पुरुषों की तुलना में खतरे में भारतीय महिलाओं का स्वास्थ्य

 

भारतीय महिलाओं को पुरुषों की तुलना में स्वास्थ्य का ज्यादा खतरा है, जिसकी वजह है उनका कम फिजिकली ऐक्टिव होना। एक स्टडी की मानें तो एक्सर्साइज की कमी से दुनियाभर में चार में से एक इंसान को कार्डियोवस्कुलर डिजीज, टाइप 2 डायबीटीज, डिमेंशिया और कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इस रिसर्च को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने करवाया था और लेसेंट जर्नल हेल्थ में छपी है। इसके मुताबिक 2001 से दुनियाभर में फिजिकल ऐक्टिविटी में कोई सुधार नहीं हुआ है। इसमें बताया गया है कि अगर ऐसा ही रहा तो 2025 विश्वभर में फिजिकल इनऐक्टिविटी को 10त्न तक कम करने का जो टारगेट है, वह पूरा नहीं हो पाएगा। स्टडी की लीड ऑथर, डॉक्टर रेजीना के मुताबिक, ‘पूरी दुनिया में चौथाई वयस्क भी बताए गए फिजिकल ऐक्टिविटी के लेवल तक नहीं पहुंच पा रहे। 2016 में 168 देशों में हुए 358 पॉप्युलेशन बेस्ड सर्वे में यह बात सामने आई थी कि पूरी दुनिया में 32 फीसदी महिलाएं और 23 फीसदी पुरुष स्वस्थ्य रहने के लिए जरूरी लेवल तक फिजिकल ऐक्टिविटी नहीं कर रहे। रिकमेंडेड लेवल के मुताबिक स्वस्थ रहने के लिए हर हफ्ते आपको 150 मिनट तक हल्की-फुल्की एक्सर्साइज और 75 मिनट तक जोरदार एक्सर्साइज करनी चाहिए। कम आय वाले देशों में अपर्याप्त ऐक्टिविटी का स्तर 16त्न था जबकि ज्यादा इनकम वाले देशों में 37त्न पाया गया। भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा इनऐक्टिव पाई गईं। यहां 25त्न ऐसे पुरुष थे जो अपर्याप्त फिजिकल ऐक्टिव थे वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा 44त्न पाया गया। चेन्नई की डायबेटॉलजिस्ट डॉक्टर अंजना मोहन के मुताबिक, ‘कई महिलाओं में बीमारी का पता बाद में चल पाता है और दिक्कत ज्यादा हो जाती है क्योंकि वे हेल्थ का ध्यान नहीं रखतीं और इलाज में पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा लापरवाही करती हैं।

 

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