गंगानगर कला मंच की मासिक काव्य गोष्ठी सम्पन्न

 

श्रीगंगानगर, 21 अक्टूबर (एजेन्सी)। गंगानगर कला मंच की मासिक काव्य गोष्ठी अरोड़वंश पब्लिक स्कूल सभागार में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता संरक्षक रमेशचन्द्र गुप्ता ने की। विशिष्ट अतिथि कश्मीरीलाल जसूजा एवं योगराज भाटिया थे। काव्य गोष्ठी में नवोदित व वरिष्ठ साहित्यकारों ने रचनायें प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। काव्य गोष्ठी की शुरूआत साहित्यकार प्रदीप प्रधान की कविता ‘जला के चिराग कोई वहीं पर रख दो.. से हुई। इजहार गंगानगरी ने ‘कोई उस पर अक्षर नहीं आता… कविता पेश की। डॉ. राहुल अग्रवाल ने ‘बाहर का रावण मर गया, अन्दर का अभी बाकी…, सतपाल जोईया ने ‘इस बदलते शहर के प्रेमियों ने सब कुछ लिख लिया…, मनीराम सेतिया ने ‘हर साल रावण जलाये जा रहे हैं…, डॉ. अरूण शैहरिया ने ‘जुल्फ का तेरी हसीना खम बनूं… सुनाकर खूब दाद बटोरी। निष्ठा गुप्ता ने ‘रावण सरेआम घूमते हैं, सीता घुट-घुट रो रही…, सुमन आहुजा ने ‘मैंने गीता पढ़ी, ना पढ़ी कथा कुराण…, डॉ. हरिदास हर्ष ने ‘परिवर्तन स्वीकारता मौन हुआ अन्तर्मन…, कश्मीरीलाल जसूजा ने ‘रावण को रावण जलाये तो उसका अन्त कैसे आये…, दौलतराम अनपढ़ ने ‘भवानी ऐसा वर दे मुझको, मैं बन जाऊं नेता…, साहित्यकार अशोक गोरा ने ‘वक्त के रूकसत से पहले मेरे आँखे अक्सबार न थी… सुनाकर वाहवाही लूटी। बनवारीलाल शर्मा ने ‘मैंने अपने घर की लॉबी में मेरी दिवंगत माँ की फोटो लगा रखी है…, योगराज भाटिया ने ‘शिकवे-शिकायतों का जमाना गया…, बी.एस. चौहान ने ‘तेरे दिन भी बदलेंगे, जग तेरा भी यश गायेगा…, बालकिशन लावा ने ‘वो नहीं तरसते किसी ईनाम को, जो खुदा समझते हैं हर काम को… प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी। काव्य गोष्ठी में शिवानी ने ‘देखा है मैंने बिना औलाद के माँ-बाप को रोते… तथा हरइकबाल सिंह ने ‘ऐ मेरे समाज के युवाओं तुम्हारे हाथों में है विकास…द्वारा खूब वाहवाही लूटी।कुलदीप सिंह, सुखवन्त सिंह ढिल्लो, कमलप्रीत सिंह व सुखदेव सिंह पंछी ने पंजाबी कविताओं द्वारा अद्भुत समां बांधा। कार्यक्रम में राजू गोस्वामी, डॉ. आशाराम भार्गव, साहित्यकार मदन अरोड़ा, अनमोल, भागीरथ मेघवाल, सांवरमल, हैप्पी सिंह, भीमसैन सहित अनेक साहित्य व कला प्रेमियों ने काव्य गोष्ठी में कविता व गजलों का आनन्द उठाया। कार्यक्रम के अन्त में अमृतसर रेल हादसे में मारे गये मृतकों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम के अंत में रमेशचन्द्र गुप्ता व दौलतराम अनपढ़ ने सभी का आभार प्रकट किया। सफल मंच संचालन मनीराम सेतिया ने किया।

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