अर्जुन भैया के साथ सेफ फील करती हूं जाह्नवी कपूर

जाह्नवी कपूर अपनी फिल्म ‘धड़क’ के प्रदर्शन से पहले ही स्टार बन चुकी हैं। स्टार किड होने के नाते उन पर जबरदस्त दबाव है और उनसे लोगों को अपेक्षाएं भी खूब हैं, मगर जाह्नवी उन तमाम प्रेशर को झेलते हुए खुद को साबित करने के लिए कटिबद्ध हैं। बेहद नम्रता और प्रेम से मिलनेवाली जाह्नवी फिल्म, निर्देशक शशांक खेतान, अपने हीरो ईशान खट्टर और अपनी दिवंगत मां श्रीदेवी के बारे में बातें करती हैं।
जाह्नवी, आपकी धड़क का लोगों को बेसब्री से इंतजार है। प्रेशर फील कर रही हैं आप?
मैं खुशकिस्मत हूं कि मुझे फिल्मों में आने का ‘धड़क’ जैसी फिल्म करने का मौका मिला। यही मेरे लिए सबसे अहम बात है। देखिए, प्रेशर तो होगा। तुलना भी होगी लेकिन मैं अच्छी चीज पर फोकस करना चाहती हूं। मुझे जितना बड़ा अवसर मिला है, उसका अनुभव लेकर मैं कुछ अच्छा काम करना चाहती हूं। मैं उम्मीद करती हूं कि मुझे आगे भी फिल्में मिलें और बेहतरीन काम करने का मौका मिले। मैं जानती हूं कि लोगों की मुझसे कई उम्मीदें और अपेक्षाएं हैं, उनके बारे में मैं सिर्फ यही कहना चाहूंगी कि जितना प्यार लोगों ने मेरी मां को दिया है, जिस तरह से उन्होंने मेरे परिवार को अपनाया है, मैं उन्हें भी गर्व का अहसास करवाना चाहती हूं। मेरी एक ही चाह है कि मैं उन्हें निराश न करूं। मैं अपने काम के जरिए लोगों का दिल जीतना चाहती हूं। मुझे खुद को साबित करने का मौका चाहिए और मैं उतना ही मांग रही हूं। मैं लोगों से यही गुजारिश करूंगी कि मुझे एक मौका दीजिए, मैं अपनी तरफ से कोई कमी नहीं आने दूंगी।
आपने उस दिन अपने निर्देशक शशांक खेतान को पापा खेतान कहकर संबोधित किया था। किस तरह की बॉन्डिंग है, अपने डायरेक्टर के साथ?
मैं उन्हें अपनी जिंदगी में एक आशीर्वाद की तरह देखती हूं। मैं खुशकिस्मत हूं, जो मुझे अपनी पहली फिल्म में उन जैसा निर्देशक मिला। उससे भी बढ़कर एक ऐसा उम्दा इंसान मिला, जिनसे आपको लगातार सकारात्मक ऊर्जा मिलती रहती है। अभिनय के बारे में मुझे जितना भी पता है, मैंने उनसे सीखा है। उन्होंने न केवल मुझे प्रेरणा दी बल्कि लगातार मेरा सपॉर्ट सिस्टम भी बने रहे।
ट्रेलर और प्रमोशंस के दौरान आपकी और ईशान की ऑन-स्क्रीन और ऑफ स्क्रीन केमेस्ट्री कमाल की रही है। उनका साथ कैसा रहा?
उनके साथ काम करना किसी ख्वाब के पूरे होने जैसा है। वह मेरे प्रति बेहद नरमदिल रहे। एक अदाकार के रूप में वह अपने साथी कलाकार को भी बहुत कुछ देते हैं। काम के प्रति उनके रवैये ने मुझे बहुत प्रेरित किया। सेट पर वह गजब की एनर्जी लाते हैं। उनके साथ काम करना बहुत ही कमाल का रहा। शूटिंग से पहले हमने कई वर्कशॉप्स किए। स्क्रिप्ट की रीडिंग्ज कीं और उससे हमें बहुत फायदा मिला।
आपने कब तय किया कि आपको अभिनेत्री बनना है?
मुझे बचपन से ही फिल्मों का जबरदस्त शौक था। मैं बचपन में मजे के लिए बहुत झूठ बोलती थी। कहानियां तो मैं यूं बनाती थी कि पूछो मत। मैं स्कूल में बहुत मोटी हुआ करती थी और एक डान्स परफॉर्मेंस में मुझे नहीं लिया जा रहा था, तो मैंने एक ट्रिक की। मैं वहां जाकर उछलने लगी और मेरा पेट हिलने लगा। टीचर ने जब मुझसे पूछा कि मैं यह क्या कर रही हूं, तो मैंने सफेद झूठ बोलते हुए कहा, ममी-पापा ने शकीरा को बुलाया था, मुझे बेली डांस सिखाने।’ उन लोगों को मेरी बात पर यकीन आ गया, तो उन्होंने ममी को कॉल करके पूछा शकीरा आई थी, जाह्नवी को बेली डान्स सिखाने। हमारे यहां भी भेज सकते हैं क्या? मेरे झूठ से कई बार ममी परेशान हो जाया करती थीं। सच कहूं, तो जीवन को लेकर मेरा जो नजरिया है, वह मैंने सिनेमा से ही अपनाया है। ममी-पापा ने मुझे बहुत ही खूबसूरत जिंदगी दी है, लेकिन कलाकार और फिल्ममेकर के रूप में उनका कद बहुत बड़ा था। उन्होंने मुझे बहुत ही सरंक्षित रखा। मैं लगातार ममी और पापा के साथ शूटिंग पर साथ जाया करती थी और सिनेमा को करीब से देख रही थी। यही वजह है कि स्कूल में मेरी उपस्थिति 30 पर्सेंट हुआ करती थी। स्कूल के सिस्टम से मैं बिलकुल सहमत नहीं हूं। क्लासरूम में बैठकर किताब पढ़कर एग्जाम देना ही जिंदगी नहीं है। मुझे लगता था कि फिल्में देखकर मैं जिंदगी के बारे में ज्यादा सीख पाई हूं।
आपकी मॉम ने बताया था कि वह आपको लेकर इतनी प्रोटेक्टिव थीं कि नहीं चाहती थीं कि आप फिल्मों में आएं?
यह सच है कि वह नहीं चाहती थीं कि मैं फिल्मों में आऊं, मगर उनका विरोध नहीं था। कहीं न कहीं उन्हें अंदाजा था कि यह घूम-फिरकर यहीं आएगी। वह भी कहीं न कहीं इस हकीकत से भागने की कोशिश कर रही थीं। मैंने जब उनसे अपनी इच्छा जाहिर की, तो वह बोलीं, थोड़ा सोचो, खुद को वक्त दो। फिल्मी दुनिया इतनी आसान नहीं होती। वहां जाकर आपको सिर्फ लाइन्स नहीं बोलनी होती। असल में उनका कहना था कि मैंने पूरी जिंदगी इतनी मेहनत इसलिए की कि मैं अपने बच्चों को आसान जिंदगी दे सकूं, मगर मेरा कहना था कि मुझे आसान जिंदगी नहीं चाहिए। मॉम और डैड ने मुझे बहुत कुछ दिया है, मगर मैं अपनी जिंदगी का संघर्ष खुद करना चाहती हूं। अपना हक कमाना चाहती हूं, लोगों का प्यार पाना चाहती हूं। मैंने जब उनसे ये सारी बातें शेयर कीं, तो उन्हें मनाने में ज्यादा वक्त नहीं लगा।
पिछले दिनों आपके भाई अर्जुन कपूर भी सोशल मीडिया पर आपको लेकर प्रोटेक्टिव नजर आए?
मैं अर्जुन भैया के साथ काफी सुरक्षित महसूस करती हूं। मैं सरंक्षित महसूस करती हूं कि हमारे साथ भाई हैं। उन्होंने जिस तरह का प्यार और सपॉर्ट हमें दिया, वह सही मायनों में अनकंडीशनल है। हम भाग्यशाली हैं, जो वह हमें भाई के रूप में मिले।
मां साथ आपकी सबसे खूबसूरत याद क्या है?
बहुत सी हैं, मगर उन यादों को कैसे भूलूं, जब हर सुबह मैं, ममी और पापा हॉल में बैठते थे। खुशी तो सोती रहती थी, मगर पापा की सोफे पर एक तयशुदा जगह थी, जिस पर वह आराम से पसर कर बैठते और ममी एक छोटी-सी चेयर पर पैर सिकोड़कर बैठ जातीं। हम खूब गप्पें लगाया करते थे। शाम को ममी और खुशी फिल्में देखते और रात को हम डिनर साथ करते और खूब हंसते। मुझे तब बहुत मजा आता था, जब पापा, ममी की चुटकी लेते हुए उनका मजाक उड़ाते थे। वे दोनों मासूम बच्चों की तरह झगड़ते थे। एक-दूसरे के लिए वे जितने पजेसिव थे, उतने ही परस्पर जुड़े हुए भी थे। उन दोनों को देखकर मुझे जिंदगी में प्यार का एक बेहद खूबसूरत और ऊंचा आदर्श देखने को मिलता था। उन दोनों के प्यार को मैच करना बहुत मुश्किल है। उन दोनों के बीच एक बेहद ही खास तरह का रिश्ता था।
उस मुश्किल दौर में आपकी सबसे बड़ी ताकत क्या थी?
पहले भी मेरी ताकत मेरी मां थी और आज भी मेरी शक्ति मेरी मॉम ही हैं। अभी भी कुछ बदला नहीं है। मैं जो कुछ करती हूं, उन्हीं का नाम लेकर करती हूं, मगर उस मुश्किल दौर में मेरे काम ने मुझे ताकत दी। मेरे परिवार में पापा, खुशी, अर्जुन भैया, अंशुला दी, लता मौसी, सूरी मौसी, अनिल चाचू, सुनीता चाची, संजय चाचू और मेरे सभी भाई-बहनों ने मुझे बहुत सारा प्यार और शक्ति दी। यह सच है कि उनके प्यार की जगह कोई ले ही नहीं सकता। मैं नहीं जानती कि मैं पहले से ज्यादा मच्योर हुई हूं या नहीं, मगर अब मैं बहुत-सी ऐसी चीजें सोचने लगी हूं, जो शायद मैं पहले नहीं सोचती थी। मुझे फिक्र रहती है कि खुशी ने खाना खाया या नहीं? अब मैं सोचती हूं कि पापा को उनका वजन कम करना चाहिए। अब मैं अपने बारे में भी कई चीजें खुद सोचती हूं।
उनके साथ आपकी आखिरी याद क्या है?
(गहरी सांस लेते हुए) मां फैमिली वेडिंग में जा रही थीं। अगले दिन मेरी शूटिंग थी। जब भी मुझे नींद नहीं आती, मैं मां को बुलाती और वह मेरे सिर पर थपकी देकर मुझे सुला दिया करती थी। उस दिन भी पता नहीं क्यों? मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैंने मां को बुलाया। मां पैकिंग में बिजी थीं। मेरा भी शूटिंग पर कॉल टाइम अर्ली था। मां ने कहा, वह पैकिंग करके आएंगी। मैं इंतजार करते हुए आधी नींद में पहुंच गईं। वह मेरे कमरे में आईं और मैंने उनींदी अवस्था में मुझे थपकना शुरू किया। उनके हाथों का स्पर्श मैंने अपने माथे पर महसूस किया था।

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *