‘एक को जानो, एक को मानो, एक हो जाओ

सन्त निरंकारी सत्संग में जोनल इंचार्ज महात्मा धर्मपाल टक्कर की अध्यक्षता में सत्संग का आयोजन

श्रीगंगानगर, 31 मार्च (एजेन्सी)। गुरू के दर पर आकर गुरू के आदेशों की पालना करते हैं तो गुरसिख बन जाते हैं। गुरू के चरणों में आने का भाव ज्ञान प्राप्त करना है। निरंकार प्रभु सब कुछ देख रहा है, जब इसका अहसास बना रहता है तो हम गुरसिख की अवस्था में रहते हैं। गुरसिख गुरू की आज्ञा में रहता है, गुरू की बात को मानता है तथा दास बनकर जीवन जीता है। गुरसिख कर्म करते हुए भी कर्ता भाव नहीं रखता है, मान नहीं करता है, मान सदैव गुरू पर करता है एवं हरदम शुकर करता है। प्यार, प्रीत, नमता, दया, करूणा, सहनशीलता, सद्भावना, परोपकार गुरसिख के गुण होते हैं। गुरसिख के पास प्यार होता है। निरंकारी मिशन का संदेश है ‘प्यार सजाता है गुलशन को और नफरत वीरान करे तथा ‘एक को जानो, एक को मानो, एक हो जाओ। गुरू की तरह ही गुरसिख का सत्कार करना है। गुरसिख संतों की सेवा करता है, जो गुरसिखों के साथ निभाना जानता है, वह गुरसिख का पद पाता है। यह उद्गार सूरतगढ़ बाईपास स्थित स्थानीय सन्त निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित रविवारीय सत्संग में जोनल इंचार्ज महात्मा धर्मपाल टक्कर ने साध-संगत को आशीर्वचन प्रदान करते हुए व्यक्त किये। जोनल इंचार्ज महात्मा धर्मपाल टक्कर ने सम्पूर्ण हरदेव बाणी के शब्द नं. 91 ‘गुरू के दर पर आने वाला गुरसिख जब बन जाता है, गुरसिख की जो मर्यादा है दिल से उसे निभाता है, सदा बसाये रखता अपने मन में गुरू का प्यार है, सच्चे दिल से हर गुरसिख का करता सत्कार है, गुरू सेवा के साथ साथ ही सन्त की सेवा करता है, गुरू का भय भी दिल में रखता सन्तों से भी डरता है, गुरू के संग संग गुरसिखों से जिसे निभाना आता है, कहे ‘हरदेवÓ कि ऐसा जन ही गुरसिख का पद पाता है पर विचार करते हुए गुरू के चरणों में समर्पित होकर निरन्तर सेवा-सत्संग-सिमरन करते हुए भक्ति करने के लिए प्रेरित किया। स्थानीय ब्रांच के संयोजक सोहनलाल छाबड़ा ने जोनल इंचार्ज महात्मा का स्वागत किया तथा गुरू, निरंकार व साध-संगत की महानता का जिक्र करते हुए ब्रह्मज्ञान पर दृढ़ किया। संयोजक सोहनलाल छाबड़ा ने कहा कि हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी 24 अप्रैल, 2019 को स्थानीय सूरतगढ़ बाईपास स्थित सन्त निरंकारी सत्संग भवन में विशाल रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा। जोनल इंचार्ज महात्मा के साथ आए सरोज टक्कर, गुरमीत ‘बंटी जी सहित अनेक वक्ता महात्माओं ने गीतों एवं विचारों के माध्यम से गुरू की महिमा का गुणगान किया। महात्मा विनोद गर्ग ने साप्ताहिक सत्संग की जानकारी दी। इस अवसर पर सैंकड़ों निरंकारी श्रद्धालु उपस्थित थे। सत्संग के पश्चात् जोनल इंचार्ज धर्मपाल टक्कर द्वारा ज्ञान कक्ष में अनेकों प्रभु प्रेमी जिज्ञासु सज्जनों को ब्रह्मज्ञान की अमोलक दात प्रदान की गई। श्रद्धालुओं ने निरंकार प्रभु की जानकारी हासिल करके आध्यात्मिक आनन्द प्राप्त किया तथा सन्त निरंकारी मिशन के मूल सिद्धान्त पाँच प्रणों का पालन करते हुए निरन्तर सेवा-सत्संग-सिमरन करने का संकल्प व्यक्त किया।

 

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