करोड़ों के भूखण्ड मामले की जांच बदली

श्रीगंगानगर, 11 जून (नि.स.)। स्थानीय इन्दिरा कॉलोनी के नजदीक सत्संग विहार में करोड़ों रुपये का भूखण्ड हड़पने के एक चर्चित मामले में पीडि़ता द्वारा जांच अधिकारी पर आरोपितों के साथ मिलीभगत कर लेने का आरोप लगाये जाने पर पुलिस अधीक्षक ने तुरंत प्रभाव से जांच को तब्दील कर दिया है। जवाहरनगर थाना में नियुक्त एएसआई राजेन्द्र स्वामी इस मामले की जांच कर रहे थे। देहरादून निवासी पीडि़ता नीतू वर्मा ने विगत दिवस ई-मेल के जरिये पुलिस अधीक्षक को शिकायत करते हुए बताया कि एएसआई राजेन्द्र स्वामी मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कर रहा। उसने आरोपितों के साथ कथित रूप से सांठ-गांठ कर ली है। इस पर पुलिस अधीक्षक ने इस प्रकरण की जांच सूरतगढ़ में सहायक पुलिस अध्ीाक्षक मृदुल क’छावा को सौंप दी है। नीतू वर्मा ने अपने जीजा पर उसका भूखण्ड फर्जीवाड़े से हड़प लेने का आरोप लगाते हुए विगत अप्रेल माह के अन्तिम सप्ताह में जवाहरनगर थाना में मुकदमा दर्ज करवाया था। नीतू पत्नी मनीष का आरोप है कि अजय पुत्र श्यामलाल वर्मा निवासी हरीपुरम, देहरादूर ने जालसाजी व धोखाधड़ी से उसका भूखण्ड हड़प लिया। नीतू वर्मा ने मुकदमे में बताया है कि उसके पति ने वर्ष 2005 में यहां इन्दिरा कॉलोनी के नजदीक सत्संग विहार में भूखण्ड संख्या 1, 2 व 3 की खरीद की थी। इनमें भूखण्ड संख्या 1 मनीष ने अपने नाम से और बाकी दोनों भूखण्ड उसने अपनी पत्नी के साथ संयुक्त रूप से खरीदे थे। नीतू वर्मा के अनुसार इन भूखण्डों पर वर्ष 2005 में ही पीएनबी बैंक से पौने 11 लाख का लोन लेकर मकान बनाये हैं। वर्ष 2015 में पीएनबी बैंक की बीरबल चौक शाखा ने उन्हें लोन चुकता करने के लिए सरफेसी एक्ट के तहत नोटिस दिया।तब उसे यह लोन चुकाने के लिए 10 लाख रुपये की तत्काल जरूरत थी। उसने अपने जीजा अजय वर्मा से बात की, वह 10 लाख देने को तैयार हो गया, लेकिन उसने उक्त भूखण्डों में से 15&45 फुट की जगह की रजिस्टरी अपने नाम करवाने के लिए कहा। नीतू के अनुसार जीजा के साथ यह तय हुआ था कि वह बाद में जब भी उसे 10 लाख रुपये लौटायेगी, वह इस भूखण्ड की रजिस्टरी निरस्त करवाकर कागजात लौटा देगा। नीतू के अनुसार जीजा अजय के साथ उसने यह सब अपने पति को बताये बिना तय किया था। अजय ने उसे 10 लाख रुपये दे दिये और उसने रजिस्टरी करवा दी। नीतू का आरोप है कि कुछ अरसे बाद उसने 10 लाख रुपये अजय को वापिस कर दिये। उसने रजिस्टरी के कागज लौटा दिये, लेकिन रजिस्टरी को निरस्त नहीं करवाया। नीतू ने बताया है कि बाद में उसके पति ने यह सम्पत्ति बेचने का किसी ओर से सौदा कर लिया। अग्रिम के तौर पर मिले रुपयों में से ही 10 लाख रुपये अजय को लौटाये गये थे। नीतू के अनुसार तब उसने अपने पति को अजय से पूर्व में हुई तय बातचीत के बारे में बताया। नीूत का आरोप है कि अब अजय वर्मा रजिस्टरी निरस्त करवाने के लिए टाल-मटोल कर रहा है। तीन दिन से उसे श्रीगंगानगर बुलाया हुआ है। इस दौरान अजय वर्मा ने उसे एक दस्तावेज दिखाया, जिसमें लिखा हुआ है कि यह सम्पत्ति 11 लाख रुपये में उसने अजय को बेच दी है। नीतू का आरोप है कि यह सारा फर्जीवाड़ा अजय ने किया है। इकरारनामा और बयनामा पर उसके फर्जी हस्ताक्षर किये हुए हैं। इन पर कांट-छांट भी की हुई है। जिस तारीख को इकरारनामा-बैयनामा के लिए स्टाम्प पेपर खरीदना और नोटेरी पब्लिक से सत्यापित करना अंकित किया हुआ है, तब वह देहरादून से श्रीगंगानगर आई ही नहीं थी। नीतू वर्मा मूल रूप से स्थानीय एन ब्लॉक की निवासी है। उसके पिता का यहां निजी स्कूल हुआ करता था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *