फोर्टिस पल्मोनरी रूट ट्रांसफर करने वाला राज्य का पहला हॉस्पिटल

जयपुर, 12 अप्रैल(एजेन्सी)।फोर्टिस अस्पताल ने एक और उपलब्धि हासिल की और ऐसा करने वाला राज्य का पहला अस्पताल बना, इसने ढाई साल के बच्चे मनीष की पल्मोनरी रूट ट्रांसफर सर्जरी (पीआरटी) की है। मनीष वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (वीएसडी) और पल्मोनरी स्टेनोसिस (पीएस) के साथ ट्रांसपोजीशन ऑफ ग्रेट आर्टरीज (टीजीए) के संक्रमण से पीडि़त है, यह बीमारी जन्मजात रोगों का एक दुर्लभ और जटिल मिश्रण है, जो हृदय रोगों से पीडि़त केवल 2 प्रतिशत बच्चों में पाया जाता है। डॉ. सुनील के. कौशल, डॉयरेक्टर, पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी, फोर्टिस एस्कॉट्र्स हॉस्पिटल, जयपुर ने बताया कि मनीष को सांस लेने में तकलीफ और कम खाने की समस्या की वजह से अस्पताल में लाया गया था, और यहां पर टीजीए वीएसडी पीएस का निदान किया गया जो हृदय और फेफड़ों के कामकाज में बाधा डालता है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति सही तरीके से नहीं हो पा रही थी और परिणामस्वरूप पूरा शरीर नीला पड़ गया था। जागरुक परिवार और फोर्टिस हॉस्पिटल के कुशल शिशु रोग चिकित्सकों के ठोस प्रयासों के लिए धन्यवाद, जिसकी वजह से मनीष की दुर्लभ सर्जरी हुई और वह पूरी तरह से ठीक हो गये। पहले निदान में एक निश्चित अंतराल के बाद तीन से चार ऑपरेशन की आवश्यकता होती है जो रोगी और उसके परिवार पर वित्तीय जोखिम, भावनात्मक आघात, स्वास्थ्य जोखिम जैसे अनावश्यक बोझ डालते हैं।
स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में हो रहे निरन्तर तकनीकी विकास के चलते फोर्टिस हॉस्पिटल में राज्य का पल्मोनरी रुट ट्रांसफर (पीआरटी) सर्जरी से अवगत करवाया तथा एक ही बार में सर्जरी कर शिशु को नया जीवन दिया। दुनियाभर में कई रोगी पल्मोनरी रूट ट्रांसफर (पीआरटी) का लाभ उठा रहे हैं और हमें राजस्थान में इस विश्वस्तरीय सर्जिकल प्रक्रिया को शुरू करने पर गर्व है। जोखिम कारकों को कम करने और तेजी से ठीक होने की संभावना को बढ़ाने के लिए इस संवेदनशील मामले में एक बेजोड़ प्रक्रिया प्रशासित की गई थी। भारत में, हृदय रोगों से पीडि़त प्रत्येक 100 बच्चों में, 2 बच्चे टीजीए वीएसडी पीएस से पीडि़त हैं, यह एक गंभीर मुद्दा है, खासकर जब इसके निदान की बात आती है। इससे पहले, ऐसी स्थितियों का इलाज करने के लिए 3 से 4 सर्जरी की आवश्यकता होती थी, जिसमें कई साल लग जाते हैं, जिसके कारण विशेष रूप से परिवारों के लिए बहुत कठिनाई होती थी। पीआरटी ने इसे काफी हद तक कम कर दिया। सर्जरी के दौरान, हमें किसी भी जटिलता का सामना नहीं करना पड़ा और 7-8 दिनों में मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

 

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