खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी के प्रति सरकार संवेदनशील: सुभाष गर्ग

 

जयपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने सोमवार को विधानसभा में बताया कि सरकार खाद्य पदार्थों में मिलावट के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और समय-समय पर अभियान चलाकर संस्थानों और प्रतिष्ठानों से नमूने लिए जाते हैं। गर्ग प्रश्नकाल में इस सम्बन्ध में विधायकों द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने कार्यभार संभालते ही मिलावटखोरी के खिलाफ 1 फरवरी 2019 से 20 फरवरी 2020 तक मिलावटी खाद्य पदार्थों की रोकथाम के लिए अभियान चलाकर 865 संस्थानों और प्रतिष्ठानों से 642 नमूने लिए। इसी तरह 6 मार्च 2019 से 20 मार्च 2019 तक विशेष अभियान चलाकर 537 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर 403 नमूने लिए गए। उन्होंने बताया कि इसी तरह 1 जनवरी, 2019 से 30 जून 2019 तक 4520 संस्थानों का निरीक्षण कर 2986 नमूने लिए गए। इनमें 380 सब स्टैंडर्ड, 211 मिस ब्रांडेड और 156 असुरक्षित श्रेणी के पाए गए। उन्होंने बताया कि 131 सब स्टैंडर्ड और मिस ब्रांडेड संबंधित जिला मजिस्ट्रेट के यहां प्रस्तुत किए जा चुके हैं तथा 5 असुरक्षित प्रकरणों को संबंधित न्यायालयों में भेजा जा चुका है और शेष प्रकरणों की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में बताया कि नकली घी से जुड़े सभी मामले न्यायालय के समक्ष विचाराधीन हैं। न्यायालय जो भी फैसला करेगा उससे सभी को अवगत करा दिया जाएगा। श्री गर्ग ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन एक संस्थान है, जो सुझाव देता है। उन्होंने यह भी बताया कि जो एक्ट है उसके अनुसार पाम ऑयल यदि मानक आधार पर तैयार किया गया है तो उसे खाद्य पदार्थों में मिलाया जा सकता है।नियमों के अनुसार इसमें कोई गंध और रंग नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि जिन तेलों में पाम ऑयल मिलाया जा रहा है उनकी पैकिंग पर पाम ऑयल की मात्रा व अन्य चीजें अंकित की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि पाम ऑयल की खरीद भारत सरकार द्वारा की जाती है। यदि सरकार चाहे तो आयात पर प्रतिबंध भी लगा सकती है।इससे पहले विधायक श्री चंद्रभान सिंह आक्या के मूल प्रश्न के जवाब में डॉ. गर्ग ने बताया कि खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम प्रोहिबिशन एंड रेस्ट्रिक्शंस ऑन सेल्स रेगुलेशन 2011 के विनियम 2.1.1(3) में निहित प्रावधानों अनुसार घी उत्पादन के दौरान कोई भी तेल नहीं मिलाया जा सकता है। अन्य खाद्य तेलों में पाम ऑयल का उपयोग मिश्रण के रूप में ब्लेंडेड वेजीटेबल ऑयल्स पर रेगुलेशन 2.2 (24) में निर्धारित मानक के अनुसार किया जा सकता है। उन्होंने उक्त विनियम की प्रतियां सदन के पटल पर रखी।उन्होंने बताया कि अन्य खाद्य तेलों में पाम ऑयल का उपयोग मिश्रण के रूप में भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा ब्लेंडेड वेजीटेबल ऑयल्स पर रेगुलेशन 2.2 (24) में निर्धारित मानक के अनुसार किया जा सकता है। उन्होंने उक्त विनियम की प्रति सदन के पटल पर रखी। उन्होंने बताया कि भारत में खाद्य पदार्थोंं के मापदंड केन्द्र सरकार के अधिकरण भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा लागू किए जाते हैं और इस एक्ट के अनुसार वर्तमान में पाम ऑयल की ब्रिकी में कोई प्रतिबन्ध नहीं है।श्री गर्ग ने बताया कि अन्य खाद्य तेलों में पाम ऑयल का उपयोग मिश्रण के रूप में भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा ब्लेंडेड वेजीटेबल ऑयलस पर रेगुलेशन 2.2 (24) में निहित मानक के अनुसार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम फूड प्रोडक्टस स्टैंडर्डस एंड फूड एडिटिव्स रेगुलेशन 2011 के रेगुलेशन 2.2(19) के अन्तर्गत पाम ऑयल एक खाद्य पदार्थ है। खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम एवं विनियम केन्द्रीय एक्ट है। उन्होंने इसका विवरण भी सदन के पटल पर रखा।

 

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