगकैनाल में एकाएक हुई पानी की भारी कमी पर विचार विमर्श किया गया। इसके बाद ऐलान किया गया कि 25 सितम्बर को जिला कलक्ट्रेट पर महापड़ाव नहीं डाला जायेगा, बल्कि सरकार से आर-पार की लड़ाई लडऩे के लिए मोर्चा खोला जायेगा। इस मोर्चे पर किसान तब तक डटे रहेंगे, जब तक सरकार मांगों को स्वीकार करते हुए उन पर क्रियान्विति नहीं करती। इस दिन सरकार ने सकारात्मक पहल नहीं दिखाई तो 26 सितम्बर से अनशन शुरू कर दिया जायेगा। किसानों से आह्वान किया गया है कि वे 25 सितम्बर को अपना सामान साथ ही लेकर आयें। अगर सरकार ने दमनचक्र चलाते हुए मोर्चे पर डटे किसानों को खदेडऩे की या गिरफ्तार करने की कार्यवाही की तो द्वितीय पंक्ति के किसान नेताओं की अगुवाई में आंदोलन को फिर भी जारी रखा जायेगा।
जनसम्पर्क के लिए 24 टीमें गठित गुरुद्वारा सिंह सभा में हुई बैठक के बाद किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता संतवीर सिंह मोहनपुरा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि अब किसान पूरी तरह से सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई लडऩे को तैयार हैं। सरकारी अनदेखी और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही को और सहन नहीं किया जायेगा। आज की बैठक में सभी किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने विचार विमर्श कर 25 सितम्बर से बड़े आंदोलन की शुरूआत करने की रूपरेखा तय कर ली। अलग-अलग संगठनों के पदाधिकारियों की अगुवाई में टीमें गठित कर उनके जिम्मे ड्यूटियां लगा दी गई हैं। इसके साथ ही इन तीनों किसान संगठनों ने संयुक्त रूप से 24 टीमों का गठन किया है, जो कल से गंगकैनाल एरिया के साथ-साथ भाखड़ा नहर परियोजना और इन्दिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र के गांवों में जाकर किसानों से सम्पर्क करेंगी। यह अभियान लगातार 24 सितम्बर तक चलेगा। 25 सितम्बर की सुबह किसानों के जत्थे श्रीगंगानगर पहुंचने शुरू हो जायेंगे। अगर पड़ाव अनिश्चितकाल में तब्दील हुआ तो मोर्चे पर डटने वाले सैकड़ों-हजारों किसानों के लंगर-पानी की व्यवस्था का भी इंतजाम किया जायेगा। इसके लिए अन्य अनेक संस्थाओं का सहयोग भी लिया जायेगा। यह हैं मुख्य मांगें किसान संगठनों की मुख्य और पहली मांग अविलम्ब गंगकैनाल नहर में पंजाब से उसके तय हिस्से के अनुसार 2200 क्यूसेक पानी उपलब्ध करवाने की है। दो-तीन दिन से एकाएक पानी में कमी आने के कारण खेतों में खड़ी फसलों को बचाना मुश्किल हो गया है। साथ ही आगामी फसलों की बिजाई भी प्रभावित हो रही है। किसान प्रतिनिधियों ने बतया कि पंजाब से गंगकैनाल में इस महीने 2200 क्यूसेक पानी का हिस्सा तय है, लेकिन दो-तीन दिन से 1300-1400 क्यूसेक पानी ही राजस्थान सीमा पर अवस्थित खक्खां हैड पर मिल रहा है। मंगलवार को पानी की मात्रा 1316 क्यूसेक ही थी। इतने कम पानी से खेतों में खड़ी फसलें बच नहीं पायेंगी। अगर पूरा पानी नहीं मिला तो सरसों की बिजाई भी नहीं हो पायेगी, जोकि हफ्ते-दस दिन बाद शुरू होने वाली है। दूसरी मांग फिरोजपुर फीडर नहर के जीर्णाेद्धार के लिए प्रस्तावित डीपीआर को शीघ्र से शीघ्र तैयार करवाने की है, जिसे कि राजस्थान सरकार ने लम्बे समय तक लटकाये रखा। अब जाकर पंजाब सरकार को पत्र लिखा है। बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि जो भी राजनीतिक दल अपने एजेंडे में इस डीपीआर बनाने व नहर का जीर्णाेद्धार करवाने को शामिल करेगा, आने वाले चुनाव में यह किसान संगठन उसका समर्थन करेंगे। तीसरी मांग मूंग व नरमा की एमएसपी पर पूरी खरीद करने की है। सरकार ने इसकी घोषणा की है, लेकिन किसानों का आरोप है कि अभी तक इसकी खरीद शुरू नहीं हुई है।
कांग्रेस के नेता पहुंचे किसानों के इस आंदोलन का विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा अभी तक अधिकृत रूप से समर्थन करने का कोई बयान नहीं आया है, लेकिन गुरुद्वारा सिंह सभा की इस बैठक में पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष पृथीपाल सिंह संधू, नगर विकास न्यास के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार गौड़ मुख्य रूप से पहुंचे। उन्होंने कहा कि वे इन मांगों के लिए पूरी तरह से किसानों के साथ हैं। गंगानगर किसान समिति के प्रवक्ता संतवीर सिंह मोहनपुरा, हरविन्द्र सिंह गिल, चमकौर सिंह, आईटी सैल के प्रभारी शविन्द्र सिंह बूट्टर, सतपाल सिंह, बलजिन्द्र सिंह मोहनपुरा, निशान सिंह हुंदल, रिछपाल सिंह मक्कासर, अखिल भारतीय किसान सभा के रवीन्द्र तरखान, राकेश ठोलिया, मास्टर केवल सिंह, माकपा के पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल आदि किसान नेता और प्रतिनिधि बैठक मेें शामिल हुए।

 

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