रावला-खाजूवाला क्षेत्र में चार नहरें टूटीं

श्रीगंगानगर, 12 मई (का.सं.)। श्रीगंगानगर-बीकानेर जिलों की सीमाओं पर स्थित रावला और खाजूवाला क्षेत्र की चार नहरें शुक्रवार-शनिवार की रात को आई तेज आंधी और बरसात के दौरान अलग-अलग स्थानों से टूट गईं। इन नहरों के टूटने से जल संसाधन विभाग के साथ-साथ किसानों को भी भारी नुकसान हुआ है। लगभग डेढ़ महीने की बंदी के बाद गत दिवस ही इन्दिरा गांधी नहर की अनूपगढ़ शाखा के रावला हैड से इन नहरों में पानी छोड़ा गया था। चार नहरों के टूट जाने से ग्रामीण जलदाय योजनाओं (वाटरवक्र्स) की डिग्गियां फिर सूखी रह गई हैं। जल संसाधन विभाग ग्रामीणों की मदद से इन नहरों की मरम्मत करवा रहा है। इन नहरों में अब 16 या 17 मई को पानी मिल पायेगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार बीती रात आये तेज अंधड़ और बारिश के दौरान रावला हैड से निकलने वाली केएनडी नहर तथा रोजड़ी हैड से निकलने वाली दो माइनर नहरों एआरएम व केडब्ल्यूएम में अलग-अलग स्थानों पर कटाव आ गया। इसी तरह खाजूवाला क्षेत्र की बीडी नहर में भी लगभग 15 फीट का कटाव आया। बीडी नहर आरडी 365 हैड से निकलती है। आज सुबह अधिकारियों को इन नहरों के टूटने का पता चला, जब किसानों ने सूचना दी। इन नहरों के टूटने से काफी नुकसान हुआ है। अनेक खेत जलमग्न हो गये। किसी जानी नुकसान की सूचना नहीं है। हासिल जानकारी के अनुसार खाजूवाला की बीडी नहर में लगभग 41 दिन की बंदी के बाद विगत दिवस पानी छोड़ा गया था। आरडी 365 हैड से निकलने वाली बीडी नहर में चक 28 बीडी के पास कचरे की वजह से डाफ लग गई, जिससे लगभग 10 फीट का कटाव आ गया। नहर का पानी व्यर्थ बहने लगा। ग्रामीणों द्वारा सूचना दिये जाने पर जल संसाधन विभाग के अधिकारी मौके पर आये। उन्होंने ग्रामीणों की मदद से इस कट को ठीक करवाया। इसके बाद दोबारा पानी चालू करवा दिया। जल संसाधन विभाग के अधिशाषी अभियंता अनिल कैथल ने बताया कि पेयजल के रूप में नहरों में पानी आया था। बीती रात अंधड़ के कारण नहर में पेड़ की टहनियांं गिर गई और कचरा भर गया। इस कारण नहर टूट गई। उन्होंने बताया कि पानी दोबारा चालू करवा दिया गया है, ताकि टेल पर पानी पहुंच सके।
केएनडी नहर अकसर टूटती है
रावला क्षेत्र में केएनडी नहर आरडी 18 के पास टूट गई। इसमें लगभग 20 फीट का कटाव आ गया। लगभग आधी रात को आये इस कटाव का मरम्मत कार्य सुबह शुरू करवाया गया। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार केएनडी नहर में रावला हैड से लगभग 100 क्यूसेक पानी गुरुवार शाम को छोड़ा गया था। इस नहर की क्षमता 265 क्यूसेक है। ‘यादा बड़ा कटाव न होने के कारण इसकी आज दोपहर मरम्मत कर ली गई, इसमें दोबारा पानी छोडा जा रहा है।
एक बीघा चौड़ा, 40 फुट गहरा कटाव
रावला क्षेत्र की आरजेडी नहर की दो वितरिकाएं एआरएम और केडब्ल्यूएम में भी कटाव आ गया। इनमें ‘यादा नुकसान एआरएम माइनर का हुआ है। चक 6-7 एआरएम के बीच लगभग एक बीघा चौड़ा और लगभग 40 फीट गहरा कटाव आया है। चक 6-7 एआरएम के बीच इस माइनर के किनारे बंधाई में हैं। इनका लेवल जमीन से लगभग 40 फीट ऊंचा है। इसी जगह कटाव होने के कारण लगभग 40 फीट गहराई तक नहर टूट गई। इसे अभी बांधने का काम शुरू नहीं हो पाया है। इस कटाव का जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने जायजा लिया। उन्होंने जल्दी मरम्मत कार्य शुरू करवाने का आश्वासन दिया है। कल तक कार्य शुरू होने की सम्भावना है। आरजेडी नहर की केडब्ल्यूएम नहर में 47 आरडी के पास लगभग 70 फुट का कटाव आया है। ग्रामीणों ने बताया कि इस जगह पर यह नहर अकसर टूटती रहती है। पहले भी कईं बार यह नहर टूट चुकी है। नहर के दोनों तरफ टिब्बे हैं। आरडी 47 के पास नहर गोलाई में होने के कारण ग्रामीणों ने इसके पानी को टिब्बों में से डायवर्ट कर लिया है। पानी को कटाव स्थल के आगे वापिस नहर में चलाया जा रहा है। दूसरी तरफ कटाव की मरम्मत का काम भी चल रहा है। इस जगह कोई ‘यादा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन कटाव आ जाने के कारण आगे के चकों व गांवों में वाटरवक्र्स की डिग्गियों तक पानी अब देरी से पहुंचेगा। विभागीय सूत्रों ने बताया कि क्रम के अनुसार अब इन नहरों में 16 या 17 मई को पूरी क्षमता से पानी चलाया जा सकेगा। तब तक वाटरवक्र्स की डिग्गियों के लिए पानी का इंतजार करना होगा। लगभग डेढ़़ महीने की बंदी के कारण इस इलाके मेें पहले से ही पेयजल के लिए हाहाकार मचा हुआ है। लोग बड़ी बेसब्री से बंदी समाप्त होने और पानी के आने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन नहरें टूट जाने से उनका इंतजार लम्बा हो गया।
अधिकारियों की रही लापरवाही
ग्रामीणों ने बताया कि यह सभी चारों नहरें जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण टूटी हैं। लगभग डेढ़ महीनें तक नहरों में पानी बंद था। जल संसाधन विभाग के किसी भी अधिकारी और बेलदार तक ने इन नहरों की हालत को नहीं देखा। इस दौरान तेज हवाएं और आंधियां भी चलीं, जिससे झाड़-झखड़ और कचरा नहरों में भरता रहा। जब बंदी की अवधि समाप्त होने वाली थी, उससे पहले अगर इन नहरों की सफाई करवा दी जाती, तो यह नहरें नहीें टूटती। नहरों के टूटने के लिए ग्रामीण विभाग को ही जिम्मेवार ठहरा रहे हैं। उन्होंने आज हुए पानी के नुकसान की भरपाई की मांग की है।
तीन जगह भटकना पड़ता है
नहरों के टूटने के इस मामले मेें अधिकारियों और नहरों के रखरखाव का जिम्मा सम्भालने वाले कर्मचारियों से कोई जवाब नहीं बन रहा। आरजेडी नहर से निकलने वाली एआरएम नहर की मरम्मत के लिए तो और भी विसंगतिपूर्ण बात सामने आई है। इस नहर की आरडी 1 से 7 तक बीकानेर जिले में पड़ती है और आरडी 8 से 27 से तक घड़साना तहसील क्षेत्र में आती है। इस नहर के अधिशाषी अभियंता का कार्यालय छत्तरगढ़ में है। लिहाजा इस नहर के किसानों को इस तरह की विपदा आने पर तीन जगहों पर मरम्मत करवाने के लिए भटकना पड़ता है। एआरएम नहर में आये कटाव का छत्तरगढ़ से आये कार्यवाहक अधिशाषी अभियंता हनुमान चौधरी ने निरीक्षण किया। दूसरी तरफ केएनडी नहर का घड़साना से आये अभियंता भगवानाराम बिश्रोई ने हालात देखे।

 

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