सेवा कर के ट्रांजिशनल क्रेडिट पर सरकार ले सकती है फैसला

 

नई दिल्ली। सरकार सीजीएसटी कानून की धारा 140 में किए गए संशोधन के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने के लिए कदम उठा सकती है। जब से इस धारा में संशोधन हुआ है तब से टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि अब कारोबारियों को सेवा कर का ट्रांजिशनल क्रेडिट नहीं मिल पाएगा। यही वजह है कि जीएसटी काउंसिल 28 सितंबर को होने वाली बैठक में चर्चा कर इस बारे में स्थिति स्पष्ट करने के लिए कदम उठाएगी।सूत्रों ने कहा कि वित्त मंत्रालय ने इस मुद्दे के बारे में कानून मंत्रालय से भी राय ली है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्स एंड कस्टम (सीबीआईसी) के अधिकारियों को उद्योग जगत से इस धारा के संबंध में जो फीडबैक मिला था, उसी के आधार पर अब इसमें बदलाव करने की तैयारी हो रही है। दरअसल सरकार ने यह संशोधन सेस के ट्रांजिशनल क्रेडिट लेने की सुविधा पर रोक लगाने के इरादे से किया था, लेकिन इस धारा की भाषा इस तरह बन गयी कि उसका यह अर्थ निकलने लगा कि सेवा कर ट्रांजिशनल क्रेडिट भी नहीं लिया जा सकता।ट्रांजिशनल क्रेडिट का मतलब यह है कि एक जुलाई 2017 से जीएसटी लागू होने से पूर्व कारोबारियों ने सेनवेट या सेवा कर का जो भुगतान किया था, उस क्रेडिट का इस्तेमाल वे जीएसटी के भुगतान के लिए कर सकते हैं। सीजीएसटी कानून की धारा 140 के तहत ट्रांजिशनल क्रेडिट लेने का प्रावधान है।संसद के मानसून सत्र में जीएसटी कानून की इस धारा में संशोधन को मंजूरी दी गयी है। आरएन मारवाह एंड कंपनी एलएलपी के कार्यकारी निदेशक (जीएसटी) नितिश शर्मा का कहना है कि सीजीएसटी कानून में संशोधन से सेवा कर के ट्रांजिशनल क्रेडिट मिलना संभव नहीं होगा। इससे कारोबारियों को परेशानी होगी। इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है।सीजीएसटी कानून की धारा 140 के तहत कारोबारी एक जुलाई 2017 से पहले के सेवा कर का ट्रांजीशनल क्रेडिट लेते हैं लेकिन इसमें सेवा कर का उल्लेख नहीं है।

 

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